शब्द संपदा स्वाध्याय

शब्द संपदा स्वाध्याय

शब्द संपदा स्वाध्याय इयत्ता सातवी हिंदी

स्वयं अध्ययन

उत्तर :

जरा सोचो …………. चर्चा करो

यदि तुम पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाते तो…..

उत्तर :

यदि मैं पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाता तो मैं बहुत खुश होता। मैं जानवरों से उनकी भावनाएँ, उनकी जरूरतें और उनकी कहानियाँ सुन पाता। मैं पक्षियों से पूछता कि वे इतनी ऊँचाई पर उड़ते हुए क्या देखते हैं, और गाय या कुत्ते जैसे जानवरों से जान पाता कि वे मनुष्यों के व्यवहार को कैसे महसूस करते हैं। अगर मैं उनकी भाषा समझ पाता, तो मैं उनकी मदद कर सकता — भूखे या बीमार जानवरों की परेशानी दूर कर सकता। इस तरह इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और समझ बढ़ जाती। प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता और भी गहरा और सुंदर हो जाता।

विचार मंथन

।। कथनी मीठी खाँड-सी।।

उत्तर :

हमारी वाणी मीठी होनी चाहिए। एकदम गुड़ की के समान। एक बार मुख से शब्द निकल जाए तो वह वापस नहीं आता है। वाणी के कारण दोस्त और दुश्मन बनते हैं। विनम्र व्यक्ति के समाने कठोर ह्रदय वाले व्यक्ति भी झुक जाते हैं।

सदैव ध्यान में रखो

शब्दों का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।

उत्तर :

शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं। वे किसी का दिल जीत सकते हैं और किसी को दुख भी पहुँचा सकते हैं। इसलिए हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हम किससे, कब और कैसे बोल रहे हैं। मधुर, सच्चे और विनम्र शब्द हमारे व्यक्तित्व को सुंदर बनाते हैं और दूसरों के मन में सम्मान पैदा करते हैं। कठोर या कटु शब्द रिश्तों में दूरी लाते हैं। इसीलिए शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते।

खोजबीन

हजारी प्रसार द्विवेदी की ‘कबीर ग्रंथावली’ से पाँच दोहे ढूंढकर सुंदर अक्षरों में लिखो।

उत्तर :

i) दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय।।१।।

ii)तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय।

कबहुँ उड़ आँखों पड़े, पौर घनेरी होय।।२।।

iii) गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।

बलिहारी गुरु आपनो, गोबिंद दियो बताय।।३।।

iv) जाति न पूछो साधुकी, पूछि लीजिए ज्ञान।

मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान।।४।।

v) माया मरी न मन मरा, मर-मर गया शरीर।

आशा तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर।।५।।

अध्ययन कौशल

जानकारी प्राप्त करने के विविध संदर्भ स्त्रोतों के बारे में पढ़ों और उनका संकलन करो।

उत्तर :

जानकारी प्राप्त करने के कई प्रकार के संदर्भ स्त्रोत होते हैं, जिनकी मदद से हम अपने अध्ययन को और बेहतर बना सकते हैं। इनमें पुस्तकें, शब्दकोश, विश्वकोश, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, इंटरनेट, और शिक्षक शामिल हैं।
स्कूल की पुस्तकालय (लाइब्रेरी) से हमें विषयवार पुस्तकें मिलती हैं। शब्दकोश से शब्दों का अर्थ और सही प्रयोग सीखा जा सकता है। विश्वकोश से विभिन्न विषयों की गहराई से जानकारी मिलती है।
इसके अलावा इंटरनेट और यू-ट्यूब आधुनिक समय के तेज़ और उपयोगी साधन हैं, जिनसे दृश्य और श्रव्य रूप में ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
इन सबका सही उपयोग करने से अध्ययन रोचक, सरल और प्रभावी बनता है।

१. तीन-चार वाक्यों में उत्तर लिखो :

क) ‘भाषा’ का क्या अर्थ है, इसके कारण क्या हुआ है ?

उत्तर :

भाषा का अर्थ है सार्थक शब्दों का व्यवस्थित क्रमबद्ध संयोजन दुनिया की सभी ज्ञानभाषाओं का विकास भाषा के कारण ही हुआ है। भाषा के कारण ही मानव संस्कृति का विकास संभव हो सका है।

ख) भाषा समृद्ध कैसे होती है ?

उत्तर :

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से भाषा समृद्ध होती है।

२. शब्दों के बारे में लेखक के विचार बताओ।

उत्तर :

शब्दों का संसार बड़ा विचित्र होता है। शब्दों में बड़ी ताकत होती है। शब्द मनुष्य को ज्ञान से जोड़ते हैं। मनुष्यों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। मनुष्य को हँसाते हैं, व्यथित भी करते हैं।

३. भाषा समृद्धि के कारण लिखो।

उत्तर :

i) एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से भाषा समृद्ध होती है।

ii) कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं।

४. वाचन-संस्कृति बढ़ाने से होने वाले लाभ लिखो।

उत्तर :

i) वाचन-संस्कृति हमें किसी भी भाषा को आसानी से बोलने में सहायता करता है।

ii) इसके बढ़ने से हमारे मन में किसी भी भाषा के प्रति आत्मविश्वास आता है।

iii) इसके द्वारा भाषा की शुद्धता का भी ध्यान रखा जाता है।

iv) वाचन बढ़ने से हम भाषा का प्रयोग शुद्धता से करना सीखते और सिखाते है।

भाषा की ओर

नीचे दिए गए वाक्य पढ़ो और उपयुक्त शब्द उचित जगह पर लिखो :

उत्तर :

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