दो लघुकथाएँ स्वाध्याय
दो लघुकथाएँ स्वाध्याय इयत्ता सातवी हिंदी

सुनो तो जरा
‘चतुराई’ संबंधी कोई सुनी हुई कहानी सुनाओ।
उत्तर :
एक बार की बात है, एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। उसके पास एक बूढ़ा बैल था, जिससे वह खेत जोतता था। एक दिन उस बैल को एक चालाक चोर चुराने की योजना बनाने लगा। किसान को इसकी भनक लग गई। उसने अपनी चतुराई से चोर को सबक सिखाने का निश्चय किया।
किसान ने बैल के गले में एक बड़ा सा घंटा बाँध दिया और गाँव में यह बात फैला दी कि यह घंटा जादुई है, जो भी इसे छुएगा, वह पत्थर बन जाएगा। रात में जब चोर बैल चुराने आया और उसने बैल को पकड़ने की कोशिश की, तभी घंटा बज उठा। गाँव के लोग जाग गए और चोर को पकड़ लिया गया।
इस तरह किसान ने अपनी चतुराई से बिना किसी झगड़े या हिंसा के अपने बैल को बचा लिया।
सीख: संकट के समय में घबराने के बजाय बुद्धि और चतुराई से काम लेना चाहिए।
खोजबीन

उत्तर :
| राज्य का नाम | शैली का नाम |
|---|---|
| महाराष्ट्र | वारली |
| बिहार | मधुबनी |
| राज्यस्थान | शैला |
| मध्य | कला |
| तमिल | चित्रकारी |
| उड़ीसा | पतचित्र |
| आंध्र | कलमकारी |
विचार मंथन
।। सत्यमेव जयते।।
उत्तर :
‘सत्यमेव जयते।’ सूक्ति का अर्थ है – सत्य की सदैव जीत होती है। सांकृत भाषा की यह सूक्ति महाभारत से ली गई है। प्राचीन काल से यह बात प्रचलित है। झूठ कितना भी छुपाया जाए; वह एक दिन सामने आ ही जाता है। महाभारत काल में ऐसी अनेक कहानियाँ हैं; जिससे यह साबित होता है कि अंत में जीत सत्य की ही होती है। आज कल सिनेमा और धारावाहिकों में भी यही दिखावा जाता है कि जीत सत्य की ही होती है। इसी से प्रभावित होकर आजादी के बाद हमारे देश के ध्येय वाक्य के रूप में “सत्यमेव जयते” की ही स्वीकार किया गया। अत: यह शाश्वत सत्य है कि जीत सदैव सत्य की ही होती है।
अध्ययन कौशल

उत्तर :
आदरणीय अध्यक्ष महोदय, कुशल निर्णायक मंडल एवं प्रिय श्रोतागण ! आज मैं आपके सामने ‘त्याहारों के महत्त्व’ विषय पर अपने विचार प्रकट करने जा रहा हूँ।
त्याहारों का नाम सुनते ही मन खुशी से झुम उठता है। आँखों के सामने मनमोहक, आकर्षक और रंग-बिरंगे नजारे तैरने लगते है। कभी गणेशोत्सव, कभी नवरात्रि, कभी दीपावली के पटाखें, कभी होली के रंग में सराबोर गाँव-नगर तो कहीं नए-नए परिधानों में सजे लोग।
अध्यक्ष महोदय, इन सब झकियों में नजारे भले ही अलग-अलग दिखते है, किंतु सभी का उद्देश्य एक है आपसी भाईचारा। भारत ‘त्याहारों का देश’ कहा जाता है। कहा भी गया है। –
“अगर चाहते हैं उमंग तो, आपस का व्यवहार न भूलें। कैसी भी हो मायूसी पर, हम अपने त्योहार न भूलें।”
अंत में मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि यदि ये त्योहार न आएँ तो हम अपने घर-परिवार और रिश्तेदारों से पूर्ण रूप से मिल न पाएँगे। इसलिए हमें अपने त्याहारों को धूमधाम से मनाना चाहिए।
बताओ तो सही
अकबार के नौ रत्नों के बारे में बताओ।
उत्तर :
अकबर के दरबार में नौ गुणवान दरबारी थे; जिन्हें कालांतर में ‘अकबर के नवरत्न’ के नाम से जाना जाता है।
१) अबुल फजल
२) मुल्ला दो प्याजा
३) तानसेन
४) बीरबल
५) राजा टोडरमल
६) फैजी
७) राजा मानसिंह
८) फकीर अजीओद्दीन
९) रहीम
वाचन जगत से
पसंदीदा चित्रकथा पढ़ो और इसी प्रकार अन्य चित्रकथा बनाकर सुनाओ।
उत्तर :
मेरी बनाई नई चित्रकथा – “सच्चा दोस्त”
एक गाँव में मोहन और सोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। एक दिन वे जंगल से गुजर रहे थे। अचानक रास्ते में एक भालू आ गया। मोहन पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन सोहन पेड़ पर नहीं चढ़ सका। उसने तुरंत अपनी सांस रोक ली और ज़मीन पर लेट गया, जैसे वह मर गया हो। भालू ने उसे सूंघा और चला गया। मोहन नीचे उतर आया और बोला, “भालू ने क्या कहा?” सोहन बोला, “उसने कहा — कभी ऐसे दोस्त पर भरोसा मत करना जो मुसीबत में साथ न दे।” सीख: सच्चा दोस्त वही होता है जो संकट में साथ दे।

१. सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखो :
क) जब बादशाह ने बीरबल की दूसरी शर्त सुनी तो वे बीरबल ——–।
१. से खुश हो गए।
२. का मुहँ देखने लगे।
३. की होशियारी जान चुके।
उत्तर :
जब बादशाह ने बीरबल की दूसरी शर्त सुनी तो वे बीरबल का मुहँ देखने लगे।
ख) क्रोधित होकर उस चित्रकार ने सेठ से ——–।
१. पैसे माँगे।
२. पूरे पैसे माँगे।
३. सभी चित्रों के पैसे माँगे।
उत्तर :
क्रोधित होकर उस चित्रकार ने सेठ से सभी चित्रों के पैसे माँगे।
२. चित्रकार की परेशानी का कारण बताओ।
उत्तर :
चित्रकार की परेशानी का कारण था सेठ। वह काम कराने के बाद भी लोगों को पैसा नहीं देता था। एक बार चित्रकार ने उस सेठ का चित्र बनाया। जब उसने सेठ से पैसे माँगे, तो सेठ ने कहा की चित्र ठीक नहीं बना है, दोबारा बनाकर लाओ। चित्रकार ने सेठ के कई चित्र बनाए, लेकिन वह हर बर कह देता की चित्र ठीक नहीं है।
३. ‘हरे घोड़े’ के संदर्भ में बीरबल की चतुराई का वर्णन करो।
उत्तर :
बादशाह अकबर ने बीरबल से एक हरे घोड़े का प्रबध करने को कहा। बीरबल एक सप्ताह तक इधर-उधर घूमते रहे। फिर आकर बादशाह से बोले कि मैंने आपके लिए हरा घोडा ढूँढ़ लिया है। पर घोड़े के मालिक की यह शर्त है कि जब घोड़े का रंग दूसरे घोड़े से अलग है तो घोड़े को देखने का दिन भी अलग होना चाहिए। यानि सप्ताह सात दिनों के अलावा आप घोड़े को किसी भी दिन देख सकते हैं। इस प्रकार बादशाह को नाराज की बिना बीरबल ने अपना काम कर दिया।
४. घोड़े के मालिक की शर्ते लिखो।
उत्तर :
घोड़े के मालिक की दो शर्ते थीं। पहिली शर्त यह या थी कि बादशाह को घोड़ा स्वयं ही जाना पड़ेगा। दूसरी शर्त यह थी कि जब घोड़े का रंग दूसरे घोड़ों से अलग है, तो उसे देखने का दिन भी अलग ही होना चाहिए। यानि सप्ताह के सात दिनों के अलावा किसी भी दिन बादशाह थोड़ा देख सकते थे।