अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय

अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय

अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय इयत्ता दहावी हिंदी

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

१) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

२) लिखिए :

१. फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ।

उत्तर :

फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है मर जाना।

२. फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार इन्हें हैं _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ।

उत्तर :

फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार डाली, कोंपल और काँटा।

३) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

४) सूची बनाइए :

उत्तर :

५) कारण लिखिए :

१. फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा ———————-

उत्तर :

अपनी गंध न बेचने की सौगंध फूल का संस्कार बन गई है, इसलिए फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा।

२. फूल को मौसम से कुछ लेना नहीं है ——————–

उत्तर :

फूल को मौसम से कुछ लेना-देना नहीं है – उसे अपने अस्तित्व के लिए कुछ भी पाने की इच्छा नहीं है। इसलिए केस भी मौसम हो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

६) ‘दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा’ इस पंक्ति से स्पष्ट होने वाला अर्थ लिखिए।

उत्तर :

फूल को केवल अपने स्वाभिमान से मतलब है। उसे किसी चीज को पाने अथवा खो जाने की चिंता नहीं है। जो मिलना होगा, मिलेगा और जो नुकसान होगा, होगा। उसे उसकी चिंता नहीं है।

७) निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विशेषण कीजिए :

१. रचनाकार का नाम

२. रचना का प्रकार

३. पसंदीदा पंक्ति

४. पसंदीदा होने का कारण

५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा

उत्तर :

१. रचनाकार का नाम : बालकवि बैरागी

२. रचना का प्रकार : गीत

३. पसंदीदा पंक्ति : बिकने से बेहतर है मर जाऊँ अपनी माटी में झर जाऊँ

४. पसंदीदा होने का कारण : कविता की इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने स्वाभिमान के महत्त्व को बहुत सुंदर ढंग से चित्रित किया है।

५. रचना के प्राप्त संदेश/प्रेरणा : इस रचना से संदेश मिलता है कि जीवन में दुख-सुख व हानि-लाभ का चक्र चलता ही रहता है। अंत: थोड़े से लाभ के लिए अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहिए। विषम परिस्थितियों में स्वाभिमान को बरकरार रखना अधिक श्रेष्ठ होता है। अंत: स्वाभिमान को बरकरार रखने के लिए यदि मृत्यु को गले लगाना पड़े तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। हमें सदैव एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए और हमेशा अपने सहायकों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।

Leave a Comment