दो लघुकथाएँ स्वाध्याय इयत्ता आठवी
दो लघुकथाएँ स्वाध्याय इयत्ता आठवी हिंदी

मौलिक सृजन
‘विनम्रता सारे सद्गुणों की नींव है’ विषय पर अपने मन के भाव लिखो।
उत्तर :
विनम्रता सारे सद्गुणों की नींव है, मनुष्य के व्यक्तित्व का आभूषण है। जो व्यक्ति विनम्र होता है, उसका सभी आदर-सम्मान करते है। विनम्रता के कारण ही हम दूसरों से जुड़ पाते हैं। विनम्रता का अर्थ है कि यदि हमारे लिए कोई कुछ करे या हमारे कार्य में हमें सहयोग दे, तो हम उसका आभार मानें और उसे ह्रदय से धन्यवाद दें। यदि हमसे कोई गलती हो जाए, तो हमें तुरंत उसे मानकर अपनी भूल के लिए क्षमा माँग लेनी चाहिए। भारतीय संस्कृति में विनम्रता को व्यक्त करने के लिए प्रणाम और अभिवादन करने की परंपरा है। बड़ों से झुककर आशीर्वाद लेने की प्रथा है। इन सबसे हमारे मन का अहंकार गलता है, मन साफ होता है।
संभाषणीय
‘इंद्रधनुष के सात रंग, रहें हमेशा संग-संग’ इस कथन के आधार पर कहानी बनाकर अपने सहपाठियों के सामने प्रस्तुत करो।
उत्तर :
एक बार की बात है। बरसात के मौसम में आसमान में इंद्रधनुष के सात रंग – लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी – खुशी-खुशी चमक रहे थे।
धीरे-धीरे उनमें आपसी झगड़ा शुरू हो गया।
लाल रंग गर्व से बोला, “मैं सबसे शक्तिशाली हूँ, क्योंकि मेरा रंग प्रेम और साहस का प्रतीक है।”
नारंगी बोला, “मैं ऊष्मा और ऊर्जा का रंग हूँ, मेरे बिना जीवन में जोश नहीं रहता।”
पीला बोला, “मैं तो रोशनी का रंग हूँ, मेरे बिना दुनिया अंधेरी हो जाएगी।”
हरा बोला, “मैं प्रकृति का रंग हूँ, मेरे बिना धरती पर कोई जीवन नहीं रहेगा।”
नीला बोला, “मैं शांति और आकाश का रंग हूँ, मेरे बिना संसार में सुकून नहीं रहेगा।”
जामुनी बोला, “मैं राजसी और गरिमा का रंग हूँ, जो सबको सम्मान देता हूँ।”
और अंत में बैंगनी बोला, “मैं रहस्य और गहराई का प्रतीक हूँ, मेरे बिना सुंदरता अधूरी है।”
सभी अपने-अपने गुण बताकर घमंड करने लगे। तभी आसमान में काले बादल छा गए, बिजली कड़कने लगी और बारिश तेज हो गई। सातों रंग डरकर इधर-उधर भाग गए।
तभी इंद्रदेव प्रकट हुए और बोले –
“हे रंगो! तुम सब अकेले कुछ नहीं हो। जब तुम एक साथ मिलते हो, तभी आकाश में सुंदर इंद्रधनुष बनता है, जो लोगों को आशा, खुशी और एकता का संदेश देता है।
अगर तुम अलग हो गए, तो तुम्हारी चमक फीकी पड़ जाएगी।”
रंगों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने एक-दूसरे से माफी माँगी और फिर से मिलकर एक सुंदर, सात रंगों वाला इंद्रधनुष बन गए।
आकाश में उनकी चमक देखकर धरती के लोग आनंदित हो उठे। बच्चों ने ताली बजाई, पक्षियों ने गीत गाए और पूरा वातावरण रंगों से भर गया।
श्रवणीय
किसी समारोह का वर्णन उचित विराम, बलाघात, तान-अनुतान के साथ ‘एकाग्रता’ से सुनो और यथावत सुनाओ।
उत्तर :
हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में हमारे नगर के माननीय जिलाधिकारी महोदय पधारे थे।
प्रधानाचार्य महोदय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यालय की उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए –
कविता पाठ, नृत्य, गीत और नाटक ने सबका मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि ने अपने प्रेरणादायक भाषण में कहा –
“विद्यार्थियों! जीवन में सफलता पाने के लिए अनुशासन, परिश्रम और एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है।”
इसके बाद विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण किया गया।
मेहनती छात्रों के चेहरे पर गर्व और खुशी की चमक थी।
अंत में विद्यालय गीत गाया गया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
सभी लोग खुशी और प्रेरणा से भरकर घर लौटे।
सुनाते समय ध्यान देने योग्य बातें:
- विराम: जहाँ वाक्य समाप्त हो, वहाँ थोड़ी देर रुकें।
- बलाघात: “वार्षिक पुरस्कार वितरण”, “मुख्य अतिथि”, “सांस्कृतिक कार्यक्रम” जैसे शब्दों पर थोड़ा ज़ोर दें।
- तान-अनुतान: खुशी और उत्साह वाले अंशों में स्वर ऊँचा रखें, शांत अंशों में धीमा।
- एकाग्रता: ध्यानपूर्वक सुनें और स्पष्ट उच्चारण के साथ दोहराएँ।
पठनीय
श्रमनिष्ठा का महत्त्व बताने वाला कोई निबंध पढ़ो।
उत्तर :
मानव जीवन में श्रम का बहुत बड़ा महत्त्व है। श्रमनिष्ठा का अर्थ है अपने कार्य के प्रति निष्ठा, लगन और ईमानदारी से काम करना। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह कभी असफल नहीं होता। श्रमनिष्ठ व्यक्ति भाग्य या किस्मत पर भरोसा नहीं करता, बल्कि अपने कर्मों पर विश्वास रखता है। मेहनती व्यक्ति ही जीवन में ऊँचाइयों को प्राप्त करता है। किसान खेतों में परिश्रम करता है, तभी हमें अन्न मिलता है। मजदूर दिन-रात मेहनत करते हैं, तभी हमारे घर और इमारतें बनती हैं। विद्यार्थी अगर श्रमनिष्ठ होकर पढ़ाई करे तो वह अवश्य सफल होता है। श्रमनिष्ठा से आत्मविश्वास और आत्मसम्मान दोनों बढ़ते हैं। जो व्यक्ति अपने कार्य के प्रति निष्ठावान होता है, वही समाज में सम्मान प्राप्त करता है। हमारे देश के महान लोग जैसे महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने भी अपने जीवन में श्रम और निष्ठा के बल पर महानता प्राप्त की। श्रम करने से व्यक्ति का जीवन उज्जवल बनता है और उसमें सच्ची खुशी का अनुभव होता है। इसलिए हमें सदैव मेहनत करने की आदत डालनी चाहिए और हर कार्य को पूरी लगन व ईमानदारी से करना चाहिए, क्योंकि “श्रम ही सफलता की कुंजी है।”
लेखनीय
किसी समारोह के मुख्य बिंदुओं, एवं मुद्दों को पढ़ो। इनका पुन: स्मरण करके लिखो।
उत्तर :
समारोह के मुख्य बिंदु :-
१. समारोह का प्रथम मुख्य बिंदु है समारोह किस उपलक्ष में मनाया जा रहा है ताकि उसके आधार पर समारोह की सजावट की जा सके।
२. दूसरा मुख्य बिंदु समारोह में आ रहे अतिथियों के स्वागत की विशेष तैयारी की जानी चाहिए।
३. समारोह का मुख्य द्वार समारोह समारोह के उपलक्ष के आधार पर सजाया जाना चाहिए।
४. समारोह में जिस उत्सव को या दिवस को मनाया जा रहा है। उस दिवस पर आधारित भाषण नाटक और कविता तैयार की जानी चाहिए।
५. समारोह में आ रहे अतिथियों के स्वागत के साथ-साथ उनके भोजन की भी उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :
१) संजाल पूर्ण करो :

उत्तर :

२) उत्तर लिखो :

उत्तर :

३) विधानों के सामने चौखट में सही ✓ अथवा गलत X चिह्न लगाओ :
१. जिह्वा ने अविवेक पूर्ण उत्तर दिया।
उत्तर :
X
२. दाँत घमंडी थे।
उत्तर :
✓
३. सभी अपराधियों को नियमानुसार सजा नहीं हुई।
उत्तर :
X
४. ठेकेदार पुराना था।
उत्तर :
X
४. उचित जोड़ियाँ मिलाओ :
| अ | उत्तर | आ |
|---|---|---|
| १. बहुमंजिला | ———— | १. ईमानदार |
| २. अधिकारी | ———— | २. इमारत |
| ३. नया ठेकेदार | ———— | ३. भ्रष्ट |
| ४. सार्वजनिक समारोह | ———— | ४. अनुभवी |
| ५. सम्मान |
उत्तर :
| अ | उत्तर | आ |
|---|---|---|
| १. बहुमंजिला | २. इमारत | १. ईमानदार |
| २. अधिकारी | ३. भ्रष्ट | २. इमारत |
| ३. नया ठेकेदार | १. ईमानदार | ३. भ्रष्ट |
| ४. सार्वजनिक समारोह | ५. सम्मान | ४. अनुभवी |
| ५. सम्मान |
भाषा बिंदु
निम्नलिखित शब्दों के आधार पर मुहावरे लिखकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

उत्तर :
i) ईंट
ईंट से ईंट बजाना।
अर्थ : सर्वनाश करना।
वाक्य : राम जी ने रावण की सेना की ईंट से ईंट बजा दी।
ii) जान
जान से हाथ धोना।
अर्थ : मारे जाना।
वाक्य : देश की आजादी के लिए कई क्रांतिकारियों को जान से हाथ धोना पड़ा।
iii) पानी
पानी पानी होना।
अर्थ : लज्जित होना।
वाक्य : अपने बेटे की करतूतों से शर्मा जी शर्म से पानी पानी हो गए।
iv) खिचड़ी
अपनी खिचड़ी अलग पकाना।
अर्थ : अलग-अलग रहना।
वाक्य : देश बरबादी की दहलीज पर है पर लोग अपनी अलग अलग खिचड़ी पका रहे है।
उपयोजित लेखन
‘जल के अपव्यय की रोकथाम’ संबंधी चित्रकला प्रदर्शनी का आकर्षक विज्ञापन तैयार करो।
उत्तर :

स्वयं अध्ययन
किसी ग्रामीण और शहरी व्यक्ती की दिनचर्या की तुलनात्मक जानकारी प्राप्त करके आपस में चर्चा करो।
उत्तर :
रवि: अरे सुमित! क्या तुम्हें पता है, गाँव और शहर के लोगों की दिनचर्या में कितना अंतर होता है?
सुमित: हाँ, बिल्कुल! गाँव का व्यक्ति सुबह बहुत जल्दी उठता है। वह सूर्योदय से पहले ही अपने काम पर लग जाता है – कोई खेत में जाता है, कोई पशुओं को चारा डालता है।
रवि: सही कहा तुमने। गाँव में जीवन सरल होता है, लोग प्रकृति के करीब रहते हैं। वहाँ ताज़ी हवा और शांत वातावरण होता है।
सुमित: लेकिन शहर का जीवन थोड़ा अलग होता है। शहर का व्यक्ति देर से उठता है और उसे दफ्तर या दुकान पर जाने की जल्दी होती है। ट्रैफिक, शोर और प्रदूषण में उसे रोज़ भागदौड़ करनी पड़ती है।
रवि: हाँ, गाँव के लोग ज़्यादा मेहनत करते हैं, लेकिन उनका जीवन शांत और स्वास्थ्यकर होता है।
वहीं शहर के लोग सुविधाओं से घिरे रहते हैं – बिजली, पानी, शिक्षा, अस्पताल – सब कुछ आसानी से उपलब्ध होता है।
सुमित: बिल्कुल! पर गाँव में लोग एक-दूसरे के दुख–सुख में साथ रहते हैं, जबकि शहर में लोग अक्सर अपने काम में व्यस्त रहते हैं।
रवि: तो हम कह सकते हैं कि –
गाँव का जीवन सरल, शांत और प्राकृतिक है,
जबकि शहर का जीवन व्यस्त, आधुनिक और सुविधाजनक है।