श्रम साधना स्वाध्याय

श्रम साधना स्वाध्याय

श्रम साधना स्वाध्याय इयत्ता दहावी हिंदी

पठनीय

महात्मा गांधी के श्रमप्रतिष्ठा और अहिंसा संबंधी विचार पढ़कर चर्चा कीजिए।

उत्तर :

महात्मा गांधी के विचार सदैव मानवता, सत्य और अहिंसा पर आधारित थे। उन्होंने सिखाया कि श्रम ही सच्ची पूजा है – कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को अपने हाथों से काम करना चाहिए, चाहे वह पढ़ा-लिखा हो या गरीब। गांधीजी स्वयं चरखा चलाते थे और लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते थे।

अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल सिद्धांत था। उनका कहना था कि हिंसा से केवल विनाश होता है, जबकि अहिंसा से प्रेम, शांति और एकता का मार्ग खुलता है। उन्होंने सिखाया कि यदि हम प्रेम और सहनशीलता के साथ दूसरों का सामना करें, तो समाज में सौहार्द बना रहेगा।

गांधीजी के श्रमप्रतिष्ठा और अहिंसा के विचार आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इनसे हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत, सत्य और प्रेम ही जीवन को महान बनाते हैं।

श्रवणीय

आर्थिक विषमता को दूर करने वाले उपायों के बारे में सुनकर कक्षा में सुनाइए।

उत्तर :

मैंने आर्थिक विषमता को दूर करने के उपायों के बारे में एक कार्यक्रम में सुना। आर्थिक विषमता का अर्थ है – समाज में अमीर और गरीब के बीच धन और सुविधाओं में बड़ा अंतर होना। इस विषमता को कम करने के लिए कई उपाय बताए गए।

सबसे पहले, सबको समान शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलना बहुत ज़रूरी है। जब हर व्यक्ति पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनेगा, तब गरीबी घटेगी। सरकार को चाहिए कि वह गरीबों के लिए विशेष योजनाएँ बनाए, जैसे – सस्ती शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और स्वरोजगार के साधन। किसानों और मजदूरों को उचित मजदूरी मिले, यह भी एक बड़ा कदम है।

इसके अलावा, अमीर लोगों को समाज के हित में आगे आकर दान और समाजसेवा करनी चाहिए। महिलाओं को भी काम और शिक्षा के समान अवसर मिलें, तो समाज आर्थिक रूप से मजबूत होगा।

संभाषणीय

‘वर्तमान युग में सभी बच्चों के लिए खेल-कूद और शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हैं,’ विषय पर चर्चा करते हुए अपना मत प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर :

संविधान द्वारा सभी बच्चों को खेल-कूद और शिक्षा के समान अवसर प्राप्त है। वर्तमान समय में बच्चों के सर्वागीण विकास हेतु तथा शिक्षा के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु सभी को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार की तरफ से विद्यालयों व महाविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिससे आर्थिक रूप से पिछड़े हुए विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिल रहा है। लड़का हो या लड़की, अमीर हो या गरीब सभी को शिक्षा व खेल-कूद के एक समान अवसर प्रदान करके उनकी प्रतिभा को निखारा जाए।

लेखनीय

‘मेवे फलते श्रम की डाल’ विषय पर अपनी लिखित अभिव्यक्ति दीजिए।

उत्तर :

“मेवे फलते श्रम की डाल”

यह कहावत हमें जीवन में परिश्रम के महत्त्व की ओर संकेत करती है। जैसे किसी पेड़ की डाल पर मीठे मेवे तभी लगते हैं जब उसकी सही देखभाल की जाए, उसी तरह जीवन में सफलता भी तभी मिलती है जब हम मेहनत और लगन से काम करते हैं। बिना श्रम के कोई भी व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता।

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति कठिनाइयों से डरकर पीछे हट जाता है, वह कभी जीवन में ऊँचाइयाँ नहीं छू सकता। जबकि जो व्यक्ति धैर्य और निष्ठा के साथ मेहनत करता है, उसके जीवन में अवश्य फल मिलता है। किसान, मजदूर, विद्यार्थी – सभी की प्रगति श्रम पर ही निर्भर है।

महात्मा गांधी, अब्दुल कलाम, और अन्य महान व्यक्तियों ने भी कड़ी मेहनत से ही अपना स्थान बनाया। इसलिए कहा गया है – “श्रम ही जीवन का सच्चा अलंकार है।”

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

१) उत्तर लिखिए :

१. व्यापारी और उद्योगपतियों के लिए अर्थशास्त्र द्वारा बनाए नए नये नियम –

उत्तर :

खरीद सस्ती-से-सस्ती हो और बिक्री महँगी-से-महँगी।

२. संपत्ति के दो मुख्य साधन –

उत्तर :

अ) सृष्टि के द्रव्य

ब) मनुष्य का शरीर श्रम

३. समाप्त हुई दो प्रथाएँ –

उत्तर :

अ) गुलामी की प्रथा

ब) राजप्रथा

४. कल्याणकारी राज्य का अर्थ –

उत्तर :

सब तरह के दुर्बलों को राज्यसता द्वारा मदद दिया जाना।

२) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

३) तुलना कीजिए :

बुद्धिजीवीश्रमजीवी
१. ————–————–
२. ————–————–

उत्तर :

बुद्धिजीवीश्रमजीवी
१. बौद्धिक काम करना।शारीरिक श्रम करना।
२. अधिक आमदनी प्रतिष्ठित एवं सुखमय जीवन।आमदनी कम, प्रतिष्ठा नहीं, कष्टमय जीवन।

४) लिखिए

उत्तर :

५) पाठ में प्रयुक्त ‘इक’ प्रत्युययुक्त शब्दों को ढूँढकर लिखिए तथा उनमें से किन्हीं चार का स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर :

प्राथमिक, बौद्धिक, सामाजिक, श्रमिक, प्राकृतिक, धनिक, आर्थिक, राजनीतिक।

चार शब्दों का वाक्यों में प्रयोग निम्नलिखित है :

१. शिक्षा का प्राथमिक स्तर बच्चों के विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण होता है।

२. हमें अपने जीवन में सामाजिक दायित्वों को समझना चाहिए।

३. हर देश की प्रगति उसके आर्थिक विकास पर निर्भर करती है।

४. स्वच्छ वायु और जल मनुष्य के लिए प्राकृतिक उपहार हैं।

६) पाठ में कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनके विलोम शब्द भी पाठ में ही प्रयुक्त हुए हैं, ऐसे शब्द ढूँढकर लिखिए।

उत्तर :

१. खर्च X बचत

२. दूर X पास

३. देश X विदेश

४. समता X विषमता

५. गुलाम X बादशाह

६. खर्च X बचत

७. लाभ X हानि

८. हिंसा X अहिंसा

अभिव्यक्ति

‘समाज परोपकार वृत्ति के बल पर ही ऊँचा उठ सकता है’, इस कथन से संबंधित अपने विचार लिखिए।

उत्तर :

‘समाज परोपकार वृत्ति के बल पर ही ऊँचा उठ सकता है’ – यह कथन हमें समाज की वास्तविक उन्नति का मार्ग दिखाता है। परोपकार का अर्थ है निःस्वार्थ भाव से दूसरों का भला करना, बिना किसी लाभ की अपेक्षा के। जब समाज के लोग एक-दूसरे की सहायता करते हैं, तब समाज में प्रेम, सहयोग और एकता की भावना मजबूत होती है। परोपकार ही वह आधार है, जिस पर एक सशक्त और आदर्श समाज का निर्माण होता है।

हमारे देश के महान व्यक्ति जैसे – महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, स्वामी विवेकानंद – सभी ने परोपकार को जीवन का उद्देश्य माना। उन्होंने दूसरों के दुख-दर्द को अपना समझकर समाज की सेवा की। यदि हर व्यक्ति अपने आस-पास के लोगों की मदद करे, तो समाज से गरीबी, अज्ञानता और अन्याय जैसी समस्याएँ दूर हो सकती हैं।

स्वार्थी प्रवृत्ति व्यक्ति और समाज दोनों को पतन की ओर ले जाती है, जबकि परोपकारी भावना सबको एकजुट करती है। परोपकार से व्यक्ति के मन में करुणा, दया और सहानुभूति की भावना जन्म लेती है। इसलिए कहा गया है – “परोपकार ही सच्चा धर्म है, और यही समाज की उन्नति का आधार है।”
इसलिए हमें हमेशा दूसरों की भलाई के लिए तत्पर रहना चाहिए, क्योंकि जहाँ परोपकार है, वहीं सच्ची मानवता है।

भाषा बिंदु

१) निम्न वाक्यों में अधोरेखांकित शब्द समूह के लिए कोष्ठक में दिए गए मुहावरों में से उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए :

[ इज्जत उतारना, हाथ फेरना, काँप उठना, तिलमिला जाना, दुम हिलाना, बोलबाला होना]

१. करामत अली हौले-से लक्ष्मी से स्नेह करने लगा

वाक्य =

उत्तर :

करामत अली लक्ष्मी पर हाथ फेरने लगा।

२. सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं भयभीत हो गया

वाक्य =

उत्तर :

सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा।

३. क्या अपने मुझे अपमानित करने के लिए यहाँ बुलाया था ?

वाक्य =

उत्तर :

क्या अपने मेरी इज्जत उतारने के लिए यहाँ बुलाया था?

४) सिरचन को बुलाओ, चापलूसी करता हुआ हाजिर हो जाएगा।

वाक्य =

उत्तर :

सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा।

५) पंडित बुद्धिराम काकी को देखते ही क्रोध में आ गए।

वाक्य =

उत्तर :

पंडित बुद्धिराम काकी को देखते ही तिलमिला गए।

२) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका अर्थपूर्ण वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

१. गुजर-बसर करना :

उत्तर :

अर्थ : गुज़र-बसर करना – किसी प्रकार जीवन यापन करना।

वाक्य : रीब किसान अपने थोड़े-से खेत से किसी तरह गुज़र-बसर करता है।

२. गला फाड़ना :

उत्तर :

अर्थ : गला फाड़ना – ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना।

वाक्य : मैच में अपनी टीम की जीत पर बच्चे गला फाड़कर खुशी मनाने लगे।

३. कलेजे में हूक उठना :

उत्तर :

अर्थ : कलेजे में हूक उठना – मन में वेदना उत्पन्न होना।

वाक्य : फुटपाथ पर बेसहारा लोगों की हालत देखकर मेरे कलेजे में हुक उठने लगी।

४. सीना तानकर खड़े रहना :

उत्तर :

अर्थ : सीना तानकर खड़े रहना – गर्व या आत्मविश्वास से भरा होना।

वाक्य : सैनिक दुश्मन के सामने सीना तानकर खड़े रहे।

५. टाँग अड़ाना :

उत्तर :

अर्थ : टाँग अड़ाना – बाधा डालना।

वाक्य : ईर्ष्यालु प्रवृति के लोग हमेशा दूसरों के काम में टाँग अड़ाते रहते हैं।

६. जेब ढीली होना :

उत्तर :

अर्थ : जेब ढीली होना – पैसे खर्च होना।

वाक्य : त्योहार के दिनों में लोगों की जेब ढीली हो जाती है।

७. निजात पाना :

उत्तर :

अर्थ : निजात पाना – मुक्ति या छुटकारा पाना।

वाक्य : कई साल की मेहनत के बाद उसे अपने कर्ज से निजात मिली।

८. फूट-फूटकर रोना :

उत्तर :

अर्थ : फूट-फूटकर रोना – बहुत ज़ोर से रोना।

वाक्य : पिता की मृत्यु की खबर सुनकर वह फूट-फूटकर रो पड़ी।

९. मन तरंगायित होना :

उत्तर :

अर्थ : मन तरंगायित होना – हर्ष और उत्साह से भर उठना।

वाक्य : पुरस्कार मिलने पर उसका मन तरंगायित हो उठा।

१०. मुँह लटकाना :

उत्तर :

अर्थ : मुँह लटकाना – उदास या निराश होना।

वाक्य : परीक्षा में असफल होने पर वह मुँह लटकाए बैठा रहा।

उपयोजित लेखन

निम्न शब्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए :

मिट्टी, चाँद, खरगोश, कागज

उत्तर :

“मिट्टी का चाँद और खरगोश”

एक छोटे-से गाँव में राहुल नाम का एक जिज्ञासु और कल्पनाशील बच्चा रहता था। उसे मिट्टी से खिलौने बनाना बहुत पसंद था। एक दिन रात के समय जब वह आँगन में खेल रहा था, उसकी नज़र आसमान में चमकते हुए चाँद पर पड़ी। चाँद की सुंदरता देखकर राहुल बोला, “काश! मैं चाँद तक जा पाता और वहाँ खेल पाता।”

उसने तुरंत मिट्टी उठाई और अपने हाथों से चाँद का एक सुंदर आकार बनाया। फिर उसे लगा कि चाँद पर तो एक खरगोश रहता है — जैसा दादी उसे कहानी में सुनाती थीं। उसने एक कागज़ लिया और उससे खरगोश का आकार काटकर अपने मिट्टी के चाँद पर चिपका दिया। अब वह मिट्टी का चाँद और कागज़ का खरगोश देखकर मुस्कुरा उठा।

थोड़ी देर बाद उसकी माँ आई और बोली, “बेटा, ये क्या बना रहे हो?”
राहुल ने गर्व से कहा, “माँ, मैंने अपना खुद का चाँद बनाया है — मिट्टी का! इसमें मेरा खरगोश रहता है।”
माँ मुस्कराकर बोलीं, “बहुत सुंदर, बेटा! देखो, मेहनत और कल्पना से मिट्टी भी चमकते चाँद जैसी बन सकती है।”

राहुल ने कहा, “सच माँ, अगर हम मन लगाकर कुछ करें तो कुछ भी असंभव नहीं।”

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