जंगल स्वाध्याय

जंगल स्वाध्याय

जंगल स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी

संभाषणीय

‘जंगल में रहने वाले पक्षीयों के मनोगत’ इस विषय पर कक्षा में चर्चा का आयोजन कीजिए :-

कृति के लिए आवश्यक सोनाप :

पिंजडे में कौन से पक्षी रखे जाते है; पूछें।

पक्षीयों की बोलियों की जानकारी लें।

पक्षी एक-दूसरे से और विद्यार्थी से पक्षीयों के संवादों का नाट्यीकरण कारवाएँ।

उत्तर :

कक्षा में ‘जंगल में रहने वाले पक्षियों के मनोगत’ विषय पर एक आयोजन किया गया। सबसे पहले छात्रों ने यह जानने का प्रयास किया कि पिंजड़े में कौन-कौन से पक्षी रखे जाते हैं। जैसे कि तोते, मोर, कबूतर, बुलबुल और चिड़ियाँ। इसके बाद पक्षियों की बोलियों और उनके विभिन्न स्वर-संकेतों के बारे में जानकारी ली गई। छात्रों ने यह भी देखा कि कैसे अलग-अलग पक्षी अलग-अलग प्रकार की आवाज़ करते हैं, जैसे तोते चहकते हैं, बुलबुल मीठी आवाज़ में गीत गाती है, और मोर अपने पंख फैलाकर आवाज़ निकालता है।

इसके बाद कक्षा में पक्षियों और विद्यार्थियों के संवाद का नाट्यीकरण किया गया। छात्र-पक्षियों ने एक-दूसरे से बातचीत की, जैसे “भोजन कहाँ मिलेगा?”, “हम कहाँ उड़ें?” या “मेरा घोंसला सुरक्षित है या नहीं?” विद्यार्थियों ने पक्षियों की भावनाओं और उनके जीवन की परिस्थितियों को समझते हुए संवाद प्रस्तुत किया। इस नाट्यीकरण से बच्चों ने यह भी जाना कि जंगल में पक्षी केवल बोलते ही नहीं हैं, बल्कि वे अपने व्यवहार, आवाज़ और रंग-रूप से भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं।

अंत में चर्चा में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जंगल में रहने वाले पक्षी न केवल प्रकृति को सुंदर बनाते हैं, बल्कि जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी देखभाल करना और उनके जीवन को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। इस गतिविधि से छात्रों ने न केवल पक्षियों के मनोगत को समझा, बल्कि उनके व्यवहार और जंगल के महत्व को भी अनुभव किया।

संभाषणीय

‘जंगल के राजा का मनोगत’ इस विषय पर कक्षा में चर्चा का आयोजन कीजिए।

उत्तर :

कक्षा में हमने ‘जंगल के राजा का मनोगत’ विषय पर चर्चा का आयोजन किया। चर्चा में सभी बच्चों ने भाग लिया और अपने-अपने विचार व्यक्त किए। किसी ने कहा कि जंगल का राजा बहुत न्यायप्रिय और समझदार होता है, जो सभी जानवरों की भलाई सोचता है। किसी ने यह भी बताया कि राजा अपने शासन में जंगल के नियम बनाए रखता है और किसी भी जानवर के साथ अन्याय नहीं होने देता। कुछ बच्चों ने यह विचार रखा कि राजा को अपने जंगल की सुरक्षा और संसाधनों की रक्षा करनी चाहिए। अंत में, हमने यह निष्कर्ष निकाला कि जंगल का राजा केवल ताकतवर नहीं बल्कि बुद्धिमान और दयालु होना चाहिए, ताकि सभी जानवर शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें।

मौलिक सृजन

‘जंगल ऑक्सिजन की आपूर्ति करने वाले स्रोत हैं’ इस विषय पर अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर :

इंसान सहित सभी प्राणियों को जीने के लिए प्राणवायु अर्थात ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। धरती पर सिर्फ पेड़-पौधे ही हैं जो वातावरण को शुद्ध करने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। परंतु, विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ पिछले कुछ सालों में बड़े-बड़े कारखानों, वाहनों आदि की संख्या बढ़ी है। इन्हीं बड़े -बड़े कारखानों से विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसें निकलती हैं। हमारे परिसर में मौजूद पेड़-पौधे इन्हीं जहरीली गैसों को सोखकर पर्यावरण को शुद्ध बनाते हैं। यदि धरती से पेड़-पौधों का अस्तित्व मिट गया, तो जीवन का अस्तित्व भी मिट जाएगा। सभी प्राणीमात्र शुद्ध हवा के न रहने पर दम तोड़ देंगे।अत: जीवन के अस्तित्व को कायम रखने के लिए जंगल का अस्तित्व बरकरार रखना होगा।

पठनीय

जंगलों से प्राप्त होने वाले संसाधनों की जानकारी का वाचन कीजिए।

उत्तर :

जंगलों से प्राप्त होने वाले संसाधन:
जंगल हमारे लिए अनेक प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  1. लकड़ी: निर्माण कार्य, फर्नीचर और ईंधन के लिए उपयोग होती है।
  2. फल और फलियाँ: जैसे आम, सीताफल, बेर आदि।
  3. जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ: कई प्रकार की जड़ी-बूटियाँ और औषधीय पौधे जंगलों से प्राप्त होते हैं।
  4. पशु और पक्षी: शिकार और कृषि में सहायक पशु-पक्षी।
  5. अनाज और शहद: जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले अनाज और मधु मिलते हैं।
  6. फूल और पत्तियाँ: सजावट और औषधीय प्रयोगों में काम आती हैं।

लेखनीय

उत्तर :

१) नाम : पेंच राष्ट्रीय उद्यान

स्थान : नागपुर

विशेषताएँ : इसे वर्ष 1993 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था और यहाँ हिमालयी प्रदेशों से लगभग 210 प्रजातियों के पक्षी आते हैं।

२) नाम : संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान

स्थान : मुंबई

विशेषताएँ : यहाँ कई प्रकार के स्तनधारी जीवों के साथ ही 250 प्रजातियों के पक्षी आदि देखने को मिलते हैं।

३) नाम : ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान

स्थान : चंद्रपुर

विशेषताएँ : रॉयल बंगाल टाइगर ही यहाँ का मुख्य आकर्षण है। यहाँ तकरीबन 80 बाघ हैं।

आसपास

अपने गाँव/शहर के वन विभाग अधिकारी से उनके कार्यसंबंधी जानकारी प्राप्त कीजिए।

उत्तर :

मैंने अपने गाँव के वन विभाग अधिकारी से उनके कार्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य कार्य जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा करना है। वे नए पौधे लगाने, वन्य जीवों के लिए अभयारण्यों का रखरखाव और जंगलों में आग लगने से रोकने का काम करते हैं। इसके अलावा, वे लोगों को पेड़ों और पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूक करते हैं और अवैध कटाई या शिकार रोकने के लिए नियमों का पालन करवाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका उद्देश्य वन्य जीवन और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है।

श्रवणीय

उत्तर :

मानो एक सूखा वृक्ष बोल रहा है। वह अपने दुःख और पीड़ा को व्यक्त करता है। कहता है कि वह लंबे समय से पानी और देखभाल के बिना खड़ा है, उसके पत्ते झड़ गए हैं और जीवन कठिन हो गया है। वृक्ष यह भी बताता है कि लोग उसकी कद्र नहीं करते, उसे काटते हैं और उसके आस-पास का वातावरण प्रदूषित हो गया है। वह यह समझाना चाहता है कि बिना पेड़ों के हवा साफ नहीं रहती, पक्षियों और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। वृक्ष हमें चेतावनी देता है कि हमें प्रकृति और पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए और हमें पानी, संरक्षण और प्यार देकर जीवन को संरक्षित रखना चाहिए।

पाठ के आँगन में

१) सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :-

क) प्रवाह तालिका : कहानी के पात्र तथा उनके स्वभाव की विशेषताएँ :-

उत्तर :

ख) पहचानिए रिश्ते :

१) दादी – तविषा – ………………..

उत्तर :

सास – बहू

२) पीयूष – शैलेश – ……………….

उत्तर :

बेटा – बाप

३) तविषा – शैलेश – ………………..

उत्तर :

पत्नी – पति

४) शैलेश – दादी – ………………

उत्तर :

बेटा – माँ

पाठ से आगे

पालतू प्राणियों के लिए आप क्या करते हैं, विस्तार पूर्वक लिखिए |

उत्तर :

मेरे पास एक पालतू कुत्ता है | उसका नाम मोती है | मैं रोज शामको उसके साथ घर के पास स्थित बगीचे में घूमने जाता हूँ | मैं मोती को अपने हाथों से नहलाता हूँ | उसकी साफ-सफाई की पूरी जिम्मेदारी मेरे ही कंधों पर है | मेरे विद्यालय चले जाने के बाद मेरी माँ उसकी देखरेख करती है | जब कभी मोती बीमार पड़ जाता है, तो मेरा पूरा परिवार परेशान हो जाता है | उसके ठीक होने तक मैं दिन-रात उसकी देखभाल करता हूँ | उसके खान-पान पर मैं बहुत ध्यान देता हूँ | उसके लिए मैं दुकान से तरह-तरह के पौष्टिक आहार लाता हूँ | जानवरों के लिए जरूरी सभी टीके मैं उसे लगवाता हूँ | मोती मेरे परिवार का हिस्सा बन चुका है |

२) पत्र लेखन :-

गरमी की छुट्टियों में महानगरपालिका/नगर परिषद/ ग्राम पंचायतों द्वारा पक्षियों के लिए बनाए घोंसले तथा चुग्गा-दाना-पानी की व्यवस्था किए जाने के कारण संबंधित विभाग की प्रशंसा करते हुए पत्र लिखिए |

उत्तर :

27 अप्रैल, 2024

सेवा में,

मा. अध्यक्ष,

महानगरपालिका,

पुणे, महाराष्ट्र |

विषय : सराहनीय कार्य के लिए धन्यवाद देने हेतु |

महोदय,

मैं राजेश कुमार, लक्ष्मी अपार्टमेंट, गांधीनगर में रहता हूँ | मैं अपने इस पत्र के माध्यम से हमारे क्षेत्र में पक्षियों के लिए घौसले बनाने व चुग्गा-दाना-पानी व्यवस्था शुरू किए जाने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ | गर्मी होने के नाते पक्षियों को दाना-पानी के लिए काफी भटकना पड़ता था | कई बार हमारे क्षेत्र में अस्थायी तौर पर स्थानिकों ने भूखे-प्यासे पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था की | इसके बाद इस संदर्भ में कोई ठोस व स्थायी कदम उठाने के लिए महानगरपालिका से पत्र द्वारा निवेदन किया गया |

मुझे प्रसन्नता है कि आप लोगों ने हमारे ने हमारे पत्र का न केवल उत्तर दिया, बल्कि फौरन ही क्षेत्र में चुग्गा -दाना -पानी व्यवस्था के साथ ही पक्षियों के रहने की भी व्यवस्था की | आपकी इस फौरी प्रक्रिया से क्षेत्र के सभी निवासी बहुत प्रसन्न व संतुष्ट हैं |

धन्यवाद !

भवदीय,

राजेश कुमार,

गांधीनगर, पुणे |

३) कहानी लेखन :-

दिए गए शब्दों की सहायता से कहानी लेखन कीजिए | उसे उचित शीर्षक देकर प्राप्त होने वाली सीख भी लिखिए :-

अकाल, तालाब, जनसहायता, परिणाम

उत्तर :

“अकाल की समस्या”

रामपुर गाँव के सभी लोग कड़ी मेहनत करते थे और उनकी मेहनत के बदले धरती सोना उगलती थी | एक वर्ष आसमान के बादल रूठ गए, परिणाम स्वरूप गाँव में भयंकर सूखा पड़ा | वन्य और पालतू जीव पानी व चारे की कमी से मरने लगे | गाँववालों की हालत भी पानी के अभाव के कारण खराब होने लगी |

गाँव के सभी लोगों ने इस सुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करने की ठानी | अगले ही दिन गाँव के सभी लोग अकाल की समस्या के संदर्भ में गाँव के सरपंच से मिलने हेतु पंचायत में इकट्ठा हुए | सभी पानी की किल्लत और अनाज की कमी के बारे में अपनी-अपनी राय रख रहे थे | चर्चा के दौरान सरपंच ने अकाल की समस्या से निपटने के लिए गाँव के आसपास तालाबों की खुदाई करने का सुझाव दिया | सभी गाँव वालों ने सरपंच के सुझाव का समर्थन किया |

जल्दी ही गाँव के सभी लोग मिलकर तालाब की खुदाई में लग गए | जनसहायता से आने वाले कुछ ही महीनों में गाँव के आसपास चार बड़े तालाब खोद दिए गए | कुछ ही दिनों में वर्षा ऋतु का आगमन हुआ और भरपूर वर्ष हुई | रामपुर की धरती की प्यास बुझी और चारों नए तालाब पानी से लबालब होकर बहने लगे | इन तालाबों की खुदाई का परिणाम यह हुआ कि कई वर्षों के बाद एक बार फिर वर्षा नहीं हुई, लेकिन रामपुर में अकाल की स्थिति पैदा नहीं हुई |

सीख : परस्पर सहयोग से हर संकट का सामना किया जा सकता है |

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