धरती का आँगन महके स्वाध्याय
धरती का आँगन महके स्वाध्याय इयत्ता आठवी हिंदी

कल्पना पल्लवन
‘विश्व शांति की माँग सर्वाधिक प्रासंगिक है’, इस तथ्य पर अपने विचार लिखो।
उत्तर :
विश्व शांति पूरी पृथ्वी में अहिंसा स्थापित करने का एक माध्यम है, जिसके तहत देश या तो स्वेच्छा से या शासन की एक प्रणाली के जरिये इच्छा से सहयोग करते हैं, ताकि युद्ध को रोका जा सके। विश्व के हर एक देश के, हर देश वासी के ह्रदय में सिर्फ प्रेम और करुणा की भावना का ही विस्तार हो और किसी भी देश की, किसी अन्य देश के प्रति तनिक मात्र भी ईर्ष्या भी न हो।
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
१) प्रवाह तालिका पूर्ण करो :

उत्तर :

२) कृति पूर्ण करो :

उत्तर :

३) उत्तर लिखो :
१. मेधा की ऊँचाई नापेगा –
उत्तर :
प्रतिभा का पैमाना।
२. हम सब मिलकर करें –
उत्तर :
जयगान से वसुधा कि अर्चना।
४) कृति करो :

उत्तर :

भाषा बिंदु
अ) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखो तथा उनका वाक्यों में प्रयोग करो :
शरीर, मनुष्य, पृथ्वी, छाती, पथ
उत्तर :
| समानार्थी वाक्य | वाक्य प्रयोग |
|---|---|
| १. शरीर = तन | उसका शरीर बलवान है। |
| २. मनुष्य = मानव | वही मनुष्य है, जो मनुष्य के लिए मरे। |
| ३. पृथ्वी = वसुधा | यह पृथ्वी हमारी माता है। |
| ४. छाती = सीना | वीर की छाती चौड़ी होती है। |
| ५. पथ = रास्ता | हमें योग्य पथ का चयन करना चाहिए। |
आ) पाठों में आए सभी प्रकार के सर्वनाम ढूँढकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग करो।
उत्तर :
आपकी : हम आपकी बातों को मान कर ही आगे कदम बढ़ाएँगे।
हम सब : हम सब बच्चे दुनिया का भविष्य है और हमसे ही हमारा देश है।
आपका : आप हमारे अतिथि हो। आपका स्वागत करना हमारा धर्म है।
उपयोजित लेखन
‘छाते की आत्मकथा’ विषय पर निबंध लिखो।
उत्तर :
मेरा नाम छाता है। मेरा जीवन बड़ा ही रोचक है। मैं एक लोहे की डंडी, कपड़े और कुछ तागों से बना हूँ। मेरा जन्म एक बड़ी फैक्ट्री में हुआ। वहाँ मशीनों की आवाज़ गूंज रही थी। मजदूरों ने मुझे बहुत प्यार से बनाया — किसी ने मेरा ढांचा तैयार किया, किसी ने कपड़ा जोड़ा और किसी ने मेरा हैंडल लगाया। कुछ ही दिनों में मैं सुंदर और चमकदार बन गया।
कुछ दिन बाद मुझे एक दुकान में भेजा गया। वहाँ तरह-तरह के रंग-बिरंगे छाते रखे थे। एक दिन एक छोटे से बच्चे के पापा आए और मुझे खरीदकर ले गए। अब मैं बहुत खुश था, क्योंकि मुझे एक प्यारा मालिक मिल गया था।
बरसात के दिनों में मैं सबसे काम का साथी बन जाता हूँ। जब बारिश शुरू होती है, तब मेरा मालिक मुझे खोलता है और मेरे नीचे सुरक्षित चलता है। मैं उसे भीगने नहीं देता। कभी-कभी तेज़ हवा चलती है और मैं उल्टा भी हो जाता हूँ, पर फिर भी मैं उसका साथ नहीं छोड़ता।
गर्मी के दिनों में मैं धूप से भी बचाता हूँ। सर्दी में मुझे अलमारी में रख दिया जाता है। वहाँ मैं अगले वर्ष की बरसात का इंतज़ार करता हूँ।
मुझे गर्व है कि मैं लोगों को बारिश और धूप से बचाने का काम करता हूँ। यही मेरे जीवन का उद्देश्य है।
स्वयं अध्ययन
प्राचीन भारतीय शिल्पकला संबंधी सचित्र जानकारी संकलित करो, विशेष कलाकृतियों की सूची बनाओ।
उत्तर :

भारत की प्राचीन शिल्पकला विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसका सबसे सुंदर उदाहरण महाराष्ट्र राज्य में स्थित अजंता और एलोरा की गुफाएँ हैं। ये गुफाएँ हमारी प्राचीन भारतीय कला, संस्कृति और धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक हैं। अजंता गुफाएँ पाँचवीं शताब्दी के आसपास बनाई गईं थीं। यहाँ की गुफाओं में बौद्ध धर्म से संबंधित अनेक मूर्तियाँ और सुंदर भित्ति-चित्र (दीवारों पर बनाए चित्र) हैं। इन चित्रों में भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाएँ और जाटक कथाएँ दिखाई गई हैं। चित्रों में उपयोग किए गए रंग प्राकृतिक हैं और इनकी रेखाएँ बहुत कोमल तथा भावपूर्ण हैं। अजंता की गुफा क्रमांक 1 में पद्मापानी बोधिसत्व का चित्र बहुत प्रसिद्ध है। यह चित्र मानव भावनाओं को बड़ी सुंदरता से दर्शाता है।
एलोरा गुफाएँ औरंगाबाद के पास स्थित हैं। यह स्थान हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों की कलाकृतियों का संगम है। यहाँ की सबसे प्रसिद्ध कलाकृति कैलाश मंदिर (गुफा क्रमांक 16) है, जो एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया विशाल मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। एलोरा की गुफाओं में सुंदर मूर्तियाँ, नक्काशियाँ और पुराणों की कथाएँ पत्थर पर उकेरी गई हैं। यहाँ की कलाकृतियाँ यह दर्शाती हैं कि उस समय के शिल्पकार कितने कुशल और कल्पनाशील थे।
अजंता और एलोरा दोनों ही गुफाएँ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल हैं। इन गुफाओं की भित्ति-चित्रकला और शिल्पकला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि कलात्मक दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान हैं। इन कलाकृतियों से हमें भारत के प्राचीन समाज, वस्त्र, संगीत, नृत्य और स्थापत्य कला की जानकारी मिलती है।
इस प्रकार, अजंता और एलोरा की गुफाएँ भारतीय कला का स्वर्णिम अध्याय हैं। ये गुफाएँ हमें यह संदेश देती हैं कि सच्ची कला समय के साथ भी अमर रहती है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति पर गर्व करने की प्रेरणा देती है।