तूफानों से क्या डरना स्वाध्याय
तूफानों से क्या डरना स्वाध्याय इयत्ता सहावी हिंदी

स्वयं अध्ययन
चित्र देखकर हाव-भाव की नकल करो।

उत्तर :
ऊपर दिए गए चित्रों में विभिन्न प्रकार के चेहरे के हाव-भाव (Expressions) दिखाए गए हैं। प्रत्येक चेहरा एक अलग भावना प्रकट करता है। इन भावों की नकल करते समय बच्चे दर्पण (Mirror) के सामने अभ्यास कर सकते हैं –
- पहला चेहरा – खुश / प्रसन्न
- हाव-भाव: बड़ी मुस्कान, चमकती आँखें
- नकल: चेहरे पर मुस्कान लाना और आँखों को उत्साहित दिखाना।
- दूसरा चेहरा – गुस्सा
- हाव-भाव: भौंहें तनी हुई, दाँत कसे हुए
- नकल: भौंहें सिकोड़कर जबड़े को कसकर दिखाना।
- तीसरा चेहरा – नाराज़ / रूठा हुआ
- हाव-भाव: भौंहें चढ़ी हुई, होंठ सिकुड़े हुए
- नकल: हल्का सा मुँह टेढ़ा कर नाराज़गी दिखाना।
- चौथा चेहरा – सामान्य / शांत
- हाव-भाव: साधारण भाव, बिना किसी प्रतिक्रिया के
- नकल: चेहरा साधारण और स्थिर रखना।
- पाँचवाँ चेहरा – दुखी / रोता हुआ
- हाव-भाव: आँखों में आँसू, नीचे की ओर होंठ
- नकल: होंठों को नीचे की ओर मोड़कर रोने जैसा भाव बनाना।
- छठा चेहरा – हँसता हुआ
- हाव-भाव: खुलकर मुस्कुराना
- नकल: खुशी से मुस्कुराकर चेहरा चमकाना।
- सातवाँ चेहरा – संतुष्ट / शांत मुस्कान
- हाव-भाव: हल्की मुस्कान, नरम आँखें
- नकल: हल्की, सौम्य मुस्कान के साथ शांत भाव बनाना।
खोजबीन
भारतीय स्थानीय समय के अनुसार देश-विदेश के समय की तालिका बनाओ।
उत्तर :
नीचे दी गई तालिका भारतीय मानक समय (IST) UTC +5:30 के आधार पर तैयार की गई है। इसमें कुछ प्रमुख देशों के समय में अंतर दिखाया गया है।
भारतीय समय (IST) : UTC +5:30
| क्रमांक | देश / शहर | समय क्षेत्र (UTC) | भारतीय समय के अनुसार समय में अंतर | उदाहरण : भारत में दोपहर 12:00 हो तो वहाँ का समय |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जापान (टोक्यो) | UTC +9:00 | भारत से 3 घंटे 30 मिनट आगे | 3:30 अपराह्न |
| 2 | चीन (बीजिंग) | UTC +8:00 | भारत से 2 घंटे 30 मिनट आगे | 2:30 अपराह्न |
| 3 | सऊदी अरब (रियाद) | UTC +3:00 | भारत से 2 घंटे 30 मिनट पीछे | 9:30 पूर्वाह्न |
| 4 | यूएई (दुबई) | UTC +4:00 | भारत से 1 घंटे 30 मिनट पीछे | 10:30 पूर्वाह्न |
| 5 | नेपाल (काठमांडू) | UTC +5:45 | भारत से 15 मिनट आगे | 12:15 अपराह्न |
| 6 | अमेरिका (न्यूयॉर्क) | UTC -5:00 | भारत से 10 घंटे 30 मिनट पीछे | 1:30 पूर्वाह्न |
| 7 | इंग्लैंड (लंदन) | UTC +0:00 | भारत से 5 घंटे 30 मिनट पीछे | 6:30 पूर्वाह्न |
| 8 | ऑस्ट्रेलिया (सिडनी) | UTC +10:00 | भारत से 4 घंटे 30 मिनट आगे | 4:30 अपराह्न |
| 9 | रूस (मास्को) | UTC +3:00 | भारत से 2 घंटे 30 मिनट पीछे | 9:30 पूर्वाह्न |
| 10 | श्रीलंका (कोलंबो) | UTC +5:30 | भारत के बराबर समय | 12:00 अपराह |
भाषा की ओर
कविता में आए किन्ही पाँच शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखो।
उत्तर :
i) हार X जीत
ii) अंधेरा X उजाला
iii) नफरत X प्यार
iv) धुप X छाव
v) दिन X रात
सुनो तो जरा
रेडियो पर एकाग्रता से भजन सुनो और दोहराओ।
उत्तर :
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय।
जो सुख में सुमिरन करें, तो दुख काहे को होय।।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करें, आपहुं शीतल होय।।
बताओ तो सही
‘साक्षरता अभियान’ के बारे में जानकारी बताओ।
उत्तर :
साक्षरता अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों को पढ़ना–लिखना सिखाना और उन्हें शिक्षित बनाना है। इस अभियान की शुरुआत उन लोगों के लिए की गई, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाए या शिक्षा से वंचित रह गए। इसके माध्यम से लोगों को बुनियादी शिक्षा, सरल भाषा में पढ़ना–लिखना, गणित की जानकारी और जीवन कौशल दिए जाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ :
- सभी के लिए शिक्षा – बच्चे, महिला, वृद्ध, मजदूर, किसान आदि सभी को पढ़ना–लिखना सिखाने पर ध्यान।
- प्रौढ़ शिक्षा – 15 वर्ष से ऊपर के निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाना।
- जनभागीदारी – समाज के शिक्षक, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्यक्रम चलाते हैं।
- फ्री शिक्षा – इस अभियान के अंतर्गत दी जाने वाली सभी सुविधाएँ निःशुल्क होती हैं।
- जीवन को बेहतर बनाना – शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, मतदान जैसी बातों की भी जानकारी दी जाती है।
- राष्ट्रीय साक्षरता मिशन – 1988 में शुरू हुआ यह मिशन पूरे देश में साक्षरता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करता है।
इस अभियान का महत्व :
- लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
- रोजगार और जीवन स्तर में सुधार होता है।
- देश का सामाजिक और आर्थिक विकास तेज़ होता है।
- निरक्षरता कम होने से समाज में जागरूकता और समानता बढ़ती है।
संक्षिप्त उत्तर (वर्कबुक शैली में):
‘साक्षरता अभियान’ एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के निरक्षर लोगों को पढ़ना–लिखना सिखाना और उन्हें जागरूक नागरिक बनाना है। इसके तहत प्रौढ़ शिक्षा, निःशुल्क शिक्षण, जनसहभागिता और सामाजिक विकास पर जोर दिया जाता है। यह अभियान समाज को शिक्षित, सक्षम और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वाचन जगत से
मीरा का पद पढ़ो और सरल अर्थ बताओ।
उत्तर :
मीराबाई का पद :
“पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो”
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी को मिलती नाही।
भाग लगे जिन पाया, सतगुरु सों मन लाई॥
खर्च न कोई चोर न लेवे, दिन-दिन बढ़त सवायो।
सतगुरु दाता दिल का बिछूड़ा, मिले हियाँ सुख पायो॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरि गुण गाएँ गुन गाओ।
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो॥
सरल अर्थ :
इस पद में मीरा कहती हैं कि उन्हें भगवान का अनमोल “राम-रत्न” धन मिल गया है। यह धन सोने–चाँदी से भी अधिक कीमती है, क्योंकि यह भगवान के प्रेम, भक्ति और नाम का धन है।
वे कहती हैं कि
- यह धन कभी खत्म नहीं होता।
- न कोई इसे छीन सकता है और न चुरा सकता है।
- इस धन को पाकर उनका जीवन सुख, शांति और आनंद से भर गया है।
- मीरा यह भी बताती हैं कि उन्होंने मन लगाकर भक्ति की, तभी उन्हें यह अनमोल धन मिला।
अंत में मीरा कहती हैं कि
भगवान का नाम और प्रेम जीवन को पवित्र, सुंदर और खुशियों से भर देता है।
मेरी कलम से
महीने में एक बार कविता का श्रुतलेखन करो।
उत्तर :
जिनके साथ बचपन में खेला
जिनसे सुनी लोरियां मैंने,
जिनका साया छांव थी मेरी
जिनके लिए थी एक नन्ही परी मैं,
जिनकी आंखों में था इंतजार मेरे आने का
जिनके के लिए था मेरे मन में प्यार,
जो थे मेरा जीवन और जो है आज भी मेरा तन-मन
जिनसे महकती थी जीवन बगिया मेरी,
और जिनसे हुआ गुल-ए-बहार मेरा चमन
अब एक ठंडी-सी मीठी सी याद है मन में,
जो भर देती है अंखियों में अंसुवन जल क्यूं वो सहारे छीन गए ?
क्यों वो हमसे दूर हो गए जिनसे पाया था ये जीवन,
जिनसे पाया था ये जीवन माता-पिता के चरणों में कोटि-कोटि वंदन,
कोटि-कोटि वंदन।
जरा सोचो……… चर्चा करो
यदि समय का चक्र रुक जाए तो……….
उत्तर :
यदि समय का चक्र रुक जाए तो हमारी पूरी जिंदगी थम जाएगी। न दिन होगा, न रात होगी, न मौसम बदलेंगे। लोग न अपने काम पर जा पाएँगे और न बच्चे स्कूल जा सकेंगे। पेड़-पौधों की बढ़त रुक जाएगी, न नया फूल खिलेगा, न कोई फल पकेगा। हर काम अधूरा रह जाएगा और दुनिया जैसे-की-तैसे ठहर जाएगी।
समय रुकने से जीवन में गतिशीलता समाप्त हो जाएगी, प्रगति रुक जाएगी और मनुष्यों के बीच अनेक समस्याएँ उत्पन्न होंगी। इसलिए समय का आगे बढ़ते रहना ही जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस कविता का सार लिखो।
उत्तर :
इस कविता का मुख्य सार यह है कि जीवन में मुसीबतें तो आती रहती हैं। उन मुसीबतों का सामना हमें निडर होकर करना चाहिए। हमारे भीतर के घमंड रूपी अहंकार को हमें समाप्त कर परस्पर सहयोग से आगे बढ़ना चाहिए।
सदैव ध्यान में रखो।
हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।
उत्तर :
हमेशा यह बात याद रखनी चाहिए कि सकारात्मक सोच हमारे जीवन को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति होती है। जब हम किसी भी परिस्थिति को अच्छे दृष्टिकोण से देखते हैं, तो कठिनाइयाँ भी छोटी लगने लगती हैं। सकारात्मक सोच हमें आत्मविश्वास, धैर्य और उत्साह देती है।
सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति हर चुनौती में अवसर खोजता है और असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ता है। इससे हमारा मन शांत रहता है, व्यवहार अच्छा होता है और संबंध बेहतर बनते हैं। इसलिए, रोजमर्रा के जीवन में चाहे कितनी भी समस्या क्यों न आए, हमें हमेशा आशावादी, उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक बने रहना चाहिए।
यही आदत हमें सफल, खुश और मजबूत बनाती है।
विचार मंथन
।। करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।।
उत्तर :
इस कहावत का अर्थ है कि लगातार अभ्यास करने से कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाता है।
जिस व्यक्ति की बुद्धि पहले कम समझदार मानी जाती है, वह भी निरंतर मेहनत और अभ्यास से बहुत बुद्धिमान बन सकता है।
यह कहावत हमें बताती है कि
- किसी भी काम में सफलता पाने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है।
- यदि हम बार–बार प्रयास करते रहें, तो असफलता भी हमें रोक नहीं सकती।
- अभ्यास से कौशल बढ़ता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और हम हर काम में निपुण बन जाते हैं।
इसलिए हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और जो काम कठिन लगता है, उसे भी रोज़-रोज़ करके सीखने की कोशिश करनी चाहिए।
अध्ययन कौशल
समाज सेवी महिला की जीवनी पढ़कर प्रेरणदायी अंश चुनो और बताओ।
उत्तर :
मदर टेरेसा एक महान समाजसेवी थीं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों और अनाथों की सेवा में समर्पित किया। उनकी जीवनी पढ़ते समय कई प्रेरणादायी बातें मिलती हैं, लेकिन उनमें से सबसे महत्वपूर्ण अंश यह है :
“सबसे बड़ा धर्म है – मानवता की सेवा करना।”
मदर टेरेसा दिन–रात बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंद लोगों की मदद करती थीं। उन्होंने कोलकाता की झोपड़पट्टियों में रहने वाले बीमार और बेसहारा लोगों को सहारा दिया। उन्होंने ‘मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी’ संस्था की स्थापना की, जो आज भी लाखों लोगों की सेवा कर रही है।
उनका प्रेरणादायी अंश यह है कि –
उन्होंने हमेशा कहा कि, यदि आप दुनिया बदलना चाहते हैं तो पहले अपने आसपास के लोगों की मदद करना शुरू कीजिए। छोटी-सी सेवा भी बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है।
मदर टेरेसा की दया, करुणा और निस्वार्थ सेवा हमें सिखाती है कि –
सच्ची महानता दूसरों के दुख दूर करने में है।
यही उनकी जीवनी का सबसे प्रेरक संदेश है।