पूर्ण विश्राम स्वाध्याय

पूर्ण विश्राम स्वाध्याय

पूर्ण विश्राम स्वाध्याय इयत्ता आठवी हिंदी

मौलिक सृजन

पर्यटन स्थलों पर सैर करने के लिए जाते समय बरती जाने वाली सावधानियों की सूची बनाओ।

उत्तर :

पर्यटन स्थलों पर घूमने जाना सभी को अच्छा लगता है, लेकिन यात्रा के दौरान कुछ सावधानियाँ बरतनी बहुत आवश्यक होती हैं ताकि यात्रा सुरक्षित और आनंददायक बन सके। नीचे ऐसी ही कुछ आवश्यक सावधानियाँ दी गई हैं :

सावधानियों की सूची :

i) यात्रा से पहले पूरी योजना बनाएं – कहां जाना है, कब जाना है और कितने दिन रुकना है, इसकी योजना बनाएं।

ii) जरूरी कागजात साथ रखें – जैसे पहचान पत्र (ID), टिकट, होटल बुकिंग की रसीद आदि।

iii) स्थानीय नियमों का पालन करें – जिस स्थान पर जा रहे हैं वहां के रीति-रिवाज और नियमों का सम्मान करें।

iv) भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्क रहें – जेबकतरे और चोर-उचक्कों से सावधान रहें।

v) स्वास्थ्य से जुड़ी चीज़ें साथ रखें – जैसे दवाइयाँ, सैनिटाइज़र, पानी की बोतल आदि।

vi) प्राकृतिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं – पर्यावरण को साफ़ और सुरक्षित रखें।

vii) खाने-पीने में सावधानी बरतें – साफ-सुथरा और ताजा खाना ही खाएं।

viii) सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार करें – शोरगुल न करें, अनुशासन बनाए रखें।

ix) रास्ता भटकने पर घबराएं नहीं – नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्प सेंटर से संपर्क करें।

x) बड़ों और मार्गदर्शक की सलाह मानें – उनके अनुभव से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

श्रवणीय

दूरदर्शन, रिडीओ, यू-ट्यूब पर हास्य कविता सुनो और सुनाओ।

उत्तर :

मैंने यू-ट्यूब पर कवि डॉ. हरिओम पंवार की एक हास्य कविता सुनी। इस कविता में उन्होंने छात्र जीवन और परीक्षा के समय होने वाली परेशानियों को बहुत मज़ेदार तरीके से प्रस्तुत किया। कविता की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार थीं:

“पढ़ाई में मन नहीं लगता,
किताबें देखकर सिर दुखता।
सवाल आता है पेपर में,
जो कभी किताब में ही न दिखता!”

इस कविता को सुनकर मुझे बहुत आनंद आया और पढ़ाई से जुड़े कई मज़ेदार अनुभव भी याद आ गए।

इसके बाद मैंने यह कविता अपने दोस्तों और छोटे भाई-बहनों को भी सुनाई। सभी बहुत हँसे और कहा कि यह कविता तो बिलकुल हमारे ऊपर ही बनी है!

इस अनुभव से यह समझ आया कि हास्य कविता सिर्फ हँसाने के लिए नहीं होती, बल्कि वह जीवन की सच्चाइयों को हँसी के रूप में हमारे सामने रखती है। ऐसी कविताएँ हमारे तनाव को कम करती हैं और हमें प्रसन्नचित्त बनाए रखती हैं।

पठनीय

प्रेमचंद की कोई कहानी पढ़ो और उसका आशय, अपने शब्दों में व्यक्त करो।

उत्तर :

मैंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “कफन” पढ़ी। यह कहानी एक गरीब बाप-बेटे, घीसू और माधव की है, जो अत्यंत आलसी और निकम्मे होते हैं। जब माधव की पत्नी प्रसव पीड़ा में मर जाती है, तब भी वे कोई मदद नहीं करते। पत्नी की मौत के बाद वे गाँव के लोगों से कफन के लिए भीख मांगते हैं, लेकिन वह पैसा शराब और खाना खाने में उड़ा देते हैं।

इस कहानी का आशय यह है कि समाज में कुछ लोग गरीबी का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचते हैं। कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि गरीबी सिर्फ आर्थिक नहीं होती, बल्कि मानसिक और नैतिक भी होती है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से समाज की असंवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के पतन को दर्शाया है।

यह कहानी हमें संवेदनशील, जिम्मेदार और ईमानदार बनने की प्रेरणा देती है।

लेखनीय

‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ के अवसर पर यातायात के नियमों के बैनर्स बनाकर विद्यालय की दीवारों पर लगाओ।

उत्तर :

संभाषणीय

किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच का संवाद प्रस्तुत करो।

उत्तर :

ग्राहक: नमस्ते भैया! क्या आपके पास चाय की पत्तियाँ हैं?

दुकानदार: नमस्ते जी! हाँ, टाटा, ब्रुक बॉन्ड और रेड लेबल तीनों ब्रांड की पत्तियाँ हैं। कौन-सी दूँ?

ग्राहक: एक किलो टाटा वाली दे दीजिए। और साथ में आधा किलो चीनी भी।

दुकानदार: जी, अभी देता हूँ। और कुछ लेना है क्या?

ग्राहक: हाँ, दो साबुन और एक टूथपेस्ट भी दे दीजिए।

दुकानदार: ये लीजिए साबुन और टूथपेस्ट। कुछ और?

ग्राहक: नहीं, बस इतना ही। कितना हुआ कुल?

दुकानदार: सब मिलाकर ₹280 हुए।

ग्राहक: ये लीजिए ₹300। बाकी पैसे वापिस दीजिए।

दुकानदार: जी, ये ₹20 आपका बकाया। धन्यवाद!

ग्राहक: धन्यवाद भैया, नमस्ते!

दुकानदार: फिर आइएगा, नमस्ते!

सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-

१) संजाल पूर्ण करो :

उत्तर :

२) प्रवाह तालिका पूर्ण करो :

उत्तर :

३) लिखो :

पर्यायवाची शब्द :

उत्तर :

भाषा बिंदु

निम्नलिखित समोच्चरित भिन्नार्थक हिंदी शब्दों के अर्थ लिखो तथा उन शब्दों का अलग-अलग पूर्ण वाक्यों में प्रयोग करो :

हार, वार, हल, सीना, ज्वार, सुमन

उत्तर :

१. हार

अर्थ 1: गले में पहनने की वस्तु (माला)
वाक्य: माँ ने भगवान को फूलों की हार चढ़ाई।

अर्थ 2: पराजय
वाक्य: मेहनत करने वाला कभी हार नहीं मानता।

२. वार

अर्थ 1: दिन
वाक्य: रविवार मेरा पसंदीदा वार है।

अर्थ 2: प्रहार या हमला
वाक्य: सैनिक ने दुश्मन पर तलवार से जोरदार वार किया।

३. हल

अर्थ 1: खेत जोतने का औज़ार
वाक्य: किसान ने खेत में हल चलाया।

अर्थ 2: समाधान
वाक्य: हर समस्या का कोई न कोई हल जरूर होता है।

४. सीना

अर्थ 1: शरीर का भाग
वाक्य: देशभक्तों का सीना गर्व से चौड़ा होता है।

अर्थ 2: कपड़ा सिलना
वाक्य: दादी बहुत अच्छा कपड़े सीना जानती हैं।

५. ज्वार

अर्थ 1: समुद्र की लहरों की चढ़ाव-उतार
वाक्य: पूर्णिमा की रात को समुद्र में ज्वार आया।

अर्थ 2: एक अनाज
वाक्य: ज्वार की रोटी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है।

६. सुमन

अर्थ 1: फूल
वाक्य: बाग में तरह-तरह के सुमन खिले हैं।

अर्थ 2: लड़की का नाम (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
वाक्य: सुमन कक्षा की सबसे होशियार छात्रा है।

उपयोजित लेखन

कोई साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप में प्राप्त होने के विरोध में शिकायत करते हुए संपादक को निम्न प्रारूप में पत्र लिखो :

उत्तर :

दिनांक : १०-११-२०२४

सेवा में,

संपादक महोदय,

किशोर पत्रिका,

दादर,

मुंबई – ४०० ०२८ (महाराष्ट्र)

विषय : साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप में प्राप्त होने के विरोध में शिकायता पत्र।

मान्यवर,

आपके यहाँ से प्रकाशित ‘किशोर’ साप्ताहिक पत्रिका का मैं नियमित पाठक हूँ। मैं इसका वार्षिक सदस्य हूँ। मेरा सदस्यता क्रमांक १२४ है।

श्रीमान जी, पिछले काफी समय से हमारी प्रिय पत्रिका हमें विलंब से मिल रही है। इस पत्रिका में हम बच्चों की जान बसती है। हम सभी मित्र बड़ी बेसब्री से ‘किशोर’ की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

मेरा आपसे अनुरोध है कि संबंधित विभाग को निर्देश दें कि भविष्य में हमारी पत्रिका हमें समय पर भिजवाने प्रबंध करें।

भवदीय,

उदय कांबले,

लोणावला, (महाराष्ट्र)

ई-मेल : ABC@gmail.com

स्वयं अध्ययन

प्राचीन काल से आज तक प्रचलित संदेश वहन के साधनों की सचित्र सूची तैयार करो।

उत्तर :

प्राचीन काल से आज तक प्रचलित संदेश वहन के साधनों की सूची (सचित्र विवरण सहित):

1. दूत / संदेशवाहक (Messenger)

प्रयोग काल: प्राचीन भारत

विवरण: राजा-महाराजाओं के समय संदेश एक व्यक्ति द्वारा मौखिक या लिखित रूप में पहुँचाया जाता था।

चित्र सुझाव: एक आदमी हाथ में संदेश लिए घोड़े पर।

2. ध्वज या ध्वनि संकेत (Flags / Drum Signals)

प्रयोग काल: युद्धकाल में या विशेष घोषणाओं हेतु

विवरण: संदेश देने के लिए रंगीन झंडों या नगाड़ों का उपयोग किया जाता था।

चित्र सुझाव: किले पर फहराते झंडे या सैनिक ढोल बजाते हुए।

3. कबूतर द्वारा संदेश (Pigeon Post)

प्रयोग काल: मध्यकाल

विवरण: प्रशिक्षित कबूतरों के पैरों में संदेश बाँधकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता था।

चित्र सुझाव: उड़ता कबूतर जिसके पैर में संदेश बंधा हो।

4. डाक प्रणाली (Postal System)

प्रयोग काल: ब्रिटिश काल से आज तक

विवरण: पत्र, पोस्टकार्ड, टेलीग्राम जैसी सेवाओं से संदेश भेजे जाते हैं।

चित्र सुझाव: लाल डाक पेटी, डाकिया साइकिल पर।

5. टेलीफोन / टेलीग्राफ

प्रयोग काल: 19वीं शताब्दी से

विवरण: टेलीफोन से आवाज़ के माध्यम से संदेश और टेलीग्राफ से तार भेजे जाते थे।

चित्र सुझाव: पुराना टेलीफोन यंत्र या तारघर।

6. रेडियो और टेलीविजन

प्रयोग काल: 20वीं शताब्दी से

विवरण: समाचार, सूचना और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बने।

चित्र सुझाव: रेडियो सेट, पुराना टीवी।

7. मोबाइल फोन और एसएमएस

प्रयोग काल: 21वीं शताब्दी

विवरण: अब लोग मोबाइल से कॉल, मैसेज या इंटरनेट के माध्यम से संदेश भेजते हैं।

चित्र सुझाव: स्मार्टफोन की स्क्रीन पर मैसेजिंग ऐप।

8. ईमेल, सोशल मीडिया और चैटिंग ऐप्स

प्रयोग काल: आधुनिक युग

विवरण: Gmail, WhatsApp, Instagram, Facebook इत्यादि से लोग पल भर में संदेश और जानकारी साझा करते हैं।

चित्र सुझाव: मोबाइल में व्हाट्सऐप, ईमेल आइकन आदि।

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