कह कविराय स्वाध्याय
कह कविराय स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी

संभाषणीय
विपत्ति में ही सच्चे मित्र की पहचान होती है, स्पष्ट कीजिए :
कृति के लिए आवश्यक सोपान :
विद्यार्थियों से उनके मित्रों के नाम पूछें |
विद्यार्थी किसे अपना सच्चा मित्र मानते हैं, बताने के लिए कहें |
किन-किन कार्यों में मित्र ने उनकी सहायता की है, पूछें |
विद्यार्थी अपने-अपने मित्रों के सच्चे मित्र बनने के लिए क्या करेंगे, बताने के लिए प्रेरित करें |
उत्तर :
मनुष्य के जीवन में मित्र का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है। हर व्यक्ति के कई मित्र होते हैं, परंतु सच्चा मित्र वही होता है जो सुख-दुःख दोनों में साथ दे। जब जीवन में सब कुछ ठीक चलता है, तब हर कोई साथ देता है, लेकिन संकट, दुख या कठिन समय आने पर बहुत से लोग दूर चले जाते हैं। जो उस कठिन समय में हमारी मदद करे, हमें हिम्मत दे, और हमारा साथ न छोड़े — वही सच्चा मित्र कहलाता है।
मेरे विद्यालय में मेरे कई मित्र हैं। उनमें से (आकाश – जैसे “मेरा सच्चा मित्र राहुल है”)। राहुल हमेशा मेरी सहायता करता है। जब मैं बीमार था, तब उसने मेरे लिए नोट्स बनाए और मुझे पढ़ाया। खेल-कूद में भी वह हमेशा मुझे प्रोत्साहित करता है। जब मैं किसी गलती से उदास हो जाता हूँ, तो वह मुझे समझाता है।
मैं भी अपने मित्र का सच्चा साथी बनने की कोशिश करता हूँ। मैं उसे मदद करता हूँ, उसकी भावनाओं की कद्र करता हूँ, और कभी झूठ नहीं बोलता।
सच्चा मित्र वही होता है जो अपने मित्र के सुख-दुख में समान रूप से भाग लेता है।
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
१) संजाल :

उत्तर :

२) उत्तर लिखिए :
क) अपना शीस इसके लिए आगे करना चाहिए तो इसकी प्राप्ति होगी –
उत्तर :
अपना शीस परोपकार के लिए आगे करने पर ईश्वर व सम्मान की प्राप्ति होगी।
ख) बड़ों के द्वारा दी गई सीख –
उत्तर :
हमें सदैव सही मार्ग पर चलना और अपना मान सम्मान बनाए रखना चाहिए।
३) ‘हाथ’ शब्द पर प्रयुक्त कोई एक मुहावरा लिखकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :
हाथ मलना – पछताना।
वाक्य : जो लोग माता-पिता का अपमान करते रहते हैं, वे लोग उनके न रहने पर हाथ मिलते हैं।
4) ‘खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं’ इसपर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
खुशी और गम जीवन के दो महत्त्वपूर्ण पहलू है। खुशी सुख, शांति, सुकून का परिचायक है और गम दुःख, अशांति, बेचैनी का प्रतीक है। गम बाँटने से कम होता है और खुशियाँ बाँटने से और बढ़ती हैं। खुश होने पर हम अपनी खुशियों के बारे में अपने परिवार, रिश्तेदार तथा मित्रों को बताते हैं, तो वे भी हमारी खुशियों में शामिल हो जाते हैं। इससे हमारी खुशी और बढ़ जाती है। जीवन संघर्षों से भरा पड़ा है। इसीलिए हमें अपने जीवन की छोटी-सी-छोटी खुशियाँ भी दूसरों को बाँटनी चाहिए। अपनी खुशियों में दूसरों को शामिल करने से खुशियाँ उत्सव बन जाती है।
श्रवणीय
संत कबीर तथा कवि बिहारी के नीतिपरक दोहे सुनिए और सुनाइए।
उत्तर :
संत कबीर के नीतिपरक दोहे
१.बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जब मन देखा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
भावार्थ:
मनुष्य जब दूसरों में बुराई ढूँढता है तो कोई पूर्ण नहीं मिलता,
पर जब वह अपने मन में झाँकता है तो उसे अपनी ही कमियाँ दिखाई देती हैं।
– यह दोहा हमें आत्मचिंतन और विनम्रता की शिक्षा देता है।
२.धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
भावार्थ:
हर कार्य समय आने पर ही पूरा होता है। जल्दबाज़ी करने से फल नहीं मिलता।
– यह दोहा धैर्य और संयम का संदेश देता है।
कवि बिहारी के नीतिपरक दोहे
१.समुझदारी सबन सों बड़ी, गुन सबन सों मूल।
बिना समुझ के आदमी, रूप रंग कुसूल॥
भावार्थ:
समझदारी सभी गुणों की जड़ है। यदि व्यक्ति में समझ नहीं है तो उसके रूप और रंग का कोई मूल्य नहीं।
– यह दोहा बुद्धिमत्ता और विवेक का महत्व बताता है।
२.ज्यों नैनन में नींद है, त्यों तन में है प्रान।
जीवत ही सुख नींद है, मरि जावे अज्ञान॥
भावार्थ:
जिस प्रकार आँखों के लिए नींद आवश्यक है, उसी प्रकार शरीर के लिए ज्ञान आवश्यक है।
– यह दोहा ज्ञान के महत्व को दर्शाता है।
पठनीय
मीरा का कोई पद पढ़िए।
उत्तर :
मीरा बाई का पद
“पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।”
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
विसरि गई सब ठाठी-वैभव, मिट गया अभिमानो॥
सतसंगत की महिमा, गाई सुनि-सुनि मन मानो।
तुलसीदास, सुमिरन करि मनवा, मिला अनमोल खजानो॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो॥
आसपास
भक्तिकालीन, रीतिकालीन कवियों के नाम और उनकी रचनाओं की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर :
भक्तिकालीन
| क्र. | कवि | रचनाएँ |
|---|---|---|
| 1. | कबीरदास | अगाधमंगल, कबीर की बानी, कबीर की साखी, बीजक |
| 2. | हरिदास निरंजनी | ब्रह्मस्तुति, हंसप्रबोध ग्रंथ, पूजाजोग ग्रंथ, संग्रामजोग ग्रंथ |
| 3. | नानक देव | ग्रंथ साहिब, असा दीवार, रहिरास, सोहिला |
| 4. | तुलसीदास | रामचरित-मानस, विनयपत्रिका, रामललानहछू, हनुमद्बाहुक |
| 5. | केशवदास | रामचंद्रिका, कविप्रिया, रसिकप्रिया, विज्ञानगीता |
रीतिकालीन
| क्र. | कवि | रचनाएँ |
|---|---|---|
| 1. | चिंतामणि | रस विलास, छंदविचार पिंगल, श्रृंगार मंजरी, कृष्णचरित |
| 2. | कुलपति | रस रहस्य, संग्रामसार, दुर्गाभक्तिचंद्रिका, नखशिख |
| 3. | भिखारीदास | रससारांश, काव्यनिर्णय, श्रृंगारनिर्णय, शतरंजशतिका |
| 4. | देव | अष्टयाम, भवानीविलास, देवचरित्र, देवमायाप्रपंच |
| 5. | पद्माकर | हिम्मतबहादुर-विरुदावली, पद्माभरण, गंगालहरी, प्रबोधपचासा |
कल्पना पल्लवन
‘गुन के गाहक सहस नर’ इस विषय पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस संसार में सभी लोगों को गुणी प्रिय होते हैं। किसी भी व्यक्ति का रूप-रंग, व्यक्तित्त्व आदि कुछ ही दिन तक प्रभावित करता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, हमारा ध्यान उसके व्यवहार, गुणों-अवगुणों पर जाता है। जो व्यक्ति मृदुभाषी होता है, परोपकारी होता है, निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करता है, सब उसी को पसंद करते हैं। वे सभी का मन जीत लेते हैं। कटुवादी, स्वार्थी लोग किसी को अच्छे नहीं लगते।
लेखनीय
सामाजिक मूल्यों पर आधारित पद, दोहे, सुवचन आदि का सजावटी सुवाच्य लेखन कीजिए।
उत्तर :
सामाजिक मूल्यों पर आधारित पद, दोहे और सुवचन
१. संत कबीर के दोहे
“साँच कहो तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना।”
भावार्थ: सत्य बोलना कठिन है, पर सत्य ही समाज का सबसे बड़ा मूल्य है।
“माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥”
भावार्थ: सच्ची भक्ति और समाज सुधार मन की शुद्धता से होती है।
२. रहीम के दोहे
“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥”
भावार्थ: जैसे जल के बिना जीवन नहीं, वैसे ही विनम्रता और सदाचार के बिना समाज अधूरा है।
३. मीरा बाई का पद
“साँवरिया मोहे अपनायो जी, मोहे रंग लगायो।”
भावार्थ: मीरा का यह पद प्रेम, समर्पण और भक्ति का संदेश देता है, जो समाज को एकता की राह दिखाता है।
४. सुवचन (सुंदर विचार)
“सदाचार ही मानव का सच्चा आभूषण है।”
“दूसरों की सेवा ही सच्ची उपासना है।”
“जहाँ समानता और प्रेम है, वहीं सच्चा समाज है।”
“बोल मीठे, व्यवहार सच्चा — यही जीवन का सज्जनता सूत्र है।”
पाठ के आँगन में
१) सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :-
क) कौआ और कोकिल में समानता तथा अंतर :
| समानता | अंतर | कवि की दृष्टि से | |
|---|---|---|---|
| कौआ | |||
| कोकिल |
उत्तर :
| समानता | अंतर | कवि की दृष्टि से | |
|---|---|---|---|
| कौआ | काला रंग | कर्कश स्वर | कौआ अपवित्र है। |
| कोकिल | काला रंग | मधुर स्वर | कोकिल सुहावनी है। |
ख) कवि की दृष्टि से मित्र की परिभाषा –
1)
2)
3)
4)
उत्तर :
1) स्वार्थी होते हैं।
2) पैसा होने पर साथ रहते हैं।
3) पैसा नहीं होने पर सीधे मुँह बात तक नहीं करते हैं।
4) नि:स्वार्थ प्रेम करनेवाले बहुत ही कम होते हैं।
ग) आकृति

उत्तर :

२) कविता में प्रयुक्त तत्सम, तद्भव, देशज शब्दों का चयन करके उनका वर्गीकरण कीजिए तथा पाँच शब्दों का वाक्य प्रयोग कीजिए।
उत्तर :
a) तत्सम शब्द:
i) दुर्जन – दुर्जन को कितना ही समझना जाए, वह अपनी दुर्जनता नहीं छोड़ता।
ii) चित्त – किसी भी कार्य में सफलता के लिए चित्त की एकाग्रता आवश्यक है।
b) तद्भव शब्द :
i) गुन – इस संसार मे बिना गुन कोई किसी को महत्त्व नहीं देता।
ii) बिरला – ऐसा मनुष्य बिरला ही होता है, जो परोपकार के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दे।
c) देशज शब्द :
i) धावै – तू मोहि को मारन धावै, दाऊहिं कबहुँ न खीझै।
ii) पछताए – अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।
३) कवि के मतानुसार मनुष्य की विचारधारा निम्न मुद्दों के आधार पर स्पष्ट कीजिए :
च) ऋण लेते समय……………..
उत्तर :
मीठे वचन बोलना, झूठ बोलना।
छ) ऋण लौटाते समय ……………..
उत्तर :
मारने दौड़ना, कागजों को झूठा बताना।
पाठ से आगे
‘बिना विचारे जो करै, सो पाछै पछताय’, कवि के इस कथन की हमारे जीवन में सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि के इस कथन की हमारे जीवन में सार्थकता यह है कि हमें अपने जीवन में असफलता प्राप्त होने पर निराश नहीं होना चाहिए। जो हो गया है उसकी चिंता करने के बदले हमें चिंतन करना चाहिए। अपनी असफलताओं के कारणों का पता लगाना चाहिए। जीवन बहुत बड़ा है और एक के बाद एक कई चुनौतियाँ हमारे सामने आती हैं। अत: वर्तमान को भुलाकर सदैव भविष्य के उद्देश्यों में सफलता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।