लकड़हारा और वन स्वाध्याय
लकड़हारा और वन स्वाध्याय इयत्ता आठवी हिंदी

मौलिक सृजन
‘प्रकृति हमारी गुरु’ विषय पर अपने विचार लिखो।
उत्तर :
प्रकृति वास्तव में हमारी सबसे बड़ी गुरु (शिक्षक) है। वह हमें बिना बोले बहुत कुछ सिखाती है।
सूरज हमें रोज़ समय पर उगना और अपना कर्तव्य निभाना सिखाता है।
नदी हमें निरंतर बहते रहने और दूसरों की प्यास बुझाने की प्रेरणा देती है।
पेड़ हमें निस्वार्थ भाव से देने की शिक्षा देते हैं – वे छाया, फल, फूल और ऑक्सीजन सब बिना किसी स्वार्थ के देते हैं।
पक्षी हमें स्वतंत्रता और मेहनत का महत्व बताते हैं।
प्रकृति हमें सिखाती है कि जीवन में संतुलन और धैर्य कितना आवश्यक है।
यदि हम प्रकृति का आदर करें और उसका संतुलन बनाए रखें, तो हमारा जीवन भी सुंदर और शांतिपूर्ण रहेगा।
लेकिन जब हम प्रकृति का अपमान करते हैं – पेड़ों को काटते हैं, जल और वायु को प्रदूषित करते हैं – तब प्रकृति हमें अपने क्रोध के रूप में चेतावनी देती है।
इसलिए हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए, जल बचाना चाहिए और पर्यावरण को स्वच्छ रखना चाहिए।
प्रकृति से हम प्रेम, धैर्य, सेवा और अनुशासन जैसे गुण सीख सकते हैं।
संभाषणीय
किसी भारतीय लोककथा की विशेषताओं के बारे में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करो।
उत्तर :
रवि : अरे सुमन! क्या तुमने कभी भारतीय लोककथाएँ सुनी हैं?
सुमन : हाँ, बिल्कुल! मेरी दादी मुझे अक्सर पंचतंत्र, हितोपदेश और अकबर-बीरबल की कहानियाँ सुनाया करती हैं। ये कहानियाँ बहुत रोचक और शिक्षाप्रद होती हैं।
रवि : सही कहा! भारतीय लोककथाएँ हमारी संस्कृति और परंपरा का दर्पण हैं। इनमें हमारे पूर्वजों का ज्ञान, अनुभव और जीवन मूल्य झलकते हैं।
सुमन : इन कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सरल भाषा में होती हैं, जिससे बच्चे और बड़े सभी उन्हें आसानी से समझ सकते हैं।
रवि : और उनमें हमेशा कोई नैतिक शिक्षा होती है – जैसे “सत्य की जीत होती है,” “ईमानदारी सबसे बड़ी नीति है,” या “लालच बुरी बला है।”
सुमन : हाँ, और इन कहानियों में जानवरों, पक्षियों या सामान्य लोगों के माध्यम से बड़े गहरे संदेश दिए जाते हैं।
जैसे – “कौआ और घड़ा”, “सिंह और चूहा”, “कछुआ और खरगोश” – इन सब में जीवन के महत्त्वपूर्ण सबक छिपे हैं।
रवि : बिल्कुल! भारतीय लोककथाएँ न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि हमें नैतिकता, समझदारी, और जीवन के सही मार्ग पर चलना भी सिखाती हैं।
पठनीय
विभिन्न विधाओं से प्राप्त सूचनाओं, सर्वेक्षणों, टिप्पणियों को पढ़कर उनका संकलन करो।
उत्तर :
हमारे विद्यालय में हाल ही में एक परियोजना कार्य के अंतर्गत विद्यार्थियों ने “स्वच्छ भारत अभियान” विषय पर सर्वेक्षण और जानकारी एकत्र की।
इस कार्य में विद्यार्थियों ने समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, इंटरनेट, शिक्षकों, और गाँव या शहर के लोगों से चर्चा के माध्यम से अनेक सूचनाएँ प्राप्त कीं।
संकलित जानकारी इस प्रकार है:
- समाचार पत्रों से प्राप्त जानकारी:
- स्वच्छ भारत मिशन का आरंभ 2 अक्टूबर 2014 को हुआ।
- इसका उद्देश्य गाँव और शहरों में सफाई व्यवस्था को सुधारना और खुले में शौच से मुक्ति पाना है।
- सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त जानकारी:
- अधिकांश लोगों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए सरकार के साथ जनता का सहयोग आवश्यक है।
- 80% विद्यार्थियों ने कहा कि वे अपने घर और विद्यालय में सफाई पर ध्यान देते हैं।
- इंटरनेट व पुस्तक से प्राप्त जानकारी:
- भारत के कई राज्यों में अब “कचरा पृथक्करण” यानी गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था की जा रही है।
- स्वच्छता से न केवल स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
- टिप्पणियाँ:
- विद्यार्थियों ने लिखा कि “स्वच्छता एक आदत है, जो हमें रोज़ अपनानी चाहिए।”
- कुछ शिक्षकों ने सुझाव दिया कि विद्यालय में हर सप्ताह “स्वच्छता दिवस” मनाया जाए।
लेखनीय
किसी लिखित सामग्री के उद्देश्य और उसके दृष्टिकोण के मुद्दों को समझकर उसे प्रभावपूर्ण शब्दों में लिखो।
उत्तर :
किसी भी लिखित सामग्री का अपना एक उद्देश्य (Purpose) और दृष्टिकोण (Point of View) होता है।
किसी लेख, कविता, कहानी या निबंध को पढ़ते समय हमें यह समझना चाहिए कि लेखक क्या संदेश देना चाहता है और किस भावना या दृष्टिकोण से उसने यह लिखा है।
उदाहरण के रूप में –
अगर हम “पर्यावरण संरक्षण” विषय पर लिखित सामग्री पढ़ते हैं, तो उसका उद्देश्य लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाना होता है।
लेखक का दृष्टिकोण यह होता है कि मनुष्य को अपने विकास के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए।
हम इस विचार को अपने शब्दों में इस प्रकार प्रभावपूर्ण ढंग से लिख सकते हैं
“आज मनुष्य तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है, परंतु उसके कारण प्रकृति असंतुलित हो रही है।
हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर धरती, जल और वायु की रक्षा करनी चाहिए।
यही सच्चा विकास और मानवता का परिचायक है।”
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
१) संजाल पूर्ण करो :

उत्तर :

२) संक्षेप में उत्तर लिखो :
१. पेड़ द्वारा दिया गया संदेश –
उत्तर :
कभी हरा-भरा पेड़ मत काटो। उन्हें अपने बच्चों के समान पालो, ताकि चारों ओर हरियाली छाई रहे।
२. भगवान की शर्त –
उत्तर :
लकड़हारा हरे-भरे पेड़ों को नहीं काटेगा, न ही लालच में पड़कर जरूरत से अधिक सूखी लकड़ी काटेगा।
३. पेड़ों के उपयोग –
उत्तर :
पेड़ साँस लेने के लिए हवा शुद्ध करते हैं। हमें भोजन और पानी देते है।
४. पेड़ों की कटाई के दुष्परिणाम –
उत्तर :
वन्य पशुओं का घर उजड़ जाएगा। अच्छी वर्षा नहीं होगी।
३) कृति पूर्ण करो :

उत्तर :

भाषा बिंदु
१) निम्न वृत्त में दिए संज्ञा तथा विशेषण शब्दों को छाँटकर तालिका में उचित स्थानों पर उनके भेद सहित लिखो :

उत्तर :
| संज्ञा | भेद | विशेषण | भेद |
|---|---|---|---|
| १. नदी | जातिवादक | १. वह | सार्वनामिक |
| २. पहाड़ी | जातिवादक | २. चार किलो | परिमाणवाचक |
| ३. सीता | व्यक्तिवाचक | ३. दस | संख्यावाचक |
| ४. लकड़हारा | जातिवादक | ४. कोई | सार्वनामिक |
| ५. पानी | द्रव्यवाचक | ५. धनी | गुणवाचक |
| ६. गरीबी | भाववाचक | ||
| ७. ईमानदारी | भाववाचक | ||
| ८. गंगा | व्यक्तिवाचक | ||
| ९. पालक | जातिवादक | ||
| १०. चाँदी | द्रव्यवाचक | ||
| ११. सभा | समूहवाचक |
२) पाठ में प्रयुक्त कारक विभक्तियाँ ढूँढकर उनका वाक्यों में प्रयोग करो।
१. मैंने – कर्ता
वाक्य : मैंने एक लंबी कविता लिखी।
२. तुम्हें – कर्म
वाक्य : पिता जी तुम्हें बुला रहें हैं, मनु।
३. ईमानदारी से – करण
वाक्य : दीदी ने रुई से सुंदर गुड़िया बनाई।
४. मेरे लिए – संप्रदान
वाक्य : माँ ने भिखारी के लिए खाना दिया।
५. पानी में – अधिकरण
वाक्य : मंदिर में आरती हो रही है।
६. आज की रोटी – संबंध
वाक्य : स्नेहा उत्कर्ष की बहन है।
७. हे भगवान – संबोधन
वाक्य : हे राम ! ऐसी दुर्दशा।
उपयोजित लेखन
किसी मराठी निमंत्रण पत्रिका का रोमन (अंग्रेजी) में लिप्यंतरण करो।
२२ मार्च २०२५
तीर्थस्वरूप दिनूकाकांस,
सा. न. वि. वि.
येत्या नऊ मार्चचास आजोबांना साठ वर्षे पूर्ण होऊन एकसष्टावे वर्ष सुरू होणार आहे. तेव्हा आम्ही त्यांच्या सर्व नातवंडांनी त्यांचा वाढदिवस साजरा करण्याचे ठरवले आहे. आजोबांना ही आधी कळले, तर ते आम्हांला दम भरतील आणि समारंभ होऊ देणार नाहीत. म्हणून आम्ही सर्वानी हा बेत गुपचूप आखला आहे. यात आम्ही दोन भावंडे तुमचे रवी, रश्मी आणि सुधाआत्याचे किरण, किशोर सामील आहोत. तसेच आई व आजीला आम्ही हा बेत सांगितला आहे. नाहीतर स्वयंपाकघर कोण सांभाळणार !
तेव्हा काका तुम्ही सर्वजण ८ मार्चला साबड काढून नक्की या. आपण सगळेजण आजोबांना ‘सरप्राईझ’ देऊ या.
सुधाआत्याकडचे सर्वजण येणार आहेत.
वाट पाहत आहोत.
तुमचा पुतण्या,
राहूल माने
ई. मेल rahul@.com
उत्तर :
22 march 2025
Tirthswaroop Dinukakans,
Sa. Na. Vi. Vi.
Yetya nau Marchas Aajobanana saath varshe purn houn ekasahtave varsh suroo honar aahe. Tehva aahmi tyanchya sarva natvandanni tyancha vaadhdiwas sajra jarnyache tharvale aahe. Aajobanna he aadhi kalale, tar te aamhanla dam bharteel aani samarambh hou denar nahit. Mhanoon aamhi sarvani ha bet gupchoop aakhla ahe. Yat amhi don bhavande, tumche Ravi, Rashmi aani Sudha atyache Kiran, Kishor saamil ahot. Tasech Aai va ajila amhi ha bet sangitla aahe. Nahitar swayampak ghat kon sambhalnar !
Tehwa kaka tuhmi sarvajan 8 marchala savad kadhun nakki ya. Aapan saglejan Aajobana ‘sarprise’ deu ya. Sudha Aatyakadche sarvajan yenar aahet.
Vaat pahat aahot.
Tumcha Putnya,
Rahul Mane,
Email ID rahul@.com
स्वयं अध्ययन
किसानों के सामने आने वाली समस्याओं की जानकारी प्राप्त करके उन समस्याओं को दूर करने हेतु चर्चा करो।
उत्तर :
भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे किसान देश की रीढ़ माने जाते हैं। वे दिन-रात मेहनत करके हमारे लिए अन्न उपजाते हैं, परंतु उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किसानों के सामने असंतुलित वर्षा, सिंचाई की कमी, महंगे बीज और खाद, आर्थिक तंगी, तथा फसलों के उचित दाम न मिलना जैसी कठिनाइयाँ होती हैं। कई बार प्राकृतिक आपदाएँ जैसे सूखा या बाढ़ भी उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। शिक्षा और आधुनिक तकनीक की जानकारी के अभाव में वे नई खेती पद्धतियाँ नहीं अपना पाते, जिससे उत्पादन भी कम होता है।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना चाहिए। किसानों को आधुनिक खेती के तरीके सिखाए जाएँ, सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ाई जाएँ, और फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वर्षा जल संचयन, सहकारी समितियों का गठन और कृषि ऋण में सहायता जैसे कदम किसानों की स्थिति सुधार सकते हैं। यदि हम सब मिलकर किसानों की समस्याओं को हल करने का प्रयास करें, तो उनका जीवन सुखमय बनेगा और देश की प्रगति भी सुनिश्चित होगी।