बेटी युग स्वाध्याय
बेटी युग स्वाध्याय इयत्ता सातवी हिंदी

अध्ययन कौशल
अपने विद्यालय के पाँचवी से आठवीं तक की कक्षाओं में पढ़ रहे छात्र और छात्राओं की संख्या संयुक्त स्तंभालेख द्वारा दर्शाओ।
उत्तर :

वाचन जगत से
पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर के कार्य पढ़ो और प्रमुख मुद्दे बताओ।
उत्तर :
पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर एक महान, न्यायप्रिय और दयालु शासिका थीं। उन्होंने अपने राज्य का बहुत ही कुशलता से शासन किया। वे जनता की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं।
उनके प्रमुख कार्य और मुद्दे इस प्रकार हैं –
- आहिल्याबाई का जन्म चौंडी नामक गाँव में हुआ था।
- उन्होंने मालवा राज्य का शासन बहुत ही न्याय और समता से किया।
- जनता की समस्याएँ स्वयं सुनकर उनका समाधान करती थीं।
- उन्होंने अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं, कुओं और सरायों का निर्माण करवाया।
- वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
- व्यापार और खेती को बढ़ावा देने के लिए सड़कों और पुलों का निर्माण कराया।
- वे सदैव प्रजा के सुख-दुख में सहभागी रहती थीं।
- उनका शासनकाल “सुव्यवस्था और न्याय का आदर्श उदाहरण” माना जाता है।
सुनो तो जरा
त्योहार मनाने के उद्देश्य की वैज्ञानिकता सुनो और सुनाओ।
उत्तर :
त्योहार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें मनाने के पीछे धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक उद्देश्य छिपे हुए हैं। त्योहार केवल खुशियाँ बाँटने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण और समाज के लिए भी लाभदायक होते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से त्योहार मनाने के उद्देश्य :
- स्वच्छता का संदेश :
हर त्योहार से पहले घर, आँगन और आसपास की सफाई की जाती है। इससे वातावरण स्वच्छ रहता है और बीमारियाँ दूर होती हैं। - स्वास्थ्य लाभ :
त्योहारों में मौसम के अनुसार भोजन बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने से सर्दी में शरीर को ऊष्मा मिलती है। - प्रकृति संरक्षण :
कई त्योहार जैसे वट सावित्री, नागपंचमी या तुलसी विवाह – पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के संरक्षण से जुड़े हैं। इससे पर्यावरण संतुलन बना रहता है। - मानसिक शांति और आनंद :
त्योहार मनाने से मन प्रसन्न होता है, तनाव दूर होता है और नई ऊर्जा मिलती है। - सामाजिक एकता :
त्योहारों पर लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, साथ भोजन करते हैं, सहयोग करते हैं – इससे समाज में प्रेम, भाईचारा और एकता बढ़ती है। - सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण :
त्योहार हमारी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। ये हमें अपने इतिहास और मूल्यों से जोड़े रखते हैं। - शारीरिक गतिविधि और व्यायाम :
त्योहारों में नृत्य, खेल, पूजा या सजावट जैसे कार्यों से शरीर सक्रिय रहता है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य भी बना रहता है।
जरा सोचो …………… लिखो
तुम्हें रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए तो ……
उत्तर :
यदि मुझे रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए तो मैं उसे खोलकर यह देखने की कोशिश करूँगा की उसमें क्या है ? उसमें कोई पहचान पत्र हुआ तो मैं वह बटुआ उसके बलिक तक पहुँचा दूँगा।
यदि बटुए में पहचान पत्र न मिला तो मैं उसके मालिक को ढूँढने की कोशिश करूँगा। आसपास के लोगों से पूछूँगा कि उनमें से तो किसी का नहीं है वह बटुआ। अगर मैं उसके मालिक को ढूँढ़ पाने में सफल हो गया तो अच्छी तरह जाँच करके उसे बटुआ सौंप दूँगा।
यदि बटुए का मालिक मुझे नहीं मिला तो मैं उस बटुए को नजदीक के पुलिस स्टेशन में जमा करा दूँगा।
स्वयं अध्ययन

उत्तर :
स्वयं : उसका जीवन स्तर अच्छा रहेगा। वह आत्मनिर्भर बनेगी। वह अपने देश और समाज के लिए अपना योगदान देने में समर्थ होगी।
परिवार : अपने परिवार को भी शिक्षित बना सकती है। अपने परिवार को सही दिशा दिखा सकती है। अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकती है।
समाज : यदि स्त्री शिक्षित होगी, तो समाज में जागरूकता लाकर सामाजिक उत्थान कर सकती है।
देश : यदि स्त्री शिक्षित होगी, तो देश में विकास की क्रांति आ सकती है। शिक्षित स्त्री देश में व्याप्त बुराइयों को दूर कर प्रगति पथ पर अग्रसर हो सकती है।
विचार मंथन
।। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।।
उत्तर :
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” एक बहुत ही महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है जिसका उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति समानता, सम्मान और शिक्षा का महत्व बढ़ाना है। पहले के समय में बेटियों को बोझ समझा जाता था, परंतु आज यह सोच बदलने की आवश्यकता है। इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि बेटियाँ भी बेटों के समान हैं और उन्हें भी जीवन जीने, पढ़ने तथा आगे बढ़ने का समान अधिकार है। जब बेटियाँ शिक्षित होती हैं, तो वे आत्मनिर्भर बनती हैं और समाज व देश के विकास में अपना योगदान देती हैं। यह अभियान कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को समाप्त करने का भी प्रयास करता है। इसलिए हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपनी बेटी को सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान दे, क्योंकि बेटी पढ़ेगी तभी देश आगे बढ़ेगा।
सदैव ध्यान में रखो
स्वयं को बदलो, समाज बदलेगा।
उत्तर :
हमें हमेशा यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर हमें समाज में सुधार लाना है तो पहले हमें स्वयं को सुधारना होगा। जब हर व्यक्ति अपने व्यवहार, आदतों और सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा, तभी समाज में अच्छा परिवर्तन दिखाई देगा। समाज हम सबका प्रतिबिंब है, इसलिए “स्वयं को बदलो, समाज अपने आप बदल जाएगा।” यह वाक्य हमें प्रेरित करता है कि सुधार की शुरुआत हमेशा अपने आप से करनी चाहिए।
१. कविता की पंक्तियाँ पूरी करो :
क) बेटी युग में ——–, ——। —–, ——- गढ़ेगे।।
उत्तर :
बेटी युग में बेटा-बेटी,
सभी पढ़ेंगे, सभी बढ़ेंगे।
फौलादी ले नेक इरादे
खुद अपना इतिहास गढ़ेंगे।
ख) बेटी युग ——–, ——। —–, ——- उत्थान पर्व है।
उत्तर :
बेटी युग सम्मान पर्व है,
पुण्य पर्व है, ज्ञान पर्व है,
सब सबका सम्मान करें तो,
जन-जन का उत्थान पर्व है।
२. जानकारी लिखो :
च) बेटी पर्व
उत्तर :
आधुनिक युग बेटियों का युग है। इस युग में बेटा-बेटी सब समान है। अब बेटियों को भी शिक्षा, गौरव एवं प्रगति का अधिकार है। बेटी के जन्म पर उत्सव मनाकर, उसे पढ़ाकर हम बेटी पर्व मना सकते है।
छ) शिक्षामय विश्व
उत्तर :
‘शिक्षामय विश्व’ की संकल्पना में संपूर्ण विश्व में शिक्षा का मधुर संगीत बिखेरने का उद्देश्य है। हर नागरिक, शिक्षित होगा तब वह अपने हिस्से के कार्य को ज्ञान और कौशल से कर पाएगा परिणाम स्वरूप संपूर्ण विश्व विकास की नवीनतम ऊँचाईयों को छूने में सक्षम होगा।
भाषा की ओर
निम्नलिखित शब्दों के युग्म शब्द बताओ और वाक्यों में उचित शब्दयुग्म लिखो :
गाँव – ……………., ……………. – उधर, घूमना – ……………., धन – ……………., ……………. – पहचान, कूड़ा – ……………., ……………. – फूल, घर – …………….।

उत्तर :
गाँव – गाँव, इधर – उधर, घूमना – फिरना, धन -दौलत, जान – पहचान, कूड़ा – कचरा, फल – फूल, घर – घर।
