सिंधु का जल स्वाध्याय

सिंधु का जल स्वाध्याय

सिंधु का जल स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी

आसपास

नदी के जल-प्रदूषण पर चर्चा कीजिए :-

कृति के आवश्यक सोपान :

विद्यार्थियों से उनके परिवेश की नदी का नाम पूछें।

उस नदी के उद्गम-स्थल का जन्म जानें।

नदी के जल का उपयोग किन कामों के लिए होता है, बताने के लिए कहें।

नदी की वर्तमान स्थिति और सुधार के उपाय पर चर्चा कराएँ।

उत्तर :

कक्षा में “नदी के जल-प्रदूषण” विषय पर एक महत्वपूर्ण चर्चा आयोजित की गई।

सबसे पहले शिक्षक ने विद्यार्थियों से उनके क्षेत्र की नदी का नाम पूछा। विद्यार्थियों ने बताया – किसी ने गोदावरी, किसी ने कृष्णा, तो किसी ने नर्मदा नदी का नाम लिया। फिर सभी ने अपनी-अपनी नदी के उद्गम-स्थान की जानकारी दी। उदाहरण के लिए, गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर पर्वत से होता है।

इसके बाद विद्यार्थियों ने बताया कि नदी के जल का उपयोग पीने, सिंचाई, स्नान, बिजली उत्पादन, और औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

फिर चर्चा का विषय बना – नदी की वर्तमान स्थिति। विद्यार्थियों ने बताया कि आजकल नदियों का पानी गंदा हो गया है, क्योंकि

  • कारखानों का रासायनिक अपशिष्ट,
  • घरों का गंदा पानी,
  • प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा,
  • धार्मिक सामग्री का विसर्जन आदि नदियों में डाला जा रहा है।

इन कारणों से जल-प्रदूषण बढ़ रहा है और जलचर जीवों का जीवन संकट में है।

अंत में सुधार के उपायों पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने सुझाव दिए –

  • नदियों में कचरा या पूजा की सामग्री नहीं फेंकनी चाहिए।
  • कारखानों के अपशिष्ट को साफ करके ही छोड़ा जाए।
  • जनजागृति अभियान चलाया जाए।
  • सरकारी योजनाओं जैसे ‘नमामी गंगे’ की तरह हर नदी की सफाई हो।

चर्चा का निष्कर्ष यह निकला कि —
नदियाँ हमारी जीवनरेखा हैं, इन्हें स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है।

संभाषणीय

‘जल ही जीवन है’ इस विषय पर कक्षा में गुट बनाकर चर्चा कीजिए।

उत्तर :

कक्षा में “जल ही जीवन है” विषय पर एक रोचक और ज्ञानवर्धक चर्चा आयोजित की गई।

शिक्षक ने सबसे पहले विद्यार्थियों से पूछा – “पानी का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है?”
विद्यार्थियों ने उत्तर दिया कि जल के बिना जीवन असंभव है। मनुष्य, पशु, पक्षी, पौधे – सभी को जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है।

पहले गुट के विद्यार्थियों ने बताया कि जल का उपयोग पीने, पकाने, सफाई, खेती, उद्योग, और बिजली उत्पादन जैसे अनेक कार्यों में होता है।

दूसरे गुट ने कहा कि आज जल की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। कई स्थानों पर भूजल स्तर नीचे जा रहा है, नदियाँ सूख रही हैं, और लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं।

तीसरे गुट ने इस पर उपाय सुझाए –

  • वर्षा जल संग्रहण (Rainwater harvesting) करना चाहिए।
  • नदियों और तालाबों को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।
  • पेड़-पौधे अधिक लगाकर जल संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • पानी का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए, व्यर्थ बहाना नहीं चाहिए।

पठनीय

रवींद्रनाथ टैगोर की कोई कविता पढ़कर ताल और लय के साथ उसका गायन कीजिए।

उत्तर :

कक्षा में रवींद्रनाथ टैगोर जी की प्रसिद्ध कविता “जहाँ मन भय से मुक्त हो” (Where the mind is without fear) का वाचन और गायन ताल व लय के साथ किया गया।

कविता इस प्रकार है –

“जहाँ मन भय से मुक्त हो,
और मस्तक ऊँचा हो,
जहाँ ज्ञान मुक्त हो,
जहाँ दुनिया संकीर्ण दीवारों से
टुकड़ों में न बाँटी गई हो,
जहाँ शब्द सत्य की गहराई से निकलते हों,
जहाँ कर्म पूर्णता की ओर बढ़ते हों,
जहाँ बुद्धि निरंतर प्रवाहमान हो –
हे परमपिता, मेरे देश को
उस स्वर्ग में जगाओ।”

श्रवणीय

अंतरजाल/यू ट्यूब से ‘जल संधारण’ संबंधी जानकारी सुनकर उसका संकलन कीजिए।

उत्तर :

जानकारी के अनुसार –
जल संधारण का अर्थ है वर्षा के पानी को व्यर्थ न बहने देना और उसे विभिन्न तरीकों से संग्रहित और सुरक्षित रखना।
यह प्रक्रिया नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं और भूमिगत जलस्तर को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य उपाय:

  1. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): छतों और आँगनों से वर्षा जल को पाइपों द्वारा टंकियों या भूमिगत टैंकों में जमा किया जा सकता है।
  2. तालाब और झीलों का संरक्षण: पुराने जलाशयों की सफाई और गहराई बढ़ाकर पानी रोकना चाहिए।
  3. वनरोपण (Tree Plantation): पेड़ मिट्टी को बाँधकर वर्षा जल को सोखने में मदद करते हैं।
  4. ड्रिप सिंचाई प्रणाली: कृषि में कम पानी में अधिक सिंचाई के लिए यह तकनीक उपयोगी है।
  5. जनजागरण अभियान: लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।

कल्पना पल्लवन

‘मैं हूँ नदी’ इस विषय पर कविता कीजिए।

उत्तर :

“मैं हूँ नदी”

मैं हूँ नदी, जीवन की धारा,
लहरों में गूँजे संगीत प्यारा।
पहाड़ों से निकलती कल-कल,
धरती को देती जीवन जल।

हर खेत को मैं हरियाली दूँ,
प्यासे मन को मैं तृप्ति दूँ।
नगर-गाँव से होकर बहती,
सबको जीवन का संदेश कहती।

पर जब मुझको दूषित करते,
कचरा, रसायन मुझमें भरते।
तब मैं रोती, दुखी हो जाती,
अपनी चमक भी खो जाती।

संभालो मुझको, रखो पवित्र,
मैं हूँ धरती का अमृत चित्र।
जो मुझे सहेजेगा प्यार से,
मैं जीवन दूँगी संसार से।

पाठ के आँगन में

१) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

क) आकृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

ख) पूर्ण कीजिए –

पावन जल स्नान करने वालों से नहीं पूछता –

१.

२.

३.

उत्तर :

१. उनकी जात

२. उनका मजहब

३. उनका धर्म

२) भारत के मानचित्र में अलग-अलग राज्यों में बहने वाली नदियों की जानकारी निम्न मुद्दों के आधार पर तालिका में लिखिए :

अ. क्र.नदी का नामउद्गम स्थलराज्यबाँध का नाम

उत्तर :

अ. क्र.नदी का नामउद्गम स्थलराज्यबाँध का नाम
१.सतलुजतिब्बत स्थित मानसरोवर झील के निकट राक्षसतालपंजाबभाखड़ा नांगल
२.चंबलजानापाव पहाड़ीमध्य प्रदेशगांधी सागर
३.महानदीसिहवा रायपुर छत्तीसगढ़उड़ीसाहीराकुंड

३) पाठ से ढूँढकर लिखिए :

च) संगीत – लय निर्माण करने वाले शब्द।

उत्तर :

प्रवाहमान-पहचान, उछलती-मचलती, आती-समाती, धोता-रोता, वैसे-कैसे, बिंदु-सिंधु।

छ) भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ लिखिए और ऐसे अन्य दस शब्द ढूँढिए।

अलि –

उत्तर :

१. अलि – भौंरा

अली – सखी

२. चिर – पुराना

चीर – कपड़ा

३. दिन – दिवस

दीन – गरीब

४. कृति – रचना

कृती – निपुण

५. तरी – गीलापन

तरि – नाव

६. तरणि – सूर्य

तरणी – छोटी नाव

७. आदि – आरंभ

आदी – अभ्यस्त

८. कोष – खजाना

कोश – शब्द-संग्रह

९. अंस – कंधा

अंश – हिस्सा

१०. अवधि – समय

अवधी – भाषा

पाठ से आगे

‘नदी जल मार्ग योजना’ के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।

उत्तर :

नदी जल मार्ग योजना” भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य नदियों का उपयोग परिवहन और व्यापार के साधन के रूप में करना है। पहले के समय में नदियाँ वस्तुओं के आवागमन का प्रमुख माध्यम थीं। अब आधुनिक तकनीक से फिर से जलमार्गों को विकसित किया जा रहा है ताकि सड़कों और रेलमार्गों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।

इस योजना के तहत गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा जैसी प्रमुख नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे न केवल इंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण भी कम होगा। जलमार्ग से एक बार में अधिक माल सस्ता और सुरक्षित तरीके से पहुँचाया जा सकेगा।

इसके अलावा यह योजना ग्रामीण विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करती है।
नदी जल मार्ग योजना से देश का आर्थिक विकास तेज़ी से हो सकता है।

भाषा बिंदु

१) प्रेरणार्थक क्रिया का रूप पहचानकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए :-

क) जिसे वहाँ से जबरन हटाना पड़ता था।

उत्तर :

हटाना – प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया।

वाक्य : सड़क के बीचोंबीच बंद पड़े ट्रक को लोगों ने वहाँ से हटाना शुरू किया।

ख) महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा निर्मित होने से ‘उम्मेद भवन’ कहलवाया जाता है।

उत्तर :

कहलवाया – द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया।

वाक्य : विद्यालय की प्रार्थना सभा में सभी बच्चों से जयहिंद कहलवाया गया।

२) सहायक क्रिया पहचानिए :-

च) हम मेहरान गढ़ किले को ओर बढ़ने लगे।

उत्तर :

लगे – लगना

छ) काँच का कार्य पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देता है।

उत्तर :

देता है – देना

३) सहायक क्रिया का वाक्य में प्रयोग कीजिए।

त) होना

उत्तर :

होना – राम ने कहा होगा

थ) पड़ना

उत्तर :

पड़ना – सभी जसवंत थंडा नाम से विख्यात स्मारक देखने चल पड़े

द) रहना

उत्तर :

रहना – सीता हमेशा यही कहती रहती

ध) करना

उत्तर :

करना – हम हर क्षेत्र में अपना हुनर दिखाया करेंगे

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