दो लघुकथाएँ स्वाध्याय इयत्ता दहावी

दो लघुकथाएँ स्वाध्याय

दो लघुकथाएँ स्वाध्याय इयत्ता दहावी हिंदी

श्रवणीय

बालक/बालिकाओं से संबंधित कोई ऐतिहासिक कहानी सुनकर उसका रूपांतरण संवाद में करके कक्षा में सुनाइए |

उत्तर :

(दृश्य – झाँसी का किला, अंग्रेजों ने चारों ओर से घेरा है)

सैनिक: महारानी, दुश्मनों ने किले को चारों ओर से घेर लिया है। अब क्या करें?

रानी लक्ष्मीबाई: डरने का समय नहीं है वीरों! हम अपनी मातृभूमि के लिए अंतिम साँस तक लड़ेंगे।

सैनिक: लेकिन रानी साहिबा, हमारी सेना बहुत छोटी है।

रानी लक्ष्मीबाई: संख्या नहीं, साहस बड़ा होता है। आज झाँसी की धरती पर हम दिखाएँगे कि भारतीय बालिकाएँ भी वीरता में किसी से कम नहीं।

(नाना साहेब प्रवेश करते हैं)

नाना साहेब: लक्ष्मीबाई! अंग्रेज बहुत शक्तिशाली हैं, अब पीछे हट जाओ।

रानी लक्ष्मीबाई: नहीं नाना, पीछे हटना अब संभव नहीं। “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।”

(घोड़े पर सवार होकर रानी युद्ध में जाती हैं)

अंग्रेज अधिकारी: इस स्त्री को पकड़ो!

रानी लक्ष्मीबाई (तलवार चलाते हुए): भारत माता की जय!

(युद्ध समाप्त होता है, रानी वीरगति प्राप्त करती हैं)

सैनिक (आँखों में आँसू लेकर): हमारी रानी अमर हो गई! उनका साहस सदा हमें प्रेरित करेगा।

लेखनीय

पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की जीवन शैली की जानकारी प्राप्त करके अपनी जीवन शैली से उसकी तुलना करते हुए लिखिए |

उत्तर :

पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की जीवन शैली :
पहाड़ों पर रहने वाले लोग प्राकृतिक वातावरण के बीच सरल और शांत जीवन जीते हैं। वहाँ की जलवायु ठंडी होती है, इसलिए लोग ऊनी कपड़े पहनते हैं। उनके घर लकड़ी, पत्थर और मिट्टी से बने होते हैं ताकि ठंड और बरफ़ से सुरक्षा मिल सके। खेती के लिए वहाँ की ढलान वाली ज़मीन पर सीढ़ीनुमा खेत बनाए जाते हैं। वे आलू, मक्का, जौ, और फल जैसे सेब, खुबानी आदि की खेती करते हैं। पशुपालन भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है — खासकर भेड़, बकरी और याक।
उनकी संस्कृति लोकगीतों, नृत्यों और मेलों से जुड़ी होती है। वे मिलनसार, परिश्रमी और प्रकृति प्रेमी होते हैं।

मेरी (मैदानी क्षेत्र की) जीवन शैली :
मैदानी क्षेत्रों में जीवन अपेक्षाकृत सुविधाजनक और व्यस्त होता है। यहाँ जलवायु सामान्य होती है — न बहुत ठंडी और न बहुत गर्म। घर पक्के होते हैं और शहरों में बिजली, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएँ आसानी से मिल जाती हैं। लोग विभिन्न व्यवसायों में लगे होते हैं — जैसे व्यापार, सेवा, उद्योग और खेती।
यहाँ की संस्कृति में विविधता है, लेकिन जीवन की गति तेज़ है और लोगों के पास समय कम होता है।

पठनीय

अपनी पसंद की कोई सामाजिक ई-बुक पढ़िए |

उत्तर :

मैंने सामाजिक विषय पर आधारित ई-बुक “स्वामी और मित्र” (लेखक – आर.के. नारायण) पढ़ी। यह एक बालक स्वामी और उसके मित्रों की कहानी है, जो समाज, परिवार और विद्यालय के जीवन से जुड़ी हुई है।

इस ई-बुक में समाज की सच्चाइयों, बच्चों की भावनाओं और मित्रता के महत्व को सरल भाषा में बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कहानी यह सिखाती है कि ईमानदारी, साहस और सच्ची मित्रता जीवन में सबसे बड़ा धन है।

इस पुस्तक को पढ़कर मुझे समझ आया कि समाज में हर व्यक्ति का अपना महत्व होता है और हमें एक-दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

संभाषणीय

‘शहर और महानगर का यांत्रिक जीवन’ विषय पर बातचीत कीजिए |

उत्तर :

रीना: नमस्ते आकाश! सुना है तुम अब मुंबई में रहते हो। बताओ न, वहाँ का जीवन कैसा होता है?

आकाश: नमस्ते रीना! हाँ, मैं अब मुंबई में पढ़ाई कर रहा हूँ। यहाँ का जीवन बहुत तेज़ रफ़्तार वाला है। सुबह-सुबह लोग ट्रेन, बस और मेट्रो पकड़ने के लिए भागते हैं। सबके चेहरे पर जल्दी का भाव रहता है।

रीना: वाह, सुनने में तो बड़ा रोमांचक लगता है! लेकिन क्या तुम्हें वहाँ आनंद आता है?

आकाश: देखो, सुविधाएँ तो बहुत हैं — ऊँची-ऊँची इमारतें, अच्छे स्कूल, बड़े अस्पताल, मॉल, सिनेमा और हर चीज़ मिलती है। पर एक सच्चाई यह भी है कि यहाँ का जीवन बहुत यांत्रिक है। लोग दिन-रात काम में व्यस्त रहते हैं। किसी को किसी से बात करने या मिलने का समय नहीं होता।

रीना: मतलब वहाँ रिश्तों में उतनी आत्मीयता नहीं होती?

आकाश: बिल्कुल! यहाँ लोग अपने पड़ोसी का नाम तक नहीं जानते। हर कोई अपनी दुनिया में खोया है — ऑफिस, मोबाइल, या कंप्यूटर में। सब कुछ मशीन की तरह चलता है। सुबह ऑफिस, शाम थकान, फिर टीवी या मोबाइल और नींद। यही दिनचर्या है।

रीना: ओह! हमारे गाँव में तो सब एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। अगर किसी के घर कोई परेशानी आती है तो पूरा गाँव साथ खड़ा होता है। त्योहारों पर सब मिलकर नाचते-गाते हैं, आपस में मिठाई बाँटते हैं।

आकाश: सच कहूँ तो मुझे तुम्हारी बात सुनकर अपने बचपन की याद आ गई। जब मैं छोटा था और दादी के गाँव जाता था, तो वहाँ की हवा, शांति और लोगों का अपनापन बहुत अच्छा लगता था।

रीना: तो फिर शहर में क्या अच्छा लगता है तुम्हें?

आकाश: शहर में पढ़ाई और करियर के बहुत अवसर हैं। यहाँ जीवन सुविधाजनक है — बिजली, पानी, सड़कें, शिक्षा और रोजगार की बेहतर व्यवस्था है। लेकिन, इन सबके बीच मन की शांति और सच्चे संबंध कहीं खो जाते हैं।

रीना: मतलब, शहर की रफ़्तार के साथ इंसान भी मशीन बन गया है?

आकाश: हाँ रीना, यही सच्चाई है। यहाँ जीवन “यांत्रिक” हो गया है — भावनाओं से ज़्यादा समय, पैसे और काम की कीमत है।

रीना: मैं समझ सकती हूँ। हर जगह की अपनी अच्छाई और कठिनाइयाँ होती हैं। गाँव का जीवन भले सादा हो, लेकिन वहाँ सुकून और अपनापन है।

आकाश: बिल्कुल! मेरा मन भी कहता है कि कभी छुट्टी में गाँव जाकर कुछ दिन प्राकृतिक वातावरण में रहूँ — बिना शोर, बिना ट्रैफिक, सिर्फ़ शांति और सच्चे लोग।

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

१) संजाल पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

२) उत्तर लिखिए :

उत्तर :

३) कारण लिखिए :

१. युवक को पहले नौकरी न मिल सकी……………..

उत्तर :

युवक को पहले नौकरी न मिल सकी, क्योंकि हर जगह भ्रष्टाचार, रिश्वत का बोलबाला था।

2. आखिरकार अधिकारियों द्वारा युवक का चयन कर लिया गया…………….

उत्तर :

आखिरकार अधिकारियों द्वारा युवक का चयन कर लिया गया, क्योंकि भीतर बैठे अधिकारियों ने गंभीरता से विचार विमर्श करने के बाद युवक के सही उत्तर की दाद दी थी।

४) कृति पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

५) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :

उत्तर :

अभिव्यक्ति

‘भ्रष्टाचार एक कलंक’ विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर :

भ्रष्टाचार का अर्थ है दूषित आचार या जिसका आचार बिगड़ गया हो।आज हमारे जीवन के हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार व्याप्त है। आए दिन नेताओं के भ्रष्टाचार के समाचार आते रहते हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में कितने नेता जेल काट रहे हैं। ये जनता के पैसे हड़प कर गए, पर इन्हें शर्म तक नहीं आती। आज हमारे देश में तेजी से भोगवादी संस्कृति फैल रही है। लोगों में रातोरात धनवान बनने की लालसा जोर पकड़ रही है। चारों और धन बटोरने के लिए धोखाधड़ी, छल-कपट, किए जा रहे हैं। अपनी भौतिक समृद्धि बढ़ाने के लिए लोगों ने भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना लिया है। छोटे से छोटे काम के लिए लोगों को रिश्वत का सहारा लेना पड़ता है। शिक्षा का पवित्र क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रह गया है। लोगों में देशभक्ति और कर्तव्य निष्ठा की भावना घटती जा रही है। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय जीवन के लिए अभिशाप बन गया है। हमें आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार एक कलंक है। इस कलंक को मिटाना जरूरी है। हम सबको इसके लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने की जरूरत है।

भाषा बिंदु

१) अर्थ के आधार पर निम्न वाक्यों के भेद लिखिए :

१. क्या पैसा कमाने के लिए गलत रास्ता चुनना उचित है ?

उत्तर :

प्रश्नवाचक वाक्य

२. इस वर्ष भीषण गरमी पड़ रही थी।

उत्तर :

विधानवाचक वाक्य

३. आप उन गहनों की चिंता न करे।

उत्तर :

निषेधवाचक वाक्य

४. सुनील, जरा ड्राइवर को बुलाओ।

उत्तर :

आज्ञार्थक वाक्य

५. अपने समय के लेखकों में आप किन्हें पसंद करते हैं ?

उत्तर :

प्रश्नवाचक वाक्य

६. सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया।

उत्तर :

विधानवाचक वाक्य

७. हाय ! कितनी निर्दयी हूँ मैं।

उत्तर :

विस्मयादिबोधक वाक्य

८. काकी उठो, भोजन कर लो।

उत्तर :

आज्ञार्थक वाक्य

९. वाह ! कैसी सुगंध है।

उत्तर :

विस्मयादिबोधक वाक्य

१०. तुम्हारी बात मुझे अच्छी नहीं लगी।

उत्तर :

निषेधवाचक वाक्य

२) कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्यों में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए :

१. थोड़ी बातें हुईं। (निषेधार्थक वाक्य)

उत्तर :

थोड़ी भी बातें नहीं हुईं।

२. मानू इतका ही बोल सकी। (प्रश्नार्थिक वाक्य)

उत्तर :

क्या मानू इतना ही बोल सकी ?

३. मैं आज रात का खाना नहीं खाऊँगा। (विधानार्थक वाक्य)

उत्तर :

मैं आज रात का खाना खाऊँगा।

४. गाय ने दूध देना बंद कर दिया। (विस्मयार्थक वाक्य)

उत्तर :

अरे ! गाय ने दूध देना बंद कर दिया।

५. तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। (आज्ञार्थक वाक्य)

उत्तर :

तुम अपना ख्याल रखो।

३) प्रथम इकाई के पाठों में से अर्थ के आधार पर विभिन्न प्रकार के पाँच वाक्य ढूंढ़कर लिखिए।

उत्तर :

i) करामत अली इधर दो-चार दिनों से अस्वस्थ था। (विधानावाचक वाक्य)

ii) इन्हें मरीज से हमदर्दी नहीं होती। (निषेधात्मक वाक्य)

iii) तो उसकी सजा इसे लाठियों से दी गई ? (प्रश्नवाचक वाक्य)

iv) “जाओ, लक्ष्मी का राशन ले आओ”। (आज्ञार्थक वाक्य)

v) हे ईश्वर, अगर मेरी दूसरी टाँग भी तोड़नी हो तो जरूर तोड़ें मगर इस जगह जहाँ मेरा कोई न हो | (इच्छावाचक वाक्य)

४) रचना के आधार पर वाक्यों के भेद पहचानकर कोष्ठक में लिखिए :

१. अधिकारियों के चेहरे पर हलकी-सी मुस्कान और उत्सुकता छा गई। [ ——– ]

उत्तर :

सरल वाक्य।

२. हर ओर से अब वह निराश हो गया था। [ ——– ]

उत्तर :

सरल वाक्य।

३. उसे देख -देख बड़ा जी करता कि मौका मिलते ही उसे चलाऊँ। [ ——– ]

उत्तर :

मिश्र वाक्य।

४. वह बूढ़ी काकी पर झपटी और उन्हें दोनों हाथों से झटककर बोली।[ ——– ]

उत्तर :

संयुक्त वाक्य।

५. मोटे तौर पर दो वर्ग किए जा सकते हैं। [ ——– ]

उत्तर :

सरल वाक्य।

६. अभी समाज में यह चल रहा है क्योंकि लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चलाते हैं। [ ——– ]

उत्तर :

संयुक्त वाक्य।

५) रचना के आधार पर विभिन्न प्रकार के तीन-तीन वाक्य पाठों से ढूंढकर लिखिए।

उत्तर :

a) सरल वाक्य :

i) आज उसे साक्षात्कार के लिए जाना है।

ii) अब तक उसके हिस्से में सिर्फ़ असफलता ही आई थी।

iii) रिश्वत भ्रष्टाचार की बहन है।

b) संयुक्त वाक्य :

i) अधिकारियों के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई और उत्सुकता छा गई।

ii) व्यक्ति समाज को कम-से-कम देने की इच्छा रखता है लेकिन समाज से अधिक-से-अधिक लेने की इच्छा रखता है।

iii) विषमता दूर करने में कानून भी कुछ मदद देता है, परंतु कानून से मानवोचित गुणों का विकास नहीं हो सकता।

c) मिश्र वाक्य :

i) भ्रष्टाचार एक ऐसा कीड़ा है, जो देश को घुन की तरह खा रहा है।

ii) वह जानता था कि यहाँ भी उसका चयन नहीं होगा।

iii) संपत्ति तो वे ही चीजें हो सकती हैं, जो किसी-न-किसी रूप में मनुष्य के उपयोग में आती हैं।

उपयोजित लेखन

‘जल है तो कल है’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।

उत्तर :

हवा के पश्चात प्राणियों को जीवित रहने के लिए जिस चीज की आवश्यकता होती है वह है जल। जल के बिना प्राणी अधिक दिनों तक नहीं जी सकता इसीलिए कहा जाता है कि जल ही जीवन है।

जल हमें कुओं, तालाबों और नदियों से मिलता है। वर्षा का जल तालाबों, झीलों आदि में जमा होता है। कुछ पानी भूगर्भ में चला जाता है। शेष पानी नदियों में होता हुआ समुद्र में चला जाता हैं। भूगर्भ का पानी कुओं के माध्यम से पानी के काम में लाया जाता हैं | तालाबों और झीलों का शुद्ध किया जाता है। इसके बाद वह पीने लायक होता है। गाँवों में अधिकतर कुओं के पानी से ही काम चलाया जाता है। बड़े-बड़े शहरों में नदियों और झीलों के पानी को शुद्ध करके पीने के काम में लाया जाता है।

हर व्यक्ति को पानी की आवश्यकता होती है। बिना पानी के किसी का काम नहीं चल सकता। निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण आज पानी की समस्या विकट हो गई है। इसका कारण है पानी का अंधाधुंध उपयोग। गाँवों में सिंचाई के लिए अंधाधुंध तरीके से भू-जल का दोहन किया जा रहा है। इस कारण पानी का स्तर निरंतर नीचे-ही-नीचे जा रहा है। कहीं-कहीं तो कुओं में पानी ही नहीं रहा।

पीने का पानी कम होने का कारण वर्षा का निरंतर कम होते जाना है। पेड़ों और जंगलों की अंधाधुंध कटाई इसका प्रमुख कारण है। आए दिन पानी के लिए झगड़े होते रहते हैं। देश के अंदर एक राज्य दूसरे राज्य से पानी के लिए झगड़ता है। एक देश दूसरे देश से जल के लिए लड़ता है। पानी की समस्या सारी दुनिया में है। कुछ लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि भविष्य में पानी के लिए महायुद्ध होंगे।

पानी का अशुद्ध होना भी पानी की कमी का एक कारण है।अशुद्ध पानी से तरह-तरह की जानलेवा बीमारियाँ होती हैं। शहरों के किनारे बहने वाली नदियों में शहर की सारी गंदगी डाली जा रही है। कल-कारखानों का विषैला पानी नदियों में प्रवाहित होता है। वही पानी पीने के लिए दिया जाता है। इससे लोगों को तरह-तरह की बीमारियाँ होती है।

सरकार की ओर से हर व्यक्ति तक पर्याप्त शुद्ध पेय जल पहुँचाने का अथक प्रयाय किया जा रहा है। फिर भी अभी इस दिशा में और प्रयास करने की जरूरत है। हर व्यक्ति इस उम्मीद में है कि उसे पर्याप्त शुद्ध जल उपलब्ध हो। आखिर जल है, तो कल हैं।

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