चंदा मामा की जय स्वाध्याय
चंदा मामा की जय स्वाध्याय इयत्ता सातवी हिंदी

जरा सोचो……….. चर्चा करो
यदि तुम्हारा घर मंगल ग्रह पर होता तो…………..
उत्तर :

यदि मेरा घर मंगल ग्रह पर होता तो वहाँ का जीवन बिल्कुल अलग होता। मंगल पर हवा बहुत कम है, इसलिए मुझे हमेशा विशेष स्पेस-सूट पहनकर ही बाहर जाना पड़ता। मेरा घर भी एक मजबूत काँच के गुंबद जैसा होता, जिसमें ऑक्सीजन बनी रहती। वहाँ सूरज की रोशनी धरती की तुलना में कम मिलती, इसलिए घर के अंदर सौर ऊर्जा से चलने वाली रोशनी लगी होती।
मंगल पर चारों तरफ लाल मिट्टी और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ दिखाई देते। गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण मैं ऊँची-ऊँची छलांग लगा सकता। स्कूल भी ऑनलाइन होता और दोस्त भी पृथ्वी से वीडियो कॉल पर ही मिलते।
हालाँकि मंगल पर जीवन थोड़ा कठिन होता, पर यह एक रोमांचक अनुभव होता-मानो मैं किसी वैज्ञानिक अभियान का हिस्सा हूँ।
वाचन जगत से
भारतीय मूल की किसी महिला अंतरिक्ष यात्री संबंधी जानकारी पढ़ो तथा विश्व के अंतरिक्ष यात्रियों के नाम बताओ।
उत्तर :
भारतीय मूल की महिला अंतरिक्ष यात्री :
भारत-अमेरिकी वैज्ञानिक कल्पना चावला पहली भारतीय मूल की महिला अंतरिक्ष यात्री थीं। उनका जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था। उन्होंने अंतरिक्ष में दो बार उड़ान भरी—पहली बार 1997 में स्पेस शटल कोलंबिया से और दूसरी बार 2003 में। 2003 के कोलंबिया दुर्घटना में उनका देहांत हो गया।
उनका जीवन साहस, मेहनत और सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देता है।
इसी प्रकार, सुनिता विलियम्स भी भारतीय मूल की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने कई बार अंतरिक्ष यात्रा की और स्पेस-वॉक (अंतरिक्ष में चलना) करने वाली अग्रणी महिलाओं में गिनी जाती हैं।
विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष यात्रियों के नाम :
भारतीय / भारतीय मूल के
- कल्पना चावला
- सुनिता विलियम्स
- राकेश शर्मा (पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री)
विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष यात्री
- यूरी गागरिन – अंतरिक्ष में जाने वाले विश्व के पहले मानव
- नील आर्मस्ट्रॉन्ग – चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति
- बज़ एल्ड्रिन – चंद्रमा पर कदम रखने वाले दूसरे व्यक्ति
- वलेन्टीना तेरेश्कोवा – अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला
- क्रिस हेडफ़ील्ड – प्रसिद्ध कनाडाई अंतरिक्ष यात्री
खोजबीन
इस वर्ष का सूर्यग्रहण कब है ? उस समय पशु-पक्षी के वर्तन-परिवर्तन का निरीक्षण करो और बताओ।
उत्तर :
इस वर्ष का सूर्यग्रहण (2025)
- इस वर्ष का पहला आंशिक सूर्यग्रहण 29 मार्च 2025 को होने वाला है।
- दूसरा सूर्यग्रहण 21 सितम्बर 2025 को होगा, यह भी आंशिक ग्रहण है।
- भारत में ये दोनों ग्रहण सीधे नहीं दिखेंगे / इनकी दृश्यता भारत में नहीं होगी।
निरीक्षण : पशु-पक्षियों का वर्तन-परिवर्तन
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यदि आप भारत में हैं, तो यह घटना आसमान पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी जाएगी।
इसलिए वर्तन-परिवर्तन पर निरीक्षण हेतु सुझाव :
- यदि आप उन स्थानों में नहीं रहते जहाँ ग्रहण दिखाई देगा, तो आप प्रत्यक्ष अनुभव नहीं देख पाएँगे, पर आप ग्रहीय घटना के बारे में vídeos या वैज्ञानिक कवरेज देख सकते हैं, जिससे थोड़ा-बहुत अनुमान लगाया जा सकता है।
- ऐसे में यह सही रहेगा कि आप भविष्य में उपलब्ध निर्देशों (जैसे खगोलशास्त्री, सूचनाएँ) के अनुसार घटना से पहले-बाद पशु-पक्षी व्यवहार पर ध्यान दें। उदाहरण के अधीन एक प्रायोगिक नोट बना सकते हैं कि “यदि आंशिक ग्रहण होता” तो “पशु-पक्षी कैसी प्रतिक्रिया देते” — इसके लिए आप विद्यालय या घर में छोटे-छोटे अवलोकन कर सकते हैं (जैसे साँझ-सुअह में पक्षियों की गतिविधि, पशुओं की नींद/चीड आदि)।
स्वयं अध्ययन

उत्तर :
सौरमंडल की जानकारी
१. ग्रहों का क्रम
सूर्य से दूरी के आधार पर हमारे सौरमंडल के आठ ग्रहों का क्रम इस प्रकार है—
बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।
बुध सूर्य के सबसे निकट है और वरुण सबसे दूर।
२. उपग्रहों (चंद्रमाओं) की संख्या
सौरमंडल में प्रत्येक ग्रह के अपने-अपने उपग्रह हैं।
महत्वपूर्ण उदाहरण—
- पृथ्वी का 1 उपग्रह है – चंद्रमा।
- बृहस्पति के सर्वाधिक 95+ उपग्रह पाए जाते हैं।
- मंगल के 2 उपग्रह – फोबोस तथा डिमोस।
- शनि के लगभग 83 ज्ञात उपग्रह हैं।
३. पृथ्वी का परिक्रमण काल
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और एक पूरा चक्कर लगाने में –
365 दिन 6 घंटे (लगभग 1 वर्ष) का समय लगता है।
इसी परिक्रमा के कारण मौसमों में परिवर्तन होता है।
मेरी कलम से
किसी किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद लिखो और सुनाओ : जैसे – माँ और सब्जीवाली।
उत्तर :
मेरी कलम से – दुकानदार और ग्राहक का संवाद
परिस्थिति : माँ सब्जीवाली से सब्ज़ियाँ खरीद रही है।
संवाद
माँ : नमस्ते बहनजी! आज सब्ज़ियाँ ताज़ी हैं ना?
सब्ज़ीवाली : नमस्ते दीदी! हाँ, बिल्कुल ताज़ी हैं। अभी-अभी खेत से आई हैं।
माँ : अच्छा, तो आधा किलो टमाटर दे दीजिए।
सब्ज़ीवाली : जी दीदी, ये लीजिए-लाल और कच्चे-पक्के मिले-जुले।
माँ: आलू कितने रुपए किलो हैं?
सब्ज़ीवाली : आलू आज 25 रुपए किलो हैं दीदी।
माँ : ठीक है, एक किलो आलू भी तौल दीजिए।
सब्ज़ीवाली : जी। और कुछ चाहिए?
माँ : हाँ, थोड़ी हरी मिर्च और धनिया भी दे दीजिए।
सब्ज़ीवाली : ये लीजिए दीदी, ताज़ा है।
माँ: कुल कितने पैसे हुए?
सब्ज़ीवाली : दीदी, कुल 60 रुपए।
माँ : यह 60 रुपए रखो।
सब्ज़ीवाली : धन्यवाद दीदी, फिर आइएगा!
माँ : जरूर, धन्यवाद!
विचार मंथन
।। बिन माँगे मोती मिले।।
उत्तर :
।। बिन माँगे मोती मिले ।। — अर्थ और विचार
यह कहावत बताती है कि जब हम बिना किसी अपेक्षा के अच्छे कर्म करते हैं, तो हमें अपने-आप ही अच्छा फल मिलता है। कई बार जीवन में ऐसा होता है कि हम किसी चीज़ की माँग नहीं करते, फिर भी हमें उससे भी बेहतर चीज़ मिल जाती है। इसका मतलब है कि सच्चाई, मेहनत, ईमानदारी और सद्भावना अपने आप खुशी और सफलता के मोती बनकर हमारे जीवन में आने लगते हैं।
यह कहावत हमें सिखाती है कि
- हमें लालच नहीं करना चाहिए।
- जो भी मिले, उसे संतोष और आभार के साथ स्वीकार करना चाहिए।
- अच्छे कार्यों का फल हमेशा मिलता है, चाहे हम माँगें या नहीं।
सदैव ध्यान में रखो
निवेदन सदैव विनम्र शब्दों में ही करना चाहिए।
उत्तर :
निवेदन या आग्रह करते समय हमें हमेशा विनम्र और सभ्य भाषा का प्रयोग करना चाहिए। विनम्र शब्द हमारे स्वभाव को सुंदर बनाते हैं और सामने वाले के मन में सम्मान पैदा करते हैं। यदि हम कठोर या आदेश देने वाले शब्दों का उपयोग करें, तो लोग हमारी बात सुनने से भी कतराने लगते हैं। लेकिन जब हम शांत, मीठे और आदरपूर्ण तरीके से निवेदन करते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति हमारी सहायता करने के लिए अधिक तैयार रहता है।
इसलिए हमें हमेशा “कृपया”, “क्या आप मदद करेंगे?”, “धन्यवाद” जैसे शिष्ट शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। विनम्र व्यवहार हमारे रिश्तों में मधुरता लाता है और हमें अच्छे संस्कारों वाला व्यक्ति बनाता है।
१. किसने, किससे और क्यों कहा है ?
क) “हम तुम्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे।
उत्तर :
रातरानी ने सुनील से कहा।
ख) “सबको क्षमा किया जाता है।”
उत्तर :
रातरानी ने सभी बच्चों से कहा।
२. इस एकांकी का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर :
प्रस्तुत एकांकी ‘चंदा मामा की जय’ में लेखक ने शांति प्रियता, बड़ों का आदर, छोटों से प्यार और बुरी आदतों को त्यागने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसमें प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। जिसमें एक लड़की जज की भूमिका में है और बाकी पाँच बच्चे जिनकी शिकायत नींद परी करती है। बाद में चंदा मामा उन बच्चों के गुणों को याद कराते हैं और बच्चों के गुणों को याद कराते हैं और बच्चों से बुरी आदतें छोड़ने की प्रतिज्ञा कराते हैं। अंत में सभी बच्चों को क्षमा किया जाता है।
३. इस एकांकी के पसंदीदा पात्र का वर्णन करो।
उत्तर :
‘चंदा मामा की जय’ एकांकी का सबसे पसंदीदा पात्र चंदामामा है। बच्चे चंदा मामा को अपना मामा मानते हैं। उनके आते ही बी सब खड़े हो जाते हैं और ताली बजाकर अपनी खुशी प्रकट करते हैं। चंदामामा भी बच्चों का पक्ष लेते हुए उनके गुणों का वर्णन करते हैं। वे बच्चों को माफी दिलवाते हैं और बच्चे चंदामामा की जय-जयकार करने लगते हैं।
४. नैतिक मूल्यों की सूची बनाओ और उनपर अमल करो।
उत्तर :
दैनिक जीवन में उपयोगी कुछ नैतिक मूल्य निम्नलिखित हैं :
१) छोटे बच्चों से स्नेह एवं प्यार करना।
२) बड़ों की बात मानना।
३) बड़ों का आदर करना।
४) भोजन करते समय प्रसन्न रहना एवं समय पर खाना।
५) खेलने के समय पर ही खेलना।
६) पढ़ाई के समय मन लगाकर पढ़ना।
७) सभी काम समय पर करना।
८) सभी से मिलकर रहना।
९) घर की वस्तुओं को सँभालकर रखना।
१०) छोटी-बड़ी सभी बुरी आदतों से दूर रहना।