जब तक जिंदा रहूँ लिखता रहूँ स्वाध्याय

जब तक जिंदा रहूँ लिखता रहूँ स्वाध्याय

जब तक जिंदा रहूँ लिखता रहूँ स्वाध्याय इयत्ता दहावी हिंदी

श्रवणीय

किसी बुजुर्ग से स्वतंत्रतापूर्व भारत की विस्तृत जानकारी सुनिए और मित्रों को सुनाइए।

उत्तर :

स्वतंत्रतापूर्व भारत की जानकारी (बुजुर्गों से सुनी हुई)

मेरे मोहल्ले के एक बुजुर्ग दादाजी ने मुझे स्वतंत्रतापूर्व भारत के बारे में बहुत रोचक और प्रेरक जानकारी सुनाई। उन्होंने बताया कि आज़ादी से पहले भारत अंग्रेजों के अधीन था। उस समय लोगों को स्वतंत्रता, अधिकार और सम्मान नहीं मिलते थे। अंग्रेजों की कड़ी नीतियों के कारण जनता अत्यंत परेशान थी। नमक कर, जमीन कर और अन्य कई अन्यायपूर्ण करों ने आम आदमी का जीवन बहुत कठिन बना दिया था।

बुजुर्गों ने बताया कि उस दौर में शिक्षा के अवसर कम, साधन सीमित और सामाजिक स्थितियाँ भी कमजोर थीं। लोग साधारण कपड़े पहनते, मिट्टी के घरों में रहते और बहुत मेहनत करके जीवनयापन करते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीयों में देशभक्ति, साहस और एकता अपार थी। महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेहरू, सुभाषचंद्र बोस जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना संघर्ष किया। दादाजी ने बताया कि आज़ादी के लिए लोगों ने सत्याग्रह, आंदोलन और जेल यात्राएँ भी झेलीं।

अंत में उन्होंने कहा कि आज जो स्वतंत्र भारत हम देख रहे हैं, वह उन संघर्षों का परिणाम है। इसलिए हमें हमेशा अपने स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करना चाहिए और देश के विकास में योगदान देना चाहिए।

यह बातें मैंने अपने मित्रों को सुनाई, ताकि वे भी स्वतंत्रतापूर्व भारत को समझ सकें और स्वतंत्रता का मूल्य जान सकें।

लेखनीय

किसी खिलाड़ी का साक्षात्कार लेने हेतू प्रश्नों की सूची बनाइए।

उत्तर :

  1. आपका नाम और आप किस खेल से जुड़े हुए हैं?
  2. आपको इस खेल में रुचि कब और कैसे पैदा हुई?
  3. अपने खेल की शुरुआत में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
  4. आपकी सफलता में आपके परिवार और कोच की क्या भूमिका रही है?
  5. आपका दैनिक अभ्यास (Training Routine) कैसा होता है?
  6. कौन-सा मैच/प्रतियोगिता आपके लिए सबसे यादगार रही और क्यों?
  7. खेल के मैदान में दबाव को आप कैसे संभालते हैं?
  8. आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
  9. फिटनेस और आहार (Diet) के बारे में आप क्या ध्यान रखते हैं?
  10. अपने खेल में आगे आपका क्या लक्ष्य है?
  11. आज के युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
  12. अपने खेल को चुनने वालों को आप कौन-सी महत्वपूर्ण टिप्स देंगे?
  13. क्या आपको लगता है कि भारत में खेलों को पर्याप्त प्रोत्साहन मिलता है?
  14. चोट लगने पर आप मानसिक और शारीरिक रूप से कैसे संभलते हैं?
  15. खेल के अलावा आपकी अन्य रुचियाँ क्या हैं?

पठनीय

प्रसिद्ध व्यक्तियों के भाषण पढिए और चर्चा कीजिए।

उत्तर :

प्रसिद्ध व्यक्तियों के भाषण प्रेरणादायी होते हैं। ऐसे भाषणों में उनके जीवन अनुभव, संघर्ष, सफलता के सूत्र और समाज के प्रति संदेश शामिल होते हैं। महात्मा गांधी, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, सरदार पटेल, नेहरूजी, सुभाषचंद्र बोस, सावित्रीबाई फुले, और कई महान नेताओं के भाषण पढ़ने से हमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्य, समर्पण और आत्मविश्वास जैसी महत्वपूर्ण बातें सीखने मिलती हैं।

इन भाषणों में अक्सर युवाओं के लिए प्रोत्साहन, जीवन में लक्ष्य निर्धारण, कठिनाइयों से जूझने की शक्ति तथा समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा दी जाती है।

जब कक्षा में ऐसे भाषणों पर चर्चा की जाती है, तब विद्यार्थी अपनी-अपनी समझ साझा करते हैं, विचारों में स्पष्टता आती है और वे महान व्यक्तियों की सोच से प्रेरित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित होते हैं।

इस प्रकार प्रसिद्ध व्यक्तियों के भाषण पढ़ना और उन पर चर्चा करना विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।

संभाषणीय

‘आज के समय में पत्र लेखन की सार्थकता’ पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर :

आज के तकनीकी युग में मोबाइल, ईमेल और सोशल मीडिया ने संचार को बहुत तेज़ बना दिया है, फिर भी पत्र लेखन की सार्थकता आज भी बनी हुई है। पत्र केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। पत्र पढ़ते समय व्यक्ति भेजने वाले की भावनाएँ, उसके लिखे हुए शब्दों की गर्माहट और आत्मीयता को महसूस करता है।

पत्र लेखन से व्यवस्थित, स्पष्ट और शुद्ध भाषा लेखन की आदत विकसित होती है। यह धैर्य, विनम्रता और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाता है। सरकारी कार्यों, शिकायतों, औपचारिक संवाद तथा आवेदन पत्रों में आज भी पत्र लेखन अनिवार्य है।

इसके माध्यम से पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं क्योंकि एक पत्र दिल से दिल को जोड़ता है। इसलिए तकनीक के बढ़ते दौर में भी पत्र लेखन का महत्व समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह संस्कृति, भावनाओं और संवाद की एक सुंदर परंपरा के रूप में आज भी सार्थक है।

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

१) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

२) उत्तर लिखिए :-

१. नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित करने वाला अनुभव ————————-

उत्तर :

साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में लाठीचार्ज हुआ था। इस अनुभव ने नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित किया।

२. नागर जी अपने पिता जी के इस गुण से प्रभावित थे ——————–

उत्तर :

किसी के दुख-दर्द में तुरंत पहुँचना। नागर जी अपने पिताजी के इस गुण से प्रभावित थे।

३) कोष्ठक में दी गई नागर जी की साहित्य कृतियों का वर्गीकरण कीजिए :

[कब लौं कहौं लाठी खाय, खंजन नयन, अपशकुन, नाच्यो बहुत गोपाल, महाकाल, प्रायश्चित, गदर के फूल]

कहानीउपन्यायकविताअन्य

उत्तर :

कहानीउपन्यायकविताअन्य
अपशकुन, प्रायश्चितखंजन नयन, नाच्यो बहुत गोपाल, महाकालकब लौं कहौं लाठी खायगदर के फूल

४) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

५) लिखिए :

उत्तर :

६) एक शब्द में उत्तर लिखिए :

१. नागर जी के प्रिय लेखक –

उत्तर :

रामविलास शर्मा

२. नागर जी के प्रिय आलोचक –

उत्तर :

पाठकीय प्रतिक्रिया देने वाले पात्र

३. अपनी इस रचना के लिए नागर जी को बहुत लोगों से मिलना पड़ा –

उत्तर :

गदर के फूल

४. नागर जी का पहला उपन्यास –

उत्तर :

महाकाल

७) लिखिए :

अ) तद्धित शब्दों का मूल शब्द :

१. साहित्यिक =

उत्तर :

साहित्यिक = साहित्य

२. विलायती =

उत्तर :

विलायती = विलायत

ब) कृदंत शब्दों का मूल शब्द :

१. खिंचाव =

उत्तर :

खिंचाव = खींचना

२. लिखावट =

उत्तर :

लिखावट = लिखना

८) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :

‘अ’ रचनाउत्तर‘ब’ रचनाकार
१. देसी और विलायती१.अमृतलाल नागर
२. अपशकुन२.तुलसीदास
३. आनंद मठ३.प्रभात कुमार मुखोपाध्याय
४. रामचरितमानस४.बंकिमचंद्रचटर्जी सूरदास

उत्तर :

‘अ’ रचनाउत्तर‘ब’ रचनाकार
१. देसी और विलायती१. प्रभात कुमार मुखोपाध्यायअमृतलाल नागर
२. अपशकुन२. अमृतलाल नागरतुलसीदास
३. आनंद मठ३. बंकिमचंद्रचटर्जी सूरदासप्रभात कुमार मुखोपाध्याय
४. रामचरितमानस४. तुलसीदासबंकिमचंद्रचटर्जी सूरदास

अभिव्यक्ति

‘ज्ञान तथा आनंद प्राप्ति का साधन : वाचन’ पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर :

वाचन मनुष्य के जीवन को समृद्ध बनाने वाला श्रेष्ठ साधन है। पढ़ने से हमें विविध विषयों का ज्ञान प्राप्त होता है। इतिहास, विज्ञान, साहित्य, समाज-इन सभी क्षेत्रों की जानकारी पुस्तकें हमें घर बैठे प्रदान करती हैं। वाचन हमारी चिंतन शक्ति को बढ़ाता है, शब्दज्ञान विकसित करता है और व्यक्तित्व को परिपक्व बनाता है।

ज्ञान के साथ-साथ वाचन हमें मानसिक आनंद भी देता है। अच्छी कहानियाँ, कविताएँ या चरित्रचित्र हमें भावनात्मक रूप से समृद्ध करती हैं। पढ़ते समय हमें नई दुनिया देखने का अनुभव होता है, जिससे मन प्रसन्न और शांत रहता है। यह तनाव दूर कर मन में सकारात्मकता भर देता है।

इस प्रकार, वाचन केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और आनंद का महान साधन भी है। नियमित वाचन से हमारा जीवन अधिक सार्थक और ऊर्जावान बनता है।

भाषा बिंदु

१) निम्न वाक्यों में आई हुई मुख्य और सहायक क्रियाओं को रेखांकित करके दी हुई तालिका में लिखिए :

१. उनके रीति-रिवाजों का अध्ययन करना पड़ा।

२. माता-पिता का यह रंग देखकर तो वे बूढ़ी काकी को और सताने लगे।

३. उसकी ननद रूठ गई।

४. वे हड़बड़ा उठे।

५. वे पुस्तक पकड़े न रख सके।

६. उन्होंने पुस्तक लौटा दी।

७. समुद्र स्याह और भयावह दीखने लगा।

८. मैं गोवा को पूरी तरह नहीं समझ पाया।

९. काकी घटनास्थल पर आ पहुँची।

१०. अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए।

मुख्य क्रियासहायक क्रिया
१. ——————————
२. ——————————
३. ——————————
४. ——————————
५. ——————————
६. ——————————
७. ——————————
८. ——————————
९. ——————————
१०. ——————————

उत्तर :

मुख्य क्रियासहायक क्रिया
१. करनापडा
२. सतानेलगे
३. रूठगई
४. हड़बड़ाउठे
५. रखसके
६. लौटादी
७. दीखनेलगा
८. समझपाया
९. आपहूँची
१०. चलेगए

२) पाठों में प्रयुक्त सहायक क्रियाओंवाले दस वाक्य ढूँढकर मुख्य और सहायक क्रियाएँ चुनकर लिखिए।

उत्तर :

वाक्यमुख्य क्रियासहायक क्रिया
१. मैं समय पर विद्यालय पहुँच गया हूँ।पहुँचगया हूँ
२. बच्चे कविता का अभ्यास कर रहे हैं।अभ्यास कररहे हैं
३. हम कल संग्रहालय देखने जाएँगे।जाएँगे
४. तुमने अपना कार्य पूरा कर लिया है।पूरा करलिया है
५. वर्षा रुक सकती है।रुकसकती है
६. विद्यार्थी समय पर आ सकते हैं।सकते हैं
७. वह घर से अभी निकला था।निकलाथा
८. शिक्षक ने हमें नया पाठ समझाया है।समझायाहै
९. मजदूर पुल का काम पूरा कर चुके हैं।पूरा करचुके हैं
१०. हम सभी ने कार्यक्रम में भाग लिया था।भाग लियाथा

३) निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित कारक चिह्नों से कीजिए तथा संबंधित कारक और कारक चिह्न तालिका में वाक्य के सामने लिखिए :

अ. क्र.वाक्यकारककारक चिह्न
१.चाची अपने कमरे ——– निकल रही थी।
२.मैं बंडल ——- खोलकर देखने लगा।
३.आवाज ——– मेरा ध्यान बँटाया।
४.हमारे शहर ———- एक कवि हैं।
५.कितने दिनों ———– छुट्टियाँ हैं ?
६.मानू रेल ——— ससुराल चली गई।
७.उन्हें पुस्तक ले आने ———- कहा।
८.पर्यटन ——– बहुत ही आनंद मिला।
९.शरीर को कुछ समय ———- विश्राम मिल जाता है।
१०.बस ——- गोवा घूमने की योजना बनाई।
११.बुद्धिराम स्वभाव ——– सज्जन थे।
१२.रूपा घटना स्थल ——– आ पहुँची।
१३.——— यह बुढ़ियाँ कौन है ?

उत्तर :

अ. क्र.वाक्यकारककारक चिह्न
१.चाची अपने कमरे से निकल रही थी।अपादान कारकसे
२.मैं बंडल को खोलकर देखने लगा।कर्म कारकको
३.आवाज ने मेरा ध्यान बँटाया।कर्ता कारकने
४.हमारे शहर में एक कवि हैं।अधिकरण कारकमें
५.कितने दिनों की छुट्टियाँ हैं ?संबंध कारककी
६.मानू रेल से ससुराल चली गई।करण कारकसे
७.उन्हें पुस्तक ले आने के लिए कहा।संप्रदान कारकके लिए
८.पर्यटन से बहुत ही आनंद मिला।करण कारकसे
९.शरीर को कुछ समय के लिए विश्राम मिल जाता है।संप्रदान कारकके लिए
१०.बस से गोवा घूमने की योजना बनाई।करण कारकसे
११.बुद्धिराम स्वभाव से सज्जन थे।करण कारकसे
१२.रूपा घटना स्थल पर आ पहुँची।अधिकरण कारकपर
१३.अरे ! यह बुढ़ियाँ कौन है ?संबोधक कारकअरे !

४) पाठ में प्रयुक्त विभिन्न कारकों का एक-एक वाक्य छाँटकर उनसे कारक और कारक चिह्न चुनकर लिखिए।

उत्तर :

अ. क्र.वाक्यकारककारक चिह्न
१.बंगाल से लौटकर इसे लिखा था।अपादान कारकसे
२.मैंने, शरदचंद्र को बाद में पढ़ा।कर्म कारकको
३.सूर ने एक जगह लिखा है।कर्ता कारकने
४.नेहरू जी जेल में थे।अधिकरण कारकमें
५.ओह ! तो ये बात है।संबोधनओह !

उपयोजित लेखन

१) निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों :

विख्यात गणितज्ञ सी. वी. रमण ने छात्रावस्था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा लिया था।

रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था। उसे कुछ कठिनाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेश हुए। वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके। रमण को पता चला तो उन्होंने उस समस्या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसिद्ध लॉर्ड रेले के निबंध पढे और उस समस्या का एक नया ही हल खोज निकाला यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लॉर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमण की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अध्यायक जोन्स भी प्रसन्न हूए और उन्होंने रमण से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा। रमण ने लेख लिखकर श्री जोन्स को दिया, पर जोन्स उसे जल्दी लौटा न सके। कारण संभवत: यह था कि वह उसे पूरी तरह आत्मसात न कर सके।

प्रश्न :

१.

२.

३.

४.

५.

उत्तर :

१. रमन का एक साथी किस संबंध मे कुछ प्रयोग कर रहा था ?

२. रमन ने समस्या के संबंध में किसके निबंध पढे ?

३. रमन की प्रतिभा की भूरी-भूरी प्रशंसा किसने की ?

४. रमन को लेख लिखने के लिए किसने कहा था ?

५. रमन ने लेख लेखकर किसको दिया ?

२) ‘अंतरजाल’ से ‘मेक इन इंडिया’ योजना संबंधी जानकारी प्राप्त करके इसे बढ़ावा देने हेतु विज्ञापन तैयार कीजिए :-

मुद्दे :

उत्तर :

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