स्वतंत्रता गान स्वाध्याय
स्वतंत्रता गान स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी

संभाषणीय
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम संबंधी पढ़ी/सुनी किसी प्रेरणादायी घटना/प्रसंग पर चर्चा कीजिए :-
कृति के लिए आवश्यक सोपान :
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभ और उसमे सम्मिलित सेनानियों के नाम पूछें।
अपने परिसर की किसी ऐतिहासिक भूमि के बारे में बताने के लिए कहें।
किसी सेनानी के जीवन की प्रेरणादायी घटना का महत्त्वपूर्ण अंश कहलवाएँ।
यदि विद्यार्थी सेनानी के स्थान पर होते तो क्या करते, बताने के लिए प्रेरित करें।
उत्तर :
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से माना जाता है। इस आंदोलन में मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, नाना साहेब जैसे अनेक वीर सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आगे चलकर महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू जैसे महान नेताओं ने आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी।
मेरे शहर के पास स्थित एक ऐतिहासिक स्थान पर भी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति से जुड़ी घटनाएँ हुई थीं। वहाँ के लोगों ने अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन में सक्रिय भाग लिया था।
मुझे सबसे अधिक प्रेरणा भगत सिंह की घटना से मिलती है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन अपने विचारों और साहस से युवाओं को जागरूक किया। उनका यह संदेश आज भी प्रेरणा देता है कि देश की सेवा सर्वोपरि है।
यदि मैं उस समय एक सेनानी होता, तो मैं भी देश की आज़ादी के लिए अपने जीवन का बलिदान देने से पीछे नहीं हटता। मैं अन्याय और दासता के विरुद्ध आवाज उठाकर देशवासियों में एकता और साहस का संदेश फैलाता।
श्रवणीय
क) राष्ट्रभक्ति पर आधारित कोई कविता सुनिए।
उत्तर :
हमारा भारत महान
सारा जहाँ हमारा, प्यारा देश महान,
जहाँ गूँजे हर गली में, “जय हिन्द” का गान।
शहीदों ने हँसकर दी, अपनी प्यारी जान,
उनके बलिदान से रोशन, है मेरा हिन्दुस्तान।
हिमालय सी ऊँचाई इसकी, सागर सी गहराई,
रंग-बिरंगे फूलों जैसी, इसकी सुंदराई।
कृषि, विज्ञान, संस्कृति का, अद्भुत है मेल,
भारत माता के चरणों में, हम अर्पित करें खेल।
नभ में गूँजे तिरंगे की शान,
गर्व से कहो – “मेरा भारत महान!”
ख) अपने देश की विविधताएँ सुनिए।
उत्तर :
हमारा देश भारत विविधताओं से भरा हुआ है। यहाँ अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, भिन्न-भिन्न प्रकार के भोजन खाए जाते हैं और लोगों की वेशभूषा भी क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है। उत्तर में हिमालय के सुंदर पर्वत हैं, दक्षिण में विस्तृत समुद्र तट, पूर्व में हरियाली से भरपूर क्षेत्र हैं और पश्चिम में विशाल रेगिस्तान। भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं, जैसे दिवाली, ईद, पोंगल, ओणम, बैसाखी आदि। इतनी भिन्नताओं के बावजूद सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। यही विविधता हमारे देश की सबसे बड़ी पहचान है और भारत को अद्वितीय बनाती है।
लेखनीय
समूह बनाकर भारत की विशेषता बताने वाले संवाद का लेखन कीजिए तथा समारोह में उसकी प्रस्तुति कीजिए।
उत्तर :
भारत की विशेषताएँ
पात्र : आर्या, रोहन, सिया, और अमन
आर्या : दोस्तों! हमारे विद्यालय में “भारत की विशेषताएँ” विषय पर एक संवाद प्रस्तुति होनी है। चलो, इसकी तैयारी करते हैं।
रोहन : हाँ, बहुत अच्छा विचार है! भारत विविधताओं से भरा देश है – यहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म और संस्कृतियाँ हैं, फिर भी सब “एकता में अनेकता” का उदाहरण हैं।
सिया : बिल्कुल सही कहा! भारत की कला, संगीत, नृत्य और साहित्य पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी जैसे नृत्य हमारे गौरव हैं।
अमन : और भारत का इतिहास भी गौरवशाली है – यहाँ महात्मा गांधी, नेहरू, रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी विवेकानंद जैसे महान नेता हुए हैं जिन्होंने पूरे विश्व को प्रेरित किया।
आर्या : हमारे वैज्ञानिक भी पीछे नहीं हैं – इसरो ने चंद्रयान और मंगलयान भेजकर भारत को अंतरिक्ष शक्ति बनाया है।
रोहन : भारत की प्राकृतिक सुंदरता भी अद्भुत है – हिमालय की ऊँचाइयाँ, केरल के बैकवॉटर, राजस्थान के रेगिस्तान, सब कुछ अपने-आप में अनोखा है।
सिया : और सबसे बड़ी बात यह है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं।
अमन : सच कहा सिया! हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं।
सभी मिलकर :
“विविधता में एकता – यही है भारत की पहचान!”
पठनीय
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र संबंधी जानकारी पढिए और छोटी-सी टिपण्णी तैयार कीजिए।
उत्तर :
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। इसका श्रेय इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) को जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। इसरो ने सीमित साधनों के बावजूद कई महान उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
भारत ने 1975 में ‘आर्यभट्ट’ उपग्रह का प्रक्षेपण किया, जो उसका पहला उपग्रह था। इसके बाद चंद्रयान-1, मंगलयान (मंगल ऑर्बिटर मिशन) और हाल ही में चंद्रयान-3 जैसी सफल अभियानों ने भारत को अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया।
भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और बुद्धिमत्ता के कारण आज भारत उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण, संचार, मौसम पूर्वानुमान और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर है।
टिप्पणी :
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र देश की प्रगति, विज्ञान-प्रेम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसने न केवल भारत का नाम विश्व में रोशन किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना है।
कल्पना पल्लवन
‘विश्व स्तर पर भारत की पहचान निराली है’, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भारत विश्व के प्राचीनतम और महान देशों में से एक है। इसकी पहचान विश्व स्तर पर अपनी संस्कृति, परंपराओं, ज्ञान-विज्ञान, और विविधता के कारण निराली है। भारत को “विविधता में एकता” के लिए जाना जाता है, जहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ एक साथ फलती-फूलती हैं।
भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, योग, आयुर्वेद, साहित्य, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिकता ने पूरे विश्व में अपनी छाप छोड़ी है। यहाँ के महापुरुषों – जैसे महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – ने अपनी विचारधारा और कर्म से मानवता को नई दिशा दी।
आज भारत तकनीकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, खेल, और कला के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। “मेड इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसी पहल से देश आत्मनिर्भर बन रहा है।
इसलिए कहा जा सकता है कि –
“विश्व स्तर पर भारत की पहचान निराली है, क्योंकि यह केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, एक प्रेरणा और एक सभ्यता का प्रतीक है।”
पाठ में आँगन में
१) ‘यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है’ इस पंक्ति में आई कवि की भावना स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए संघर्ष का इतिहास बहुत लंबा है। देशवासियों के सैंकडों वर्षों के अनथक प्रयासों और बलिदानों के फलस्वरूप स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई है। सभी देशवासी प्रसन्न हैं, क्योंकि लंबे समय तक विदेशियों की गुलामी के बाद आजादी की हवा में साँस लेने का अवसर भारतवासियों को मिला है। वे हर परिस्थिति में इस स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखना चाहते हैं। देशवासियों के छोटे-छोटे विभिन्न मतभेदों का प्रभाव चिर प्रतीक्षित स्वतंत्रता पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रत्येक देशवासी का यही भावना है।
२) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :
| अतीत | प्रार्थना |
| पुनीत | साधना |
| अनंत | भावना |
| विनीत | कल्पना |
| अशांति |
उत्तर :
| अतीत | कल्पना |
| पुनीत | भावना |
| अनंत | साधना |
| विनीत | प्रार्थना |
पाठ से आगे
अंतरजाल/ग्रंथालय से ‘दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन’ (सार्क) में भारत की भूमिका की जानकारी प्राप्त करके टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) में भारत की भूमिका पर टिप्पणी :
सार्क (SAARC) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका (बांग्लादेश) में हुई थी। इस संगठन का उद्देश्य दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत इस संगठन का सबसे बड़ा और प्रभावशाली सदस्य देश है।
भारत ने सार्क की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हमेशा से क्षेत्रीय एकता, शांति और विकास का समर्थन किया है। भारत ने सदस्य देशों – अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका – के साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई हैं।
भारत सार्क विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) की स्थापना का भी प्रमुख प्रणेता रहा है, जिससे सदस्य देशों के विद्यार्थियों में शैक्षणिक सहयोग बढ़ा। भारत ने आपदा प्रबंधन, गरीबी उन्मूलन, और क्षेत्रीय संपर्क सुधारने के लिए भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
संक्षेप में :
भारत सार्क में एक नेतृत्वकारी भूमिका निभाता है और दक्षिण एशिया में शांति, प्रगति व पारस्परिक सहयोग की भावना को मजबूत करने में निरंतर प्रयासरत है।