रहस्य स्वाध्याय
रहस्य स्वाध्याय इयत्ता सातवी हिंदी

स्वयं अध्ययन
हिंदी-मराठी के समानार्थी मुहावरे और कहावतें सुनो और उनका द्विभाषी लघुकोश बनाओ :
जैसे – अधजल गगरी छलकत जाए = उथळ पाण्याला खळखळाट फार.
उत्तर :
1. अधजल गगरी छलकत जाए
उथळ पाण्याला खळखळाट फार
(कम ज्ञान वाला ही अधिक दिखावा करता है)
2. नाव में पैर रखना
दोन बोटांत पाय ठेवणे
(दोनों तरफ फायदा लेने की कोशिश करना)
3. आँख का तारा
डोळ्यांचा तारा
(बहुत प्यारा व्यक्ति)
4. घी के दीये जलना
घरात आनंदाचे दिवे लागणे
(खुशियों का माहौल होना)
5. मलाई खाना
सगळीकडे फायदा उठवणे
(अनुचित लाभ उठाना)
6. नाक कटना
नाक कापणे / मानहानी होणे
(इज्जत जाना)
7. कान पर जूँ न रेंगना
कानावर टिळा हलत नाही
(कुछ भी कहो, असर न होना)
8. दूध का दूध, पानी का पानी करना
काय पांढरे ते पांढरे, काय काळे ते काळे
(सच्चाई स्पष्ट कर देना)
9. चोर की दाढ़ी में तिनका
चोराच्या दाढीत तुरा
(गलत करने वाला ही डरता है)
10. नौ दो ग्यारह होना
पट्कन पसार होणे
(जल्दी भाग जाना)
बताओ तो सही

उत्तर :
(घर में)
- मैंने परिवार में यह समझाया कि बिल्ली रास्ता काट जाए तो काम नहीं रुकता, यह सिर्फ अंधविश्वास है।
- घर में ग्रहण के समय खाना न बनाने या न खाने की गलत मान्यता के बारे में सही वैज्ञानिक कारण बताकर जानकारी दी।
- पूजा-पाठ करते समय अनावश्यक डर या तांत्रिक बातों से बचने की सलाह दी।
(विद्यालय में)
- विद्यालय में ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन’ विषय पर पोस्टर बनाकर लगाया।
- प्रार्थना सभा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचने और तथ्य जाँचने की आदत पर भाषण दिया।
- साथियों को बताया कि नाखून रात में काटने से कोई नुकसान नहीं होता – यह सिर्फ पुरानी मान्यता है।
(परिवेश में)
- पड़ोस में लोगों को यह समझाया कि सर्पदंश होने पर ओझा के पास न जाएँ, तुरंत अस्पताल ले जाएँ।
- किसी बीमार व्यक्ति पर मंत्र-तंत्र करने की बजाय डॉक्टर के पास ले जाने की सलाह दी।
- गांव की गलियों में “अंधविश्वास छोड़ो, विज्ञान अपनाओ” जैसी छोटी जागरूकता रैली में भाग लिया।
विचार मंथन
।। श्रद्धा और विज्ञान, जीवन के दो पक्ष महान।।
उत्तर :
इस पंक्ति का अर्थ है कि हमारे जीवन में श्रद्धा और विज्ञान, दोनों का अपना-अपना महत्व है। श्रद्धा हमें नैतिकता, विश्वास, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान करती है। यह हमें अच्छे कर्म करने, परोपकार और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। दूसरी ओर, विज्ञान हमें तर्क, प्रमाण, खोज और प्रगति की दिशा दिखाता है। विज्ञान के कारण हमारा जीवन सुरक्षित, सुविधाजनक और ज्ञानपूर्ण बनता है।
इसलिए इन दोनों को विरोधी न मानकर संतुलन के रूप में अपनाना चाहिए। जहाँ श्रद्धा हमें आत्मिक शक्ति देती है, वहीं विज्ञान हमें दुनिया को सही तरह से समझने की बुद्धि देता है। जीवन में प्रगति और शांति तभी संभव है, जब श्रद्धा और विज्ञान दोनों का सही उपयोग किया जाए।
वाचन जगत से
टिप्पणी बनाने हेतु समाचार पत्र से बहादुरी के किस्से पढ़ो और संकलन करो।
उत्तर :
समाचार पत्रों में हमें ऐसे कई प्रेरणादायक किस्से मिलते हैं, जिनमें लोगों ने कठिन परिस्थितियों में साहस दिखाया। इनसे हम साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा के बारे में सीखते हैं। नीचे “बहादुरी के किस्सों” का एक संकलन प्रस्तुत है :
१. आग से बच्चों को बचाया – साहसी युवक
समाचार पत्र में पढ़ा कि एक बहादुर युवक ने जलते हुए घर में फँसे दो बच्चों को बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। बिना अपनी जान की परवाह किए उसने समय रहते मदद की। उसकी इस वीरता की सभी ने सराहना की।
२. बाढ़ में फँसी महिला को पुलिसकर्मी ने बचाया
एक पुलिसकर्मी ने बाढ़ के तेज बहाव में फँसी महिला को रस्सी की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। उसका साहस और तत्परता देखकर लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी। उसे जिला प्रशासन ने सम्मानित भी किया।
३. डूबते बच्चे को युवक ने तैरकर बचाया
अखबार में पढ़ा कि एक युवक ने नदी में गिरकर डूब रहे बच्चे को तुरंत तैरकर बाहर निकाला। तेज बहाव के बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और बच्चे की जान बचाई।
४. सेना के जवानों की वीरता
समाचार पत्र में सेना के जवानों की सीमा पर दिखाई बहादुरी की खबर भी छपी थी, जिसमें उन्होंने घुसपैठियों को रोकते हुए देश की रक्षा की। उनकी बहादुरी देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
५. बस हादसे में छात्रों को शिक्षक ने बचाया
एक बस दुर्घटना में चालक बेहोश हो गया, तब एक शिक्षक ने तुरंत बस को नियंत्रित किया और कई बच्चों की जान बचाई। उनकी सूझ-बूझ और बहादुरी की सभी ने प्रशंसा की।
सुनो तो जरा
पाठों में आए हुए मूल्यों को सुनो, तालिका बनाओ और सुनाओ।
उत्तर :
१. निडर होकर बहादुरी से सही मार्ग पर चलना।
२. वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।
३. गलत कार्य करने वाले लोगों के खिलाफ आवाज उठाना।
४. सच्चाई का पता लगाना।
५. अंधश्रद्धा से दूर रहना।
सदैव ध्यान में रखो
बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।
उत्तर :
बड़ों की आज्ञा मानना हम सभी का कर्तव्य होता है, क्योंकि बड़े हमें सही–गलत का ज्ञान कराते हैं। उनका अनुभव हमसे अधिक होता है और वे हमेशा हमारे भले के लिए ही सलाह देते हैं। जब हम बड़ों की बात मानते हैं, तो हम अनुशासन, सम्मान और अच्छे संस्कार सीखते हैं। इससे घर और स्कूल दोनों जगह सुख-शांति बनी रहती है। उनकी आज्ञा का पालन करने से हम अच्छे नागरिक बनते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं।
१. जोड़ियाँ मिलाओ :
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| क) फोटो की दुकान | कपोल कल्पना |
| ख) भूत-वूत | कहकहों की आवाज |
| ग) हवेली | खतरनाक काम |
| नारायणपुर |
उत्तर :
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| क) फोटो की दुकान | नारायणपुर |
| ख) भूत-वूत | कपोल कल्पना |
| ग) हवेली | कहकहों की आवाज |
२. आर्यन और कनिष्का द्वारा देखी हुई हवेली का वर्णन अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर :
आर्यन और कनिष्ठा जब भूतों का पता लगाने हवेली पहुँचे तब उन्होंने देखा कि वहाँ हट्टे-कट्टे मोटे-तगड़े और बड़ी-बड़ी मूँछोंवाले कई लोग पगड़ी बाँधे बैठे थे। उनके साथ कमीज और पैंट पहने हुए भी कुछ लोग थे। उन लोगों की आँखे लाल-लाल थीं। मानो उनकी आँखों से आग बरस रही हो। सबके चेहरे डरावने थे और सब उस समय खाने में मस्त थे। कोई हड्डी चबा रहा था तो कोई रोटियाँ तोड़-तोड़कर खा रहा था। उनके गले में कारतूसों की पेटी लटक रही थी। कुछ लोग लुढके हुए पड़े थे। वहाँ बंदूके और तलवारें भी रखी थी।
३. कनिष्का और आर्यन को ‘वीरता पुरस्कार’ घोषित होने का कारण बताओ।
उत्तर :
कनिष्का और आर्यन ने गाँव के मन से भूत-प्रेत जैसे अंधविश्वास को दूर करने की ठानी और इतनी छोटी-सी उम्र में बड़ी ही बहादुरी से अँधेरी रात में रहने वाले डाकुओं के फोटो निकालकर पुलिस को उनके बारे में बताया और कई सालों से चोरी, डकैती करके उत्पात मचाने वाले उन डाकुओं को पकड़ने में पुलिस की मदद भी की। इन दोनों के इस कार्य से सभी गाँववाले डाकुओं की दृष्टि से मुक्त हो गए थे, इसलिए कनिष्क और आर्यन को उनकी इस बहादुरी के लिए ‘वीरता पुरस्कार’ घोषित किया गया।
४. इस कहानी की किसी घटना को संवाद रूप में प्रस्तुत करो।
उत्तर :
कनिष्का : पिता जी आप कहते हैं कि भूतों के पैर उलटे होते हैं, उनकी छाया नहीं होती और हम उनकी तस्वीर नहीं खींच सकते, लेकिन कल रात हम भूतों के डेरे पर चले गए। कुछ फोटो भी लिए हैं। देखो तो जरा।
पिता जी : (पिता जी परेशान हो उठे। उन्हें ऐसा खतरनाक काम पसंद न था। फोटो देखकर उनकी आँखें खुली रह गईं।) तो क्या भूत इंसान होते हैं ?
कनिष्का : इन्सान जैसे नहीं। इंसान ही भूत हैं। देखिए न ! ये सीधे पैर हैं, इनकी छाया भी है और ये फोटो भी आ गए हैं। असल में भूत-वूत की अफवाह है। कोई भी घर की तरफ न जाएं और इन लोगों का रहस्य न खुले इसलिए उन लोगों के भूत होने की अफवाह फैल गई है। यदि लोगों का आना-जाना रहता है तो ये लोग वहाँ अपनी क्रिया-कलाप कैसे करते ?
भाषा की ओर
चित्र के आधार पर सभी कारकों का प्रयोग करके वाक्य लिखो :

उत्तर :
चित्र के आधार पर कारकों का प्रयोग करते हुए वाक्य
- कर्ता कारक – नदी के किनारे बैठी लड़की मछलियों को दाना खिला रही है।
- कर्म कारक – मछुआरे जाल डालकर मछलियाँ पकड़ रहे हैं।
- करण कारक – नाविक नाव की सहायता से नदी पार कर रहा है।
- संप्रदान कारक – पेड़ पर चढ़ा व्यक्ति नीचे खड़ी महिला को नारियल दे रहा है।
- अधिकरण कारक – लड़का समुद्र तट पर खड़ा होकर आसपास के दृश्य देख रहा है।
- अपादान कारक – कुछ मछलियाँ जाल से बाहर निकलने की कोशिश कर रही हैं।
- संबंध कारक – यह रास्ता गाँव के खेतों का मार्ग है।
- संबोधन कारक – अरे भैया! यह नारियल इधर रख दो।
- अधिकरण कारक – नारियलवाली महिला टोकरी में फल भर रही है।
- कर्ता + कर्म + करण – दूसरा मछुआरा डंडे की मदद से अपनी नाव को आगे बढ़ा रहा है।