हम उस धरती की संतति हैं स्वाध्याय

हम उस धरती की संतति हैं स्वाध्याय

हम उस धरती की संतति हैं स्वाध्याय इयत्ता दहावी हिंदी

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

१) वर्गीकरण कीजिए :

पद्यांश में उल्लिखित चरित्र-ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, सीता, चाँदबीबी, सावित्री, जयमल

ऐतिहासिकपौराणिक

उत्तर :

ऐतिहासिकपौराणिक
लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, चाँदबीबी, जयमलचरित्र-ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, सीता, सावित्री

२) विशेषताओं के आधार पर पहचानिए :

१. भारत माता के रथ के दो पहिये – ……………………

उत्तर :

लड़का – लड़की।

२. खूब लड़ने वाली मर्दानी – …………………….

उत्तर :

लक्ष्मीबाई, दुर्गावती, रजिया सुलताना।

३. अपनी लगन का सच्चा – ……………………

उत्तर :

प्रह्लाद।

४. किसी को कुछ न गिनने वाले – ………………..

उत्तर :

जयमल-पत्ता।

३) सही/गलत पहचानकर गलत वाक्य को सही करके वाक्य पुन: लिखिए :

१. रानी कर्मवती ने अकबर को राखी भेजी थी।

उत्तर :

गलत

रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी भेजी थी।

२. भरत शेर के दाँत गिनते थे।

उत्तर :

सही

भरत शेर के दतुली गिनते थे।

३. झगड़ने से सब कुछ प्राप्त होता है।

उत्तर :

गलत

झगड़ने से कुछ प्राप्त नहीं होता।

४. ध्रुव आकाश में खेले थे।

उत्तर :

गलत

ध्रुव मिट्टी में खेले थे।

४) कविता से प्राप्त संदेश लिखिए।

उत्तर :

प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि ने समाज में व्याप्त लिंग भेदभाव पर निशाना साधा है। कवि ने अनुसार लड़का हो अथवा लड़की दोनों इसी भारतमाता की संताने हैं। दोनों इसी मिट्टी में पैदा होते हैं, इसलिए दोनों को समान रूप से अधिकार प्राप्त होने चाहिए। कोई भी समाज सिर्फ स्त्री अथवा सिर्फ पुरुष से पूरा नहीं हो सकता है। लड़के लड़कियाँ दोनों भारत माता के रथ के दो पहियों के समान हैं। इस तरह कविता से यह संदेश मिलता है कि कोई बड़ा या कोई छोटा नहीं है, सभी लोग समान हैं। हमें अपने आप पर निरर्थक गर्व नहीं करना चाहिए।

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