सौहार्द सौमनस्य स्वाध्याय

सौहार्द सौमनस्य स्वाध्याय

सौहार्द सौमनस्य स्वाध्याय इयत्ता आठवी हिंदी

कल्पना पल्लवन

‘भारत की विविधता में एकता है’, इसे स्पष्ट करो।

उत्तर :

‘भारत की विविधता में एकता है’ यह कथन हमारे देश की अद्भुत विशेषता को बताता है। भारत एक विशाल देश है जहाँ अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, धर्मों की विविधता है, रीति-रिवाज, परंपराएँ, भोजन और पहनावे भी भिन्न हैं। उत्तर भारत में लोग हिंदी बोलते हैं, दक्षिण में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम जैसी भाषाएँ हैं; पश्चिम में मराठी और गुजराती, तो पूर्व में बंगाली और असमिया बोली जाती है। फिर भी सभी भारतीय अपने आपको “भारतीय” कहलाने में गर्व महसूस करते हैं।

भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन जैसे अनेक धर्मों के लोग रहते हैं, परंतु सभी एक-दूसरे के त्योहारों जैसे दीपावली, ईद, होली, क्रिसमस, गुरु पर्व आदि को मिल-जुलकर मनाते हैं। यह हमारी एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

जब भी देश पर कोई संकट आता है, तो सभी भारतीय एकजुट होकर देश की रक्षा के लिए आगे आते हैं। यही भावना हमारे राष्ट्र को मजबूत बनाती है।
इस प्रकार भारत की असली पहचान उसकी विविधता में निहित एकता है – जो हमें सिखाती है कि भिन्नता के बावजूद हम सब एक हैं, और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :

१) कृति पूर्ण करो :

१.

उत्तर :

२.

उत्तर :

२) कविता में इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द लिखो :

१. दीपक =————
२. पुष्प =————
३. तिरस्कार =————
४. प्रेम =————

उत्तर :

१. दीपक =दीप
२. पुष्प =फूल
३. तिरस्कार =नफरत
४. प्रेम =प्यार

३) कविता में प्रयुक्त विलोम शब्दों की जोड़ियाँ लिखो।

उत्तर :

i) एक X अनेक

ii) नकद X उधार

iii) प्यार X नफरत

iv) छोटा X बड़ा

भाषा बिंदु

पाठों में आए अव्ययों को पहचानो और उनके भेद बताकर उनका अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग करो।

उत्तर :

क्र.अव्यय शब्दअव्यय का नामवाक्य प्रयोग
१)इसलिएसमुच्चयबोधक अव्ययबारिश शुरू हुई इसलिए मैं छाता लेकर चल पड़ा।
२)बल्किसमुच्चयबोधक अव्ययमुझे चाय ही नहीं, बल्कि बिस्कुट भी चाहिए।
३)औरसमुच्चयबोधक अव्ययराजू और निर्मला स्कूल जाते है।
४)परंतुसमुच्चयबोधक अव्ययमैने उसे बहुत समझाया परंतु वह नहीं रुका।
५)आजक्रियाविशेषण अव्ययआज मैं गाँव जाऊँगा।
६)कलक्रियाविशेषण अव्ययकल बारिश आयेगी।
७)अचानकक्रियाविशेषण अव्ययअचानक बारिश शुरू हुई।
८)आह !विस्मयादिबोधक अव्ययआह ! मुखे दर्द हो रहा है।
९)अरे !विस्मयादिबोधक अव्ययअरे ! तुम उधर जाओ।
१०)वाह !विस्मयादिबोधक अव्ययवाह ! क्या खेत है।
११)के लिएसंबंधसूचक अव्ययमैं उसके लिए नई साईकिल खरीदकर नहीं लाई।
१२)के ऊपरसंबंधसूचक अव्ययउसके ऊपर एक मंदिर है।
१३)के साथसंबंधसूचक अव्ययमैं उसके साथ घूमता हूँ।

उपयोजित लेखन

शालेय बैंड पथक के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने हेतु अपने विद्यालय के प्राचार्य से विद्यार्थी प्रतिनिधि के नाते अनुमति माँगते हुए निम्न प्रारूप में पत्र लिखो :

उत्तर :

२५ जनवरी २०२५

प्रति

माननीय प्राचार्य,

महात्मा गांधी महाविद्यालय,

पुणे – ४३०५३०

विषय : शालेय बैंड पथक के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने हेतु अनुमति पत्र।

माननीय महोदय,

सादर प्रणाम।

मैं कुमार राकेश जोशी आपके विद्यालय की कक्षा आठवी ‘ब’ की विद्यार्थी-प्रतिनिधि हूँ। आपको पता है कि इस वर्ष हमारा स्कूल ‘राज्य बैंड प्रतियोगिता’ में हिस्सा लेने वाला है। इसलिए प्रतियोगिता की तैयारी करने के लिए हमें कुछ बैंड सामग्री की जरूरत है। अपने स्कूल के पास जोबैंड सामग्री है वह बहुत ही दयनीय स्थिति में है। अत: इस पत्र के द्वारा मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि अपने विद्यालय के बैंड पथक के लिए सामग्री खरीदने के लिए मुझे अनुमति दे दीजिए।

मुझे आशा है कि हमारी विनंती पर अवश्य विचार करेंगे और हमें सामग्री खरीदने के लिए शीघ्र अनुमति प्रदान करेंगे।

कष्टार्थ क्षमा !

आपकी आज्ञाकारी,

राकेश जोशी,

विद्यार्थी प्रतिनिधि,

कक्षा-आठवी ‘ब’

स्वयं अध्ययन

‘नफरत से नफरत बढ़ती है और स्नेह से स्नेह बढ़ता है’, इस तथ्य से संबंधित अपने विचार लिखो।

उत्तर :

‘नफरत से नफरत बढ़ती है और स्नेह से स्नेह बढ़ता है’ यह बात हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश देती है। जब हम किसी व्यक्ति के प्रति नफरत या द्वेष की भावना रखते हैं, तो वह व्यक्ति भी हमारे प्रति वैसी ही भावना रखता है। परिणामस्वरूप झगड़े, मनमुटाव और तनाव बढ़ते हैं। नफरत का कोई अंत नहीं होता, यह केवल दुख और अशांति लाती है।

इसके विपरीत, यदि हम दूसरों के प्रति प्रेम, सम्मान और स्नेह दिखाते हैं, तो वह भावना भी हमारे पास लौटकर आती है। स्नेह से दिलों में नज़दीकी बढ़ती है, रिश्ते मजबूत होते हैं और समाज में शांति बनी रहती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि स्नेह और प्रेम की भावना ही एक सुखी जीवन और अच्छे समाज की नींव होती है। इसलिए हमें हमेशा नफरत नहीं, बल्कि स्नेह, दया और समझदारी का मार्ग अपनाना चाहिए।

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